विस्तृत उत्तर
महाभारत में अर्जुन ने अपनी धनुर्विद्या का प्रदर्शन करते हुए एक अद्भुत कौशल दिखाया। उन्होंने पहले आग्नेयास्त्र चलाकर भयंकर अग्नि उत्पन्न की और फिर वरुणास्त्र चलाकर जल की वर्षा की जिससे प्रज्वलित अग्नि शांत हो गई। यह रंगभूमि में एक प्रारंभिक सार्वजनिक प्रदर्शनों में से एक था। इस प्रदर्शन ने अर्जुन के असाधारण दिव्यास्त्र ज्ञान और उनकी युद्ध कला की श्रेष्ठता को सिद्ध किया। यह प्रसंग वरुणास्त्र की आग्नेयास्त्र-प्रतिकारक क्षमता का भी स्पष्ट प्रमाण है।
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