ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण

विधि — प्रश्नोत्तरी

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 174 प्रश्न

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साधना विधि

काली साधना कैसे करें?

काली साधना के तीन स्तर: भक्ति (नित्य पूजा — सबके लिए), उपासना (गुरु दीक्षा के बाद) और तांत्रिक (केवल अनुभवी दीक्षित)। भक्ति साधना में: स्नान, लाल/काले वस्त्र, 'ॐ क्रीं काल्यै नमः' — 108 बार जप, आरती। अमावस्या और नवरात्रि विशेष काल।

काली साधनाविधिशाक्त साधना
साधना विधि

काली साधना घर पर कैसे करें?

घर पर काली साधना (भक्ति मार्ग): लाल/काला आसन, सरसों तेल दीप, लाल गुड़हल, सिंदूर, 'ॐ क्रीं काल्यै नमः' — 108 बार, काली चालीसा, आरती। अमावस्या पर 1008 जप और 10 दीप। तांत्रिक विधि घर पर गुरु के बिना न करें।

घर काली साधनाभक्ति मार्गनित्य पूजा
साधना विधि

काली साधना कैसे करें?

काली साधना के तीन स्तर: भक्ति (नित्य पूजा — सबके लिए), उपासना (गुरु दीक्षा के बाद) और तांत्रिक (केवल अनुभवी दीक्षित)। भक्ति साधना में: स्नान, लाल/काले वस्त्र, 'ॐ क्रीं काल्यै नमः' — 108 बार जप, आरती। अमावस्या और नवरात्रि विशेष काल।

काली साधनाविधिशाक्त साधना
भैरव साधना

भैरव साधना कैसे करें?

भैरव साधना: काले/नीले वस्त्र, सरसों तेल दीप, उड़द की दाल, लाल पुष्प। मंत्र: 'ॐ बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ॐ' — 108 बार। काल भैरव अष्टकम् (शंकराचार्य) पाठ करें। भैरव शत्रु भय नाश, स्थान रक्षा और सिद्धि के देवता हैं।

भैरव साधनाकाल भैरवबटुक भैरव
पूजा विधि

दुर्गा पूजा घर पर कैसे करें?

घर पर दुर्गा पूजा: लाल चुनरी, कुमकुम, लाल गुड़हल, धूप-दीप। आवाहन 'ॐ जयंती मंगला काली...' से करें। पंचोपचार, नवार्ण मंत्र 108 बार, सप्तशती पाठ या 'या देवी सर्वभूतेषु...' स्तोत्र, आरती 'जय अम्बे गौरी...' और क्षमा प्रार्थना।

घर पूजादुर्गा पूजानित्य पूजा
जप विधि

दुर्गा मंत्र जप कैसे करें?

दुर्गा जप: लाल आसन, रुद्राक्ष या कमलगट्टा माला, पूर्व/उत्तर मुख। नवार्ण मंत्र 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे' — नित्य 108 बार। नवरात्रि में 1008 बार। पुरश्चरण: 9 लाख जप। देवी का ध्यान 'या देवी सर्वभूतेषु...' से करें।

दुर्गा मंत्र जपनवार्ण जपविधि
पाठ नियम

चंडी पाठ के नियम क्या हैं?

चंडी पाठ के विशेष नियम: षडंग पाठ (कवच+अर्गला+कीलक+नवार्ण+13 अध्याय+उपसंहार) अनिवार्य। कीलक से पहले विकीलन (ॐ नमश्चण्डिकायै तीन बार)। अशुद्धि पर नवार्ण मंत्र 108 बार। पाठ के बाद आरती और क्षमा प्रार्थना।

चंडी पाठ नियमविधिशुद्धता
साधना विधि

दुर्गा साधना कैसे करें?

दुर्गा साधना के तीन स्तर: भक्ति (नित्य पूजा-पाठ), उपासना (दीक्षा + पुरश्चरण), तांत्रिक (गुरु दीक्षा अनिवार्य)। नवरात्रि सर्वोत्तम साधना काल। नित्य: नवार्ण मंत्र 108 बार + सप्तशती पाठ + आरती। साधना में लाल वस्त्र, ब्रह्मचर्य और मांसाहार वर्जन।

दुर्गा साधनाशाक्त साधनानवरात्रि साधना
नवरात्रि विधि

नवरात्रि में कलश स्थापना कैसे करें?

