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गरुड़ पुराण प्रश्नोत्तरी — 591 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित गरुड़ पुराण विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 591 प्रश्न

जीवन एवं मृत्यु

पशुहत्या करने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

पशुहत्यारे को — कुंभीपाक (खौलता तेल), क्रीमिक (कीट काटते हैं), सूलप्रोत (लोहे के शूल), तामिस्र (पिटाई)। पुनर्जन्म में पशु योनि। 'हिंसा को जीवनशैली बनाना = कुंभीपाक।'

पशुहत्याकुंभिपाकक्रीमिक
जीवन एवं मृत्यु

बालहत्या करने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

बालहत्यारे को — वैतरणी की यातना, लोहशंकु नरक (लोहे की कीलें), घोर नरक में असहनीय यातनाएं। पुनर्जन्म में नपुंसक योनि। 'निर्दोष को कष्ट = आत्मा का पतन।'

बालहत्यानरकवैतरणी
जीवन एवं मृत्यु

स्त्रीहत्या करने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

स्त्रीहत्यारे को — वैतरणी की भीषण यातना, घोर नरक में असहनीय यातनाएं। पुनर्जन्म में चांडाल योनि। गर्भपात भी स्त्रीहत्या समकक्ष — नपुंसक जन्म।

स्त्रीहत्यानरकचांडाल योनि
जीवन एवं मृत्यु

गुरुहत्या करने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

गुरुहत्यारे को — महापातक नरक (कीड़े खाते हैं), वैतरणी की यातना, कुंभीपाक जैसे भयंकर नरक। पुनर्जन्म में ब्रह्मराक्षस योनि। 'गुरु का अपमान = नरक के द्वार।'

गुरुहत्यामहापातकवैतरणी
जीवन एवं मृत्यु

ब्रह्महत्या करने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

ब्रह्महत्यारे को — वैतरणी में भीषण यातना, फिर कुंभीपाक नरक (जलती रेत और खौलता तेल)। 'ब्रह्महत्या सबसे बड़ा पाप।' भूमिदान और वृषोत्सर्ग से प्रायश्चित संभव।

ब्रह्महत्याकुंभिपाकवैतरणी
जीवन एवं मृत्यु

नरक के कष्टों का उद्देश्य क्या है?

नरक के कष्टों का उद्देश्य — आत्मा की शुद्धि, कर्म-न्याय की पूर्ति, पाप से सबक और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करना। 'नरक शिक्षा-स्थल है — सजा-स्थल नहीं।' धर्माचरण की प्रेरणा देना।

नरकउद्देश्यआत्म-शुद्धि
जीवन एवं मृत्यु

नरक के कष्टों का अंत कब होता है?

नरक के कष्टों का अंत — पाप-फल पूरा भोगने पर। 'नरक शाश्वत नहीं।' पुनर्जन्म मिलता है। परिजनों के वृषोत्सर्ग-गया-श्राद्ध से काल कम हो सकता है। पाप की मात्रा के अनुसार हजारों-लाखों वर्ष।

नरककष्ट का अंतपाप-फल
जीवन एवं मृत्यु

नरक में जीव को किस प्रकार की आग में डाला जाता है?

नरक में अग्नि-प्रकार — रौरव (अग्निकुंड), कुंभीपाक (खौलता तेल), कालसूत्र (तप्त भूमि), तप्तलोहमय (तपता लोहा), तप्तकुंभ (खौलता बर्तन), सूलप्रोत (ज्वालाएँ)। 'जलती रहती है पर भस्म नहीं।'

नरकआगप्रकार
जीवन एवं मृत्यु

नरक में जीव को मरने क्यों नहीं दिया जाता?

नरक में मृत्यु नहीं — क्योंकि पाप-फल पूरा भोगना है, आत्मा शाश्वत है (नष्ट नहीं होती), शुद्धि-प्रक्रिया पूर्ण करनी है। 'जलती रहती है पर भस्म नहीं होती।'

नरकमृत्यु नहींकारण
जीवन एवं मृत्यु

नरक में जीव को बार-बार क्यों कष्ट दिया जाता है?

बार-बार कष्ट इसलिए — पाप-फल पूर्ण होने तक, आत्मा की क्रमिक शुद्धि के लिए, न्याय के पूर्ण निर्वाह के लिए। 'यातना तब तक — जब तक सारे पापों का हिसाब पूरा नहीं।' मृत्यु नहीं — इसीलिए बार-बार।

नरकबार-बार कष्टकारण
जीवन एवं मृत्यु

महा रौरव नरक में जीव को कैसे कष्ट मिलता है?

महारौरव में — रौरव से और तीव्र यातना। बड़े रुरु जीव, अधिक अग्नि, अधिक लंबी अवधि। निर्दोष-पीड़कों के लिए — 'कल्पान्त तक नारकीय यातना।'

महा रौरवयातनानरक
जीवन एवं मृत्यु

शूकरमुख नरक में जीव को कैसे पीटा जाता है?

शूकरमुख में — सूअर के मुख वाले भयंकर प्राणी आत्मा को नोचते-काटते हैं। मृत्यु नहीं — बार-बार पुनर्जागरण और पुनः नोचना। 'जिसने स्त्री को पीड़ा दी — उसे पशु नोचते हैं।'

शूकरमुख नरकयातनासूअर
जीवन एवं मृत्यु

शाल्मली नरक में कांटों का क्या वर्णन है?

