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मृत्यु प्रश्नोत्तरी — 97 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित मृत्यु विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 97 प्रश्न

लोक

गरुड़ पुराण में प्रेत अवस्था क्या है?

मृत्यु के बाद की सूक्ष्म वायवीय अवस्था।

प्रेत अवस्थागरुड़ पुराणमृत्यु
श्राद्ध दर्शन

प्रेत योनि क्या है?

प्रेत योनि = मृत्यु के बाद आत्मा स्थूल शरीर त्यागकर सूक्ष्म शरीर धारण कर जिस अवस्था में जाती है। सपिण्डीकरण संस्कार से पहले आत्मा प्रेत रूप में भटकती है। गरुड़ पुराण के प्रेत कल्प में विस्तृत वर्णन।

प्रेत योनिगरुड़ पुराणसूक्ष्म शरीर
लोक

धन के प्रति आसक्ति से यक्ष योनि क्यों मिलती है?

धन-संचय की तीव्र लालसा और मृत्यु के समय संपत्ति में अटका मन यक्ष या यक्षिणी योनि का कारण बनता है।

धन आसक्तियक्ष योनिखजाना
लोक

जल में डूबने से मृत्यु के बाद आत्मा प्रेत क्यों बन सकती है?

जल में डूबना अकाल मृत्यु है; शेष आयु और आसक्ति के कारण आत्मा प्रेत रूप में भटक सकती है।

जल में डूबनाअकाल मृत्युप्रेत योनि
लोक

पापी आत्मा यमदूतों को देखकर क्यों डरती है?

पापी आत्मा यमदूतों के विकराल रूप, काल-पाश, त्रिशूल और दंड को देखकर भय से कांप उठती है।

पापी आत्मायमदूतमृत्यु
लोक

अंगुष्ठमात्र सूक्ष्म शरीर क्या होता है?

अंगुष्ठमात्र सूक्ष्म शरीर अंगूठे के आकार की वह देह है जिसे यमदूत शरीर से निकालते हैं और जिससे आत्मा यातनाएँ भोगती है।

अंगुष्ठमात्रसूक्ष्म शरीरयातना देह
लोक

यमदूतों का स्वरूप कैसा बताया गया है?

यमदूत विकराल, लाल आँखों वाले, भयानक मुख वाले, काल-पाश, मुद्गर, त्रिशूल और कोड़े धारण किए हुए बताए गए हैं।

यमदूत स्वरूपगरुड़ पुराणकाल पाश
लोक

यमदूत कौन हैं?

यमदूत यमराज के दंडाधिकारी हैं, जो मृत्यु के बाद पापी आत्मा को यमलोक तक ले जाते हैं।

यमदूतयमराजमृत्यु
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

मृत्यु के बाद घर में अशौच क्यों माना जाता है?

अशौच इसलिए माना जाता है ताकि परिजन प्रेत की सद्गति और पारलौकिक देह-निर्माण पर ध्यान दें।

अशौचघरमृत्यु
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

अशौच या सूतक क्या होता है?

मृत्यु से सपिण्डीकरण तक घर और परिजनों में रहने वाली अशुद्धि को अशौच या सूतक कहा जाता है।

अशौचसूतकमृत्यु
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

मृत्यु के बाद आत्मा अंगूठे के आकार की क्यों कही गई है?

प्राण निकलते ही आत्मा अंगुष्ठमात्र सूक्ष्म स्वरूप धारण करती है, जिसे यमदूत पाश से बाँधते हैं।

अंगुष्ठमात्र आत्मामृत्युसूक्ष्म शरीर
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

यमदूतों को देखकर पापी जीव क्या करता है?

यमदूतों को देखकर पापी जीव भय से मल-मूत्र त्याग देता है।

यमदूतपापी जीवभय
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

भागवत पुराण में यमदूतों का वर्णन कैसे है?

भागवत पुराण में यमदूतों को भयंकर, उग्र दृष्टि वाले और पापी जीव को भयभीत करने वाला बताया गया है।

भागवत पुराणयमदूतमृत्यु
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

मृत्यु के समय यमदूत कब आते हैं?

जब प्राण कंठ में अवरुद्ध होते हैं, तब पापी जीव के सामने यमदूत आते हैं।

यमदूतमृत्युप्राण
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

प्राण कंठ में रुकने पर क्या होता है?

प्राण कंठ में रुकने पर चेतना सिमटती है और पापी जीव को यमदूत दिखाई देते हैं।

प्राणोत्क्रमणकंठयमदूत
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

मृत्यु के समय देह की पवित्रता कैसे रखी जाती है?

गोमय-लेपित भूमि, कुशा, तुलसी, शालिग्राम और नौ द्वारों में स्वर्ण से मृत्यु-समय देह की पवित्रता रखी जाती है।

देह पवित्रतामृत्युतुलसी
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

मृत्यु के समय कंठ पर तुलसी पत्र क्यों रखा जाता है?

कंठ पर तुलसी पत्र रखना मृत्यु के समय पवित्रता और पारलौकिक शुद्धता की विधि का भाग है।

तुलसी पत्रकंठमृत्यु
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

मृत्यु के समय पापी जीव को वैराग्य क्यों नहीं होता?

पापी और विषयासक्त जीव मृत्यु के सामने भी मोह के कारण वैराग्य नहीं पाता।

मृत्युपापी जीववैराग्य
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

भागवत पुराण में वृद्धावस्था और मृत्यु का क्या वर्णन है?

भागवत पुराण में वृद्ध जीव रोगग्रस्त, निर्भर, कुरूप और मृत्यु के सम्मुख होते हुए भी वैराग्यहीन बताया गया है।

भागवत पुराणवृद्धावस्थामृत्यु
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

मृत्यु के तुरंत बाद आत्मा को वायुजा देह क्यों मिलती है?

मृत्यु के तुरंत बाद पिण्डज शरीर बनने से पहले आत्मा वायुजा देह में वायुमंडल में विचरण करती है।

वायुजा देहमृत्युआत्मा
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

मृत्यु के समय आत्मा स्थूल शरीर कैसे छोड़ती है?

आत्मा मृत्यु के समय लिंग शरीर में आवेष्टित होकर स्थूल पञ्चभौतिक शरीर छोड़ती है।

मृत्युआत्मास्थूल शरीर
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

सूक्ष्म शरीर क्या होता है?

सूक्ष्म शरीर सत्रह तत्त्वों से बना वह शरीर है जिसमें आत्मा मृत्यु के बाद कर्म-संस्कारों के साथ आगे बढ़ती है।

सूक्ष्म शरीरलिंग शरीरमृत्यु
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

स्थूल शरीर क्या होता है?

स्थूल शरीर पञ्चभौतिक देह है, जिसे आत्मा मृत्यु के समय छोड़ देती है।

स्थूल शरीरपञ्चभौतिक देहमृत्यु
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

मृत्यु को सनातन धर्म में जीवन का अंत क्यों नहीं माना गया है?

मृत्यु स्थूल शरीर का अंत है, लेकिन आत्मा लिंग शरीर और अन्य पारलौकिक देहों के साथ आगे यात्रा करती है।

मृत्युसनातन धर्मआत्मा

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सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

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