📖
विस्तृत उत्तर
श्रीमद्भागवत पुराण के पंचम स्कंध के अध्याय २६ में २८ प्रमुख नरकों का वर्णन किया गया है। यमराज की सभा में चित्रगुप्त द्वारा कर्मों का वाचन होने के पश्चात पापी आत्माओं को उनके विशिष्ट पापों के अनुसार अलग-अलग नरकों में भेज दिया जाता है। इन नरकों में भिन्न-भिन्न पापों के लिए कठोर यातनाओं का विधान है। वहाँ कर्म और दंड का अनुपात पूरी तरह से गणितीय और अकाट्य बताया गया है।
🔗
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक
इसे अपने प्रियजनों के साथ साझा करें
क्या यह उत्तर सहायक था?