शाल्मली नरक के काँटे — 5 योजन विस्तृत, अग्नि-दीप्त वृक्ष पर तलवार जैसे तीखे काँटे। नीचे मुख करके साँकलों में बाँधकर लटकाया जाता है, भूखे-प्यासे पीटे जाते हैं। 'कोई रक्षक नहीं।'

शाल्मली नरककाँटेवृक्ष
जीवन एवं मृत्यु

अंध तामिस्र नरक में अंधकार का क्या वर्णन है?

अंधतामिस्र में अंधकार — तामिस्र से भी गहरा 'परम अंधकार'। न प्रकाश, न आवाज, न स्पर्श — केवल भयावह एकाकीपन। 'चुगली करने वालों को अंधेरे में तड़पाया जाता है।' पाप के ज्ञान-नाश का प्रतीक।

अंध तामिस्रअंधकारनरक
जीवन एवं मृत्यु

तामिस्र नरक में जीव को कैसे रखा जाता है?

तामिस्र में — अंधकारमय गुफा में बंद, कोई प्रकाश नहीं, लोहे की छड़ों से लगातार पिटाई, ऊपर से कौवे-उल्लू नोचते हैं। 'कोई शांति नहीं — केवल तड़प।'

तामिस्र नरकअंधकारयातना विधि
जीवन एवं मृत्यु

असिपत्रवन नरक में जीव को कैसे घायल किया जाता है?

असिपत्रवन में — तलवार जैसे तीखे पत्तों वाले 2000 योजन के वन में दौड़ाया जाता है, पत्ते अंगों को काटते हैं। मित्र-द्रोही और घर में आग लगाने वाले पहले अग्निकुंड में, फिर इस वन में।

असिपत्रवन नरकयातनातलवार जैसे पत्ते
जीवन एवं मृत्यु

कालसूत्र नरक में जीव को कैसे जलाया जाता है?

कालसूत्र में — आग पर चलाया जाता है। तप्त-लोह जैसी धधकती भूमि पर चलना पड़ता है — ऊपर से भी अग्नि। 'समय बर्बाद करने वाले को कालसूत्र की आग।' पाप-फल तक यातना जारी।

कालसूत्र नरकयातनाआग
जीवन एवं मृत्यु

रौरव नरक में जीव को कैसे काटा जाता है?

रौरव में — रुरु नामक भयानक जीव नोचता-काटता है, झूठी गवाही वाले को ईख की तरह पेरा जाता है। अग्निकुंड में जलाया जाता है। 'रौरव नाम रुरु जीव के कारण।'

रौरव नरकयातनारुरु जीव
जीवन एवं मृत्यु

कुंभिपाक नरक में जीव को कैसे उबाला जाता है?

कुंभिपाक में — विशाल कड़ाही में खौलते तेल में डाला जाता है, साथ में जलती रेत की यातना भी। 'कुंभी (कड़ाही) + पाक (पकाना)' — नाम में ही विधि। मृत्यु नहीं — पाप-फल तक पकाई।

कुंभिपाकयातना विधिखौलता तेल
जीवन एवं मृत्यु

किस पाप के लिए विशेष नरक मिलता है?

प्रत्येक पाप के लिए विशेष नरक — झूठ→रौरव, हिंसा→कुंभीपाक, स्त्री-अपमान→शूकरमुख, मित्र-द्रोह→असिपत्रवन, समय-बर्बादी→कालसूत्र। 'हर दंड न्यायसंगत है — पाप के अनुसार।'

विशेष नरकपाप सूचीकर्मफल
जीवन एवं मृत्यु

किस पाप के लिए महा रौरव नरक मिलता है?

महारौरव नरक — निर्दोष प्राणियों की बड़े पैमाने पर हत्या, भीषण हिंसा और अनुचित तरीके से प्राण-हरण पर। 21 प्रमुख नरकों में तीसरे स्थान पर। 'कल्पान्त तक यातना।'

महा रौरवपापनिर्दोष हत्या
जीवन एवं मृत्यु

किस पाप के लिए शूकरमुख नरक मिलता है?

शूकरमुख नरक — स्त्री का अपमान, उत्पीड़न और शोषण पर। 'सूकरमुख नरक में स्त्री का अपमान करने वालों को सूअर नोचते हैं।' जिसने स्त्री को पशुवत समझा — उसे पशु नोचते हैं।

शूकरमुख नरकपापस्त्री अपमान
जीवन एवं मृत्यु

किस पाप के लिए शाल्मली नरक मिलता है?

शाल्मली नरक — परस्त्री-गमन और पति को दोष लगाकर परपुरुष से संबंध, झूठी गवाही, छल से धन-अर्जन पर। 5 योजन विस्तृत शाल्मली वृक्ष पर नीचे मुख करके साँकलों में बाँधकर पिटाई।

शाल्मली नरकपापपरस्त्री
जीवन एवं मृत्यु

किस पाप के लिए अंध तामिस्र नरक मिलता है?

अंधतामिस्र नरक — अधर्म से परिवार का पोषण, चुगली-पर-निंदा, और जीवनसाथी के प्रति गहरे विश्वासघात पर। तामिस्र से भी अधिक गहरा अंधकार — 'परम एकाकीपन और अंधकार की यातना।'

अंध तामिस्रपापकर्मफल

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सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

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