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सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — 13772 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 13772 प्रश्न

लोक

यक्षों का स्वभाव द्वैतवादी क्यों बताया गया है?

यक्ष कभी प्रकृति के परोपकारी रक्षक होते हैं और कभी भयंकर तामसिक रूप में यात्रियों को छलते या हिंसक होते हैं।

यक्ष स्वभावद्वैतवादीपरोपकारी
लोक

यक्षिणी किसे कहते हैं?

यक्षों के स्त्री या देवी रूप को यक्षिणी कहा जाता है।

यक्षिणीयक्षदेवी रूप
लोक

कुबेर और यक्षों का क्या संबंध है?

कुबेर यक्षों के अधिपति हैं और यक्ष धन, खजाने तथा प्राकृतिक संपदा के रक्षक माने जाते हैं।

कुबेरयक्षअलकापुरी
लोक

यक्षों के अधिपति कौन हैं?

यक्षों के अधिपति कुबेर हैं, जो देवताओं के कोषाध्यक्ष और अलकापुरी के स्वामी हैं।

यक्ष अधिपतिकुबेरअलकापुरी
लोक

यक्षों की उत्पत्ति कैसे हुई?

ब्रह्मा के तमस-रजस से उत्पन्न जिन जीवों ने 'यक्षामः' या 'यक्ष्यामि' कहा, वे यक्ष कहलाए।

यक्ष उत्पत्तिब्रह्माभागवत पुराण
लोक

यक्ष किन वस्तुओं के रक्षक माने जाते हैं?

यक्ष वन, पर्वत, झील, नगर, कबीलों और पृथ्वी में छिपे खजानों के रक्षक माने जाते हैं।

यक्ष रक्षकखजानावन
लोक

यक्ष पूर्णतः राक्षसी क्यों नहीं माने जाते?

यक्ष प्रकृति और धन के रक्षक अर्द्ध-दैवीय जीव हैं; उनमें तामसिक पक्ष है, पर वे पूर्णतः राक्षसी नहीं हैं।

यक्षराक्षसअर्द्ध दैवीय
लोक

यक्ष योनि क्या है?

यक्ष अर्द्ध-दैवीय योनि है, जो प्रकृति, वन, पर्वत, झील और छिपे खजानों की रक्षा से जुड़ी है।

यक्ष योनिकुबेरप्रकृति रक्षक
लोक

भूत मृत्यु-स्थल पर क्यों रहता है?

भूत अपने मृत्यु-स्थल या मोह-स्थल पर इसलिए रहता है क्योंकि उसका सूक्ष्म शरीर आसक्ति और अपूर्ण इच्छा से वहीं अटक जाता है।

भूतमृत्यु स्थलआसक्ति
लोक

बदला लेने की इच्छा से भूत योनि क्यों बनती है?

मृत्यु के समय बदले की तीव्र इच्छा आत्मा को पृथ्वी से बाँध देती है, इसलिए वह भूत बनकर भटकती है।

बदलाभूत योनिप्रतिशोध
लोक

धन, घर या व्यक्ति से मोह भूत बनने का कारण क्यों है?

मृत्यु के समय धन, घर या व्यक्ति से तीव्र मोह आत्मा को पृथ्वी से बाँध देता है, जिससे भूत योनि बनती है।

मोहभूत योनिधन
लोक

अपूर्ण इच्छाओं से भूत योनि कैसे बनती है?

मृत्यु के समय अधूरी इच्छा, मोह, धन या बदले की भावना आत्मा को पृथ्वी पर रोककर भूत योनि बना देती है।

अपूर्ण इच्छाएँभूत योनिवासना
लोक

हिंसक मृत्यु के बाद भूत योनि क्यों मिलती है?

हिंसक और अचानक मृत्यु में आत्मा मृत्यु को स्वीकार नहीं कर पाती, इसलिए सूक्ष्म शरीर पृथ्वी पर अटककर भूत बन सकता है।

हिंसक मृत्युभूत योनिअचानक मृत्यु
लोक

भगवान शिव के भूतगण कौन हैं?

भगवान शिव के भूतगण दैवीय गण हैं, जैसे नंदी और भृंगी, जो देव आज्ञा और ब्रह्मांडीय संतुलन से जुड़े हैं।

भगवान शिवभूतगणनंदी
लोक

दैवीय भूत और मानवीय भूत में क्या अंतर है?

दैवीय भूत देवताओं के गण हैं, जबकि मानवीय भूत मृत मनुष्यों की आसक्ति या अशुद्ध मृत्यु से बनी आत्माएँ हैं।

दैवीय भूतमानवीय भूतभूतगण
लोक

भूत किन वस्तुओं या व्यक्तियों से जुड़ा रहता है?

भूत धन, घर, प्रिय व्यक्ति, मोह, कामवासना या प्रतिशोध जैसी अपूर्ण इच्छाओं से जुड़ा रहता है।

भूत आसक्तिधन मोहघर
लोक

भूत पृथ्वी लोक में क्यों अटका रहता है?

भूत पृथ्वी लोक में तीव्र मोह, धन, घर, व्यक्ति या बदले की अधूरी इच्छा के कारण अटका रहता है।

भूतपृथ्वी लोकआसक्ति
लोक

भूत शब्द का अर्थ क्या है?

भूत शब्द 'भू' धातु से बना है, जिसका अर्थ है वह जो अतीत में था।

भूत अर्थसंस्कृतभू धातु
लोक

भूत और प्रेत में क्या अंतर है?

प्रेत संस्कार-अभाव से बनी मुक्ति चाहने वाली अवस्था है, जबकि भूत तीव्र आसक्ति या बदले की इच्छा से पृथ्वी पर रुकी आत्मा है।

भूत प्रेत अंतरप्रेतभूत
लोक

भूत योनि क्या है?

भूत योनि वह अवस्था है जिसमें मृत आत्मा तीव्र आसक्ति और अपूर्ण इच्छाओं के कारण पृथ्वी लोक से अलग नहीं हो पाती।

भूत योनिभूतप्रेत से अंतर
लोक

पिशाच बाधा दूर करने के लिए क्या उपाय बताए गए हैं?

पिशाच बाधा दूर करने के लिए तंत्र-मंत्र, शिव-उपासना और कुछ अनुष्ठानों में पिशाचों को शांत करने की बलि बताई गई है।

पिशाच बाधा उपायशिव उपासनातंत्र मंत्र
लोक

पिशाच बाधा से उन्माद और मतिभ्रम कैसे होता है?

पिशाच विचारों को दूषित कर देता है, जिससे व्यक्ति उन्माद, मतिभ्रम और मानसिक-शारीरिक रोगों से पीड़ित होता है।

पिशाच बाधाउन्मादमतिभ्रम
लोक

पिशाच मनुष्य को कैसे प्रभावित करता है?

पिशाच मनुष्य के शरीर में प्रवेश कर विचारों को दूषित करता है और उन्माद, मतिभ्रम तथा रोग उत्पन्न कर सकता है।

पिशाच बाधामनुष्य पर प्रभावउन्माद
लोक

धर्म, वेद और गुरु की निंदा पिशाच योनि का कारण क्यों है?

धर्म, वेद, गुरु और देवताओं की निंदा जीव को तामसिक और पाखंडी बनाती है, इसलिए पिशाच योनि मिलती है।

धर्म निंदावेद निंदागुरु निंदा

विषय-वार प्रश्नोत्तर

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सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

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