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सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — 13772 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 13772 प्रश्न

लोक

जल में डूबने से मृत्यु के बाद आत्मा प्रेत क्यों बन सकती है?

जल में डूबना अकाल मृत्यु है; शेष आयु और आसक्ति के कारण आत्मा प्रेत रूप में भटक सकती है।

जल में डूबनाअकाल मृत्युप्रेत योनि
लोक

आत्महत्या के बाद प्रेत योनि क्यों मिलती है?

आत्महत्या अकाल मृत्यु है; आयु और आसक्ति शेष रहने से आत्मा प्रेत रूप में भटक सकती है।

आत्महत्याप्रेत योनिअकाल मृत्यु
लोक

कौन-कौन सी मृत्यु अकाल मृत्यु मानी गई है?

जल में डूबना, अग्नि में जलना, गिरकर मरना, सर्पदंश, विषपान, आत्महत्या और हत्या अकाल मृत्यु मानी गई हैं।

अकाल मृत्युगरुड़ पुराणप्रेत योनि
लोक

अकाल मृत्यु से प्रेत योनि क्यों मिलती है?

अकाल मृत्यु में जीव की आयु और आसक्ति शेष रहती है, इसलिए वह शेष आयु तक प्रेत रूप में भटक सकता है।

अकाल मृत्युप्रेत योनिगरुड़ पुराण
लोक

प्रेत कल्प तक भटकता क्यों है?

पिण्डदान और श्राद्ध के अभाव में आत्मा आगे की गति नहीं पाती, इसलिए प्रेत रूप में कल्प तक भटकती है।

प्रेतकल्प तक भटकनापिण्डदान
लोक

गरुड़ पुराण में प्रेत योनि के बारे में क्या कहा गया है?

गरुड़ पुराण प्रेत को वायव्य शरीर, तीव्र भूख-प्यास और पिण्डदान के अभाव से उत्पन्न दुखद अवस्था बताता है।

गरुड़ पुराणप्रेत योनिपिण्डदान
लोक

पिण्डदान न होने पर आत्मा प्रेत क्यों बनती है?

पिण्डदान और श्राद्ध न होने से आत्मा को पितृगति नहीं मिलती, इसलिए वह प्रेत बनकर दुखपूर्वक भटकती है।

पिण्डदानप्रेत योनिगरुड़ पुराण
लोक

प्रेत कुछ खा-पी क्यों नहीं सकता?

प्रेत के पास मुख, गला और आमाशय वाला स्थूल शरीर नहीं होता, इसलिए वह भूख-प्यास होने पर भी खा-पी नहीं सकता।

प्रेतभूख प्यासवायव्य शरीर
लोक

प्रेत को भूख-प्यास क्यों लगती है?

प्रेत को सूक्ष्म शरीर में भूख-प्यास का अनुभव रहता है, पर भौतिक शरीर न होने से वह अन्न-जल ग्रहण नहीं कर पाता।

प्रेत भूख प्यासप्रेत योनिअतृप्ति
लोक

प्रेत योनि में जीव को कैसा शरीर मिलता है?

प्रेत को वायु तत्व से बना वायव्य सूक्ष्म शरीर मिलता है, जिसमें वह भूख-प्यास और अतृप्ति की पीड़ा अनुभव करता है।

प्रेत शरीरवायव्य शरीरसूक्ष्म शरीर
लोक

मृत्यु के बाद आत्मा प्रेत क्यों बनती है?

आत्मा प्रेत तब बनती है जब श्राद्ध-पिण्डदान न हो, अकाल मृत्यु हो या घोर पापों के कारण उसे ऊर्ध्व गति न मिले।

मृत्यु के बाद आत्माप्रेत योनिश्राद्ध
लोक

प्रेत बनने का मुख्य कारण क्या है?

प्रेत बनने के मुख्य कारण हैं: पिण्डदान और श्राद्ध का अभाव, अकाल मृत्यु और महापातक जैसे घोर पाप।

प्रेत बनने का कारणपिण्डदानअकाल मृत्यु
लोक

प्रेत योनि क्या है?

