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मंदिर ज्ञान📜 मंदिर स्थापत्य शास्त्र1 मिनट पठन

नागर शैली, द्राविड़ शैली और वेसर शैली में क्या भेद है?

संक्षिप्त उत्तर

नागर (उत्तर): वक्र शिखर, छोटा प्रांगण — खजुराहो। द्राविड़ (दक्षिण): पिरामिड, विशाल गोपुरम — मीनाक्षी। वेसर (मध्य): मिश्र — बेलूर/पट्टडकल। विंध्य = विभाजक।

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विस्तृत उत्तर

भारतीय मंदिर 3 प्रमुख शैलियां:

| विषय | नागर (उत्तर) | द्राविड़ (दक्षिण) | वेसर (मध्य) |

|-------|-------------|-----------------|-------------|

| क्षेत्र | विंध्य उत्तर | विंध्य दक्षिण | मध्य भारत |

| शिखर | वक्राकार (curvilinear) | पिरामिड (सीढ़ीदार) | दोनों मिश्रित |

| गोपुरम | नहीं/छोटा | विशाल (प्रवेश द्वार) | मध्यम |

| प्रांगण | छोटा | विशाल (चारदीवारी) | मध्यम |

| जल कुंड | कम | प्रमुख | कभी-कभी |

| उदाहरण | खजुराहो, कोणार्क, काशी | मीनाक्षी, रामेश्वरम, तंजावुर | बेलूर, हैलेबिडू, पट्टडकल |

| काल | गुप्त→प्रतिहार | पल्लव→चोल→विजयनगर | चालुक्य→होयसल |

वेसर = मिश्र: नागर + द्राविड़ = वेसर — दक्कन/कर्नाटक विशेष।

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शास्त्रीय स्रोत
मंदिर स्थापत्य शास्त्र
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