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सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — 13772 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 13772 प्रश्न

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यमपुरी के रत्नजड़ित द्वार क्या दर्शाते हैं?

यमपुरी के रत्नजड़ित द्वार पुण्य, दान, सत्य, पितृभक्ति, अहिंसा और योग-ज्ञान के आधार पर मिलने वाले सम्मान को दिखाते हैं।

यमपुरी द्वाररत्नजड़ितपश्चिम द्वार
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पुण्यात्माओं का यमपुरी में स्वागत कैसे होता है?

पुण्यात्माओं का धर्मराज स्वयं सम्मान करते हैं; उन्हें रथ-विमानों से लाया जाता है और देव-गंधर्व पुष्पवर्षा करते हैं।

पुण्यात्मायमपुरीस्वागत
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यमपुरी का दक्षिण द्वार भयानक क्यों है?

दक्षिण द्वार पापियों का अंधकारमय मार्ग है, जो सिंहों, भेड़ियों और विषैले सर्पों से घिरा रहता है।

दक्षिण द्वारयमपुरीपापी
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यमपुरी के द्वार कर्मों के आधार पर कैसे मिलते हैं?

यमपुरी में प्रवेश पाप, दान, सत्य, पितृसेवा, अहिंसा और योग-ज्ञान जैसे कर्मों के आधार पर अलग-अलग द्वारों से होता है।

यमपुरी द्वारकर्मपुण्य
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यमपुरी का पूर्व द्वार किन योगियों के लिए है?

पूर्व द्वार सिद्ध योगियों, ऋषियों, ज्ञानियों और संबुद्ध आत्माओं के लिए है, जिनका पुष्पवर्षा से स्वागत होता है।

यमपुरी पूर्व द्वारयोगीऋषि
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यमपुरी का उत्तर द्वार क्यों श्रेष्ठ माना गया है?

उत्तर द्वार सत्यवादियों, पितृभक्तों और अहिंसा पालन करने वालों के लिए है, इसलिए इसे उत्तम माना गया है।

यमपुरी उत्तर द्वारसत्यवादीपितृभक्त
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यमपुरी का पश्चिम द्वार किन आत्माओं के लिए है?

पश्चिम द्वार उन दानवीर आत्माओं के लिए है जिन्होंने दान-पुण्य, धर्म रक्षा, गौदान, भूमि दान या विद्या दान किया हो।

यमपुरी पश्चिम द्वारदानवीरगौदान
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यमपुरी का दक्षिण द्वार किसके लिए है?

दक्षिण द्वार पापियों के लिए है, जहाँ से झूठ, परस्त्रीगमन, भ्रूणहत्या और अन्य पाप करने वालों को यमदूत ले जाते हैं।

यमपुरी दक्षिण द्वारपापी आत्मायमलोक
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यमपुरी के चार द्वार कौन-कौन से हैं?

यमपुरी के चार द्वार हैं: दक्षिण द्वार, पश्चिम द्वार, उत्तर द्वार और पूर्व द्वार। प्रवेश कर्मों के आधार पर होता है।

यमपुरीचार द्वारयमलोक
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पुण्यात्माओं को पुष्पोदका नदी क्यों मिलती है?

दान-पुण्य और धर्म का पालन करने वाली आत्माओं को वैतरणी के स्थान पर शीतल पुष्पोदका नदी मिलती है।

पुण्यात्मापुष्पोदकादान पुण्य
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पुष्पोदका नदी क्या है?

पुष्पोदका पुण्यात्माओं के मार्ग की निर्मल, शीतल और कमल-युक्त नदी है, जिसके किनारे उन्हें विश्राम और तर्पण मिलता है।

पुष्पोदका नदीपुण्यात्मायमलोक
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पापी आत्मा वैतरणी नदी कैसे पार करती है?

बिना गोदान वाली पापी आत्मा वैतरणी में डूबती-उतराती है और यमदूत उसे त्रिशूलों से नदी में धकेलते हैं।

पापी आत्मावैतरणीयमदूत
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वैतरणी नदी पार करने में गोदान कैसे सहायक होता है?

