विस्तृत उत्तर
मधु और कैटभ को जब महामाया से इच्छा-मृत्यु का वरदान मिला, तब उन्हें लगा कि अब कोई उन्हें मार नहीं सकता। यह वरदान उनके लिए आत्मनियंत्रण का साधन बन सकता था, लेकिन उन्होंने इसे अहंकार का कारण बना लिया। वे अपनी शक्ति से प्रलय-जल को मथने लगे और स्वयं को ब्रह्मांड का स्वामी समझने लगे। उसी अहंकार में उन्होंने ब्रह्मा जी को चुनौती दी और वेदों को छीनकर रसातल में छिपा दिया। कथा बताती है कि वरदान या शक्ति अपने आप में समस्या नहीं है; समस्या तब होती है जब शक्ति धर्म और विनम्रता से अलग हो जाती है।
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