प्रेत योनि वह अवस्था है जिसमें शरीर छोड़ चुकी आत्मा नई योनि या पितृलोक न पाकर वायव्य सूक्ष्म देह में भूख-प्यास से भटकती रहती है।

प्रेत योनिगरुड़ पुराणसूक्ष्म शरीर
लोक

यमलोक और कर्म-विपाक से जीवन को क्या सीख मिलती है?

यमलोक सिखाता है कि कोई कर्म छिपता नहीं; पाप का फल नरक, योनियों और रोगों में मिलता है, जबकि धर्म और भक्ति श्रेष्ठ गति देते हैं।

यमलोककर्म विपाकजीवन शिक्षा
लोक

विष्णु भक्तों को यमदूत क्यों नहीं ले जाते?

विष्णु भक्तों पर यमराज का अधिकार नहीं होता; उन्हें यमदूत नहीं, विष्णुदूत सीधे वैकुण्ठ ले जाते हैं।

विष्णु भक्तयमदूतवैष्णव
लोक

विष्णु पुराण में नरकों का वर्णन कैसे है?

विष्णु पुराण में पराशर मुनि रौरव, रोध, सूकर, तप्तकुण्ड आदि नरकों और उनके पाप-दंड का वर्णन करते हैं।

विष्णु पुराणनरकदंड विधान
लोक

असिपत्रवन नरक में क्या यातना होती है?

असिपत्रवन में वेद-विरुद्ध पाखंडियों को तलवार जैसे पत्तों वाले वन में दौड़ाया जाता है, जिससे शरीर कट जाता है।

असिपत्रवन नरकनरक यातनावेद विरुद्ध आचरण
लोक

कालसूत्र नरक इतना भयानक क्यों है?

कालसूत्र नरक में माता-पिता या ब्राह्मणों से द्रोह करने वाले पापी को दहकते तांबे के मैदान में नंगा दौड़ाया जाता है।

कालसूत्र नरकनरकमाता पिता द्रोह
लोक

कुम्भीपाक नरक किस पाप का फल है?

कुम्भीपाक नरक जीवित पशु-पक्षियों को स्वाद के लिए पकाकर खाने वालों के लिए है।

कुम्भीपाक नरकनरकपशु हत्या
लोक

रौरव नरक में कौन सा दंड मिलता है?

रौरव नरक में पीड़ित जीव रुरु बनकर पापी को नोचते हैं, क्योंकि उसने स्वार्थ से जीवों को कष्ट दिया था।

रौरव नरकनरक दंडरुरु
लोक

अंधतामिस्र नरक में किसे भेजा जाता है?

अंधतामिस्र नरक छल-कपट से दूसरे की पत्नी या संपत्ति भोगने वालों के लिए है।

अंधतामिस्र नरकनरकभागवत पुराण
लोक

तामिस्र नरक किस पाप के लिए है?

तामिस्र नरक दूसरों का धन, स्त्री या संपत्ति छीनने वालों के लिए है, जहाँ यमदूत कालपाश में बांधकर पीटते हैं।

तामिस्र नरकनरकभागवत पुराण
लोक

श्रीमद्भागवत पुराण में कितने नरक बताए गए हैं?

श्रीमद्भागवत पुराण में २८ प्रमुख नरकों का वर्णन है, जहाँ पापों के अनुसार दंड मिलता है।

श्रीमद्भागवत पुराण28 नरकनरक
लोक

यमपुरी में प्रवेश के बाद आत्मा का न्याय कैसे होता है?

यमपुरी में चित्रगुप्त कर्म-वृत्तांत पढ़ते हैं और यमराज उसी के आधार पर आत्मा का न्याय करते हैं।

यमपुरीआत्मा न्यायचित्रगुप्त

विषय-वार प्रश्नोत्तर

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सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

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