विस्तृत उत्तर
रामायण के रचनाकाल को लेकर विद्वानों में भिन्न-भिन्न मत हैं और इसका एक निश्चित काल बताना कठिन है।
पौराणिक दृष्टि से रामायण त्रेतायुग की रचना है। शास्त्रीय मान्यता यह है कि महर्षि वाल्मीकि ने यह महाकाव्य श्रीराम के जीवनकाल में ही लिखा था और स्वयं वाल्मीकि आश्रम में जब माता सीता निवास कर रहीं थीं, तब लव-कुश ने रामायण का पाठ किया था। इस दृष्टि से यह करोड़ों वर्ष पुरानी रचना है।
आधुनिक विद्वानों और शोधकर्ताओं के अनुसार वाल्मीकि रामायण की रचना लगभग 500 ईसा पूर्व से 400 ईसा पूर्व के बीच हुई मानी जाती है, हालाँकि कुछ विद्वान इसे 1400 ईसा पूर्व तक ले जाते हैं। कुछ खगोलीय गणनाओं के आधार पर इसे लगभग 31वीं शताब्दी ईसा पूर्व का बताया जाता है।
वाल्मीकि रामायण संस्कृत साहित्य का प्रथम महाकाव्य है। इसीलिए महर्षि वाल्मीकि को 'आदिकवि' और रामायण को 'आदिकाव्य' कहा जाता है। इसमें अनुष्टुप छंद में 24,000 श्लोक हैं जो सात कांडों में विभाजित हैं — बालकांड, अयोध्याकांड, अरण्यकांड, किष्किंधाकांड, सुंदरकांड, युद्धकांड और उत्तरकांड।
वाल्मीकि रामायण की सबसे पुरानी उपलब्ध पांडुलिपि मिथिला में लिखी गई है जो नेपाल के राष्ट्रीय संग्रहालय काठमांडू में सुरक्षित है। इस महाकाव्य के आधार पर विश्व की अनेक भाषाओं में 300 से अधिक रामायणें लिखी जा चुकी हैं।





