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विस्तृत उत्तर
विष्णु जी ने मोहिनी रूप इसलिए लिया क्योंकि असुरों ने अमृत कलश छीन लिया था। यदि असुर अमृत पी लेते, तो वे अजेय होकर तीनों लोकों में अधर्म फैला सकते थे। सीधे बल प्रयोग से विवाद बढ़ सकता था, इसलिए भगवान ने माया और बुद्धि का सहारा लिया। मोहिनी रूप इतना आकर्षक था कि असुर विवेक खो बैठे और अमृत कलश उन्हें सौंप दिया। मोहिनी ने उन्हें अपनी शर्त मानने को कहा और फिर अमृत देवताओं को पिला दिया। इस प्रकार विष्णु ने बिना बड़े युद्ध के धर्म की रक्षा की।
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