विस्तृत उत्तर
हाँ, कुछ प्रसंगों में जैसे अर्जुन और द्रोण के युद्ध में आग्नेयास्त्र का प्रतिकार स्वयं आग्नेयास्त्र से भी किया गया। जब गुरु द्रोणाचार्य ने अर्जुन पर आग्नेयास्त्र चलाया तो अर्जुन ने भी अपने आग्नेयास्त्र से ही उसका सामना कर उसे निष्प्रभावी कर दिया। इसका अर्थ यह हो सकता है कि समान शक्ति का अस्त्र भी विरोधी अस्त्र के प्रभाव को संतुलित या निरस्त कर सकता था, या यह योद्धा के कौशल पर निर्भर करता था कि वह कैसे अपने अस्त्र का प्रयोग करके विरोधी के अस्त्र को दिशाहीन या कमजोर कर दे।
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