नवरात्रि कलश स्थापना: प्रतिपदा को ईशान कोण में चौकी पर मिट्टी में जौ बोएं, तांबे के कलश में गंगाजल, सिक्का, सुपारी भरें, आम के 5 पत्ते लगाएं, नारियल रखें। स्थापना मंत्र बोलें और देवी का आवाहन करें। नवमी को विसर्जन।

कलश स्थापनानवरात्रिघट स्थापना
स्थापना विधि

शिवलिंग की स्थापना कैसे करें?

शिवलिंग स्थापना में: नर्मदेश्वर सर्वोत्तम (प्राण प्रतिष्ठा की आवश्यकता नहीं)। घर में ईशान कोण, अंगूठे से छोटा आकार। पंचामृत शुद्धि, स्थापना मंत्र 'ॐ नमः शिवाय'। नित्य पूजा अनिवार्य। गृहस्थों के लिए पार्थिव लिंग (मिट्टी का) सर्वोत्तम विकल्प।

शिवलिंग स्थापनाप्राण प्रतिष्ठाघर मंदिर
जप विधि

महामृत्युंजय मंत्र जप की विधि क्या है?

महामृत्युंजय जप: ब्रह्ममुहूर्त में, रुद्राक्ष माला से, शिव का ध्यान करते हुए, भस्म त्रिपुंड लगाकर। नित्य 108, रोग में 1008 बार। गंभीर संकट में 21 दिन × 1008। हवन: 'ॐ त्र्यम्बकं... स्वाहा' — तिल और घी से।

महामृत्युंजय जपरुद्राक्षविधि
पूजा विधि

शिव पूजा की सही विधि क्या है?

शिव पूजा में: स्नान, बेलपत्र, पंचामृत अभिषेक (दूध-दही-घी-शहद-शक्कर), गंगाजल, भस्म त्रिपुंड, धतूरा-आक पुष्प, 'ॐ नमः शिवाय' जप, आरती और आधी परिक्रमा। बेलपत्र और जल — ये दो सबसे महत्वपूर्ण अर्पण हैं।

शिव पूजाविधिषोडशोपचार
आरती विधि

आरती कैसे करें?

आरती में पंचमुखी घी का दीप जलाएं। चरणों से आरंभ करके ऊपर जाएं — दक्षिणावर्त (clockwise) घुमाएं। शंख-घंटी बजाते हुए देवता की स्तुति गाएं। अंत में कपूर आरती करें। आरती की लौ दोनों हाथों से स्पर्श करके नेत्रों से लगाएं।

आरतीविधिदीप आरती
जप विधि

मंत्र जप की सही विधि क्या है?

मंत्र जप से पूर्व स्नान, शांत स्थान, कुश आसन, पूर्व मुख, संकल्प और गुरु स्मरण करें। माला को अनामिका और अंगूठे से पकड़ें, तर्जनी न लगाएं। मानसिक जप सर्वोत्तम है। जप के बाद माला सिर से लगाकर देवता को अर्पित करें।

मंत्र जपविधिसाधना
पूजा विधि

हनुमान जी की पूजा कैसे करें?

हनुमान पूजा में: स्नान, लाल वस्त्र, सिंदूर लेपन, चमेली तेल का दीप, 21 लाल गुड़हल, गुड़-चना भोग, 'ॐ हं हनुमते नमः' का 108 बार जप, हनुमान चालीसा पाठ और आरती करें। मंगलवार-शनिवार को सिंदूर का चोला अर्पण विशेष फलदायी है।

हनुमान पूजाविधिसिंदूर
पूजा विधि

गणेश पूजा विधि क्या है?