गोदान करने वाला जीव वैतरणी नदी को गाय की पूंछ पकड़कर बिना कष्ट पार कर सकता है।

गोदानवैतरणी नदीयमलोक
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वैतरणी नदी में क्या बहता है?

वैतरणी नदी में जल नहीं, बल्कि उबलता रक्त, पीब, मज्जा, मूत्र और हड्डियाँ बहती हैं।

वैतरणी नदीरक्तपीब
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वैतरणी नदी इतनी भयानक क्यों है?

वैतरणी भयानक है क्योंकि उसमें जल नहीं, उबलता रक्त, पीब, मज्जा, मूत्र और हड्डियाँ बहती हैं तथा यमदूत पापियों को उसमें धकेलते हैं।

वैतरणी नदीभयानक नदीयमलोक
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वैतरणी नदी क्या है?

वैतरणी यमलोक के मार्ग की १०० योजन चौड़ी भयंकर नदी है, जिसमें पापियों के लिए रक्त, पीब, मूत्र और हड्डियाँ बहती हैं।

वैतरणी नदीयमलोकगरुड़ पुराण
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यममार्ग में पिंडदान न होने पर आत्मा को क्या कष्ट होता है?

पिंडदान न होने पर आत्मा भूख-प्यास से तड़पती है, विलाप करती है और अपने सांसारिक मोह पर पश्चाताप करती है।

पिंडदानयममार्गआत्मा कष्ट
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विचित्रभवन में आत्मा का अनुभव कैसा होता है?

विचित्रभवन यममार्ग का एक नगर है, जहाँ राजा विचित्र है और आत्मा अपनी लंबी कर्म-यात्रा में आगे बढ़ती है।

विचित्रभवनयममार्गगरुड़ पुराण
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सौरिपुर क्या है?

सौरिपुर यममार्ग का दूसरा नगर है, जहाँ यमराज का छोटा भाई सौरि शासन करता है और आत्मा द्वितीय मास का पिंड ग्रहण करती है।

सौरिपुरयममार्गयमराज
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सौम्यपुर में आत्मा को क्या प्राप्त होता है?

सौम्यपुर में आत्मा को परिजनों द्वारा दिया गया प्रथम पिंड प्राप्त होता है और वह परिवार को याद कर रोती है।

सौम्यपुरयममार्गप्रथम पिंड
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यममार्ग के 16 नगर कौन-कौन से हैं?

यममार्ग के 16 नगर हैं: सौम्यपुर, सौरिपुर, नगेन्द्रभवन, गंधर्वपुर, शैलागम, क्रौंचपुर, क्रूरपुर, विचित्रभवन, बह्वापद, दुःखदपुर, नानाक्रन्दपुर, सुतप्तभवन, रौद्रपुर, पयोवर्षणपुर, शीताढ्यपुर और बहुभीतिपुर।

यममार्ग 16 नगरगरुड़ पुराणसौम्यपुर
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यममार्ग में श्राद्ध और पिंडदान का क्या महत्व है?

यममार्ग में पिंडदान आत्मा को नगरों में विश्राम और पोषण देता है; पिंडदान न होने पर आत्मा भूख-प्यास से तड़पती है।

श्राद्धपिंडदानयममार्ग
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यममार्ग में आत्मा को कौन-कौन से कष्ट होते हैं?

यममार्ग में आत्मा को तपती रेत, भूख-प्यास, हिंसक जीवों की पीड़ा, यमदूतों के कोड़े और परिवार-वियोग का दुख सहना पड़ता है।

यममार्ग कष्टपापी आत्मागरुड़ पुराण
लोक

यममार्ग में जल और छाया क्यों नहीं मिलती?

यममार्ग पापी आत्मा की कर्म-शोधन यात्रा है, इसलिए वहाँ न छाया, न जल और न अन्न मिलता है।

यममार्गजलछाया

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सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

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