गणेश पूजा में पंचामृत स्नान, सिंदूर, 21 दूर्वा, लाल पुष्प, जनेऊ अर्पण, 21 मोदक का भोग, 'ॐ गं गणपतये नमः' का 108 बार जप और आरती करें। पूजा में तुलसी वर्जित है। बुधवार और चतुर्थी तिथि सर्वश्रेष्ठ है।

गणेश पूजाविधिषोडशोपचार
व्रत विधि

शुक्रवार को लक्ष्मी पूजा कैसे करें?

शुक्रवार को पीले वस्त्र पहनकर, लक्ष्मी जी को कमल-गुलाब अर्पित करें, सिंदूर-कुमकुम लगाएं, श्री सूक्त पाठ करें और 'ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः' का 108 बार जप करें। वैभवलक्ष्मी व्रत 11 या 21 शुक्रवार तक करें।

शुक्रवार व्रतशुक्रवार पूजालक्ष्मी व्रत
पूजा विधि

लक्ष्मी पूजन की सही विधि क्या है?

लक्ष्मी पूजन में लक्ष्मी ध्यान, पंचामृत स्नान, पीत वस्त्र, सिंदूर-कुमकुम, कमल-गुलाब, श्री सूक्त पाठ, 'ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः' का 108 बार जप और आरती करें। शुक्रवार प्रदोष काल में यह पूजा सर्वाधिक फलदायी है।

लक्ष्मी पूजनविधिषोडशोपचार
पूजा विधि

काली पूजा की सही विधि क्या है?

काली पूजा दीपावली रात, अमावस्या या नवरात्रि सप्तमी को करें। सरसों का दीप, 108 लाल गुड़हल, सिंदूर, खीर का भोग, काली ध्यान श्लोक, 'ॐ क्रीं कालिकायै नमः' का 108 बार जप और आरती — यह पूर्ण विधि है।

काली पूजादीपावलीविधि
साधना विधि

काली साधना कैसे की जाती है?

काली साधना भक्ति मार्ग और तंत्र मार्ग से होती है। अमावस्या की रात दक्षिण मुख करके बैठें, सरसों का दीप जलाएं, लाल गुड़हल अर्पित करें और 'ॐ क्रीं कालिकायै नमः' का 108 बार जप करें। उच्च तांत्रिक साधना गुरु दीक्षा के बाद ही करें।

काली साधनामहाकालीविधि
पूजा विधि

दुर्गा पूजा घर पर कैसे करें?

ईशान कोण में देवी प्रतिमा स्थापित करें। आचमन, संकल्प, पंचोपचार पूजन (जल, चंदन, सिंदूर, लाल फूल, भोग), नवार्ण मंत्र जप, देवी सूक्त पाठ और आरती करें। नवरात्रि में अखंड दीप और नवमी को कन्या पूजन अनिवार्य है।

घर पर पूजादुर्गा पूजाविधि
साधना विधि

दुर्गा मंत्र जप कैसे करें?

लाल आसन पर पूर्व/उत्तर मुख करके बैठें, रुद्राक्ष माला से नवार्ण मंत्र (ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे) या 'ॐ दुं दुर्गायै नमः' का 108 बार जप करें। तर्जनी माला को न छुए। नवरात्रि में 1008 बार जप विशेष फलदायी है।

मंत्र जपदुर्गा मंत्रविधि
पाठ नियम

चंडी पाठ के नियम क्या हैं?

चंडी पाठ से पूर्व देवी कवच, अर्गला, कीलक और नवार्ण मंत्र अनिवार्य है। स्नान करें, लाल आसन पर बैठें, पुस्तक भूमि पर न रखें, शुद्ध उच्चारण करें और एक बार शुरू करें तो पूरा करें।

चंडी पाठ नियमविधिनियम
साधना विधि

दुर्गा साधना कैसे करें?

दुर्गा साधना में ब्रह्ममुहूर्त में लाल आसन पर बैठकर, नवार्ण मंत्र (ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे) का 108 बार जप, सप्तशती पाठ और आरती करें। नवरात्रि में 9 दिन व्रत, अखंड दीप और कन्या पूजन विशेष महत्व का है।

दुर्गा साधनाउपासनानवरात्रि साधना

सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

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