शंकर महिमाधर्म, ज्ञान, वैराग्य और ऐश्वर्य कैसे मिलते हैं?धर्म, ज्ञान, वैराग्य और ऐश्वर्य शिवजी की कृपा से प्राप्त होते हैं।#धर्म#ज्ञान#वैराग्य
शंकर महिमासदाशिव की कृपा से क्या संभव होता है?सदाशिव की कृपा से सत्-असत् वस्तु-विवेक और विषयों का त्याग एक साथ संभव होता है।#सदाशिव#कृपा#आत्मानात्म विवेक
शंकर महिमाकेवल विषय त्याग अस्थायी क्यों है?आत्मानात्मविवेक रूप विशिष्ट ज्ञान के बिना किया गया क्षणिक विषयत्याग ज्ञानरहित और अस्थायी बताया गया है।#विषय त्याग#आत्मानात्म विवेक#ज्ञान
शंकर महिमावैराग्य से शिव दर्शन कैसे मिलता है?स्वल्प विषयों का त्याग करके प्राणी सांसारिक भय से मुक्त होता है, फिर वैराग्य पाकर अंत में शिव दर्शन प्राप्त करता है।#वैराग्य#शिव दर्शन#विषय त्याग
शंकर महिमाशिव सबका कल्याण कैसे करते हैं?शिव दयार्द्र होकर प्राणियों का कल्याण करते हैं; उनकी आत्मा बिना प्रयत्न कल्याण करने वाली कही गई है।#शिव#कल्याण#शंकर
शंकर महिमाशिव स्थाणु क्यों कहलाए?रुद्रात्मक सृष्टि से निवृत्त होकर निष्कल आत्मा वाले शंकर अधिष्ठित हुए, इसलिए उनका स्थाणुत्व बताया गया।#शिव#स्थाणु#रुद्र
सृष्टिमृत्यु वाली सृष्टि किसने बनाई?शंकर की आज्ञा पाकर चतुरानन ब्रह्मा ने जरा-मरण से युक्त स्थावर-जंगम जगत की रचना की।#मृत्यु वाली सृष्टि#ब्रह्मा#जरा
सृष्टिशिव ने मरणधर्मा सृष्टि पर क्या उत्तर दिया?शिव ने कहा कि मरणधर्मा सृष्टि करना उनकी स्थिति नहीं है; ब्रह्मा अपने इच्छानुसार मृत्युयुक्त प्रजा बनाएं।#शिव#शंकर#मरणधर्मा सृष्टि
सृष्टिब्रह्मा ने शिव से कैसी प्रजा बनाने को कहा?ब्रह्मा ने शिव से मरणधर्मा प्रजा बनाने को कहा, क्योंकि अमर प्रजा की सृष्टि उचित नहीं बताई।#ब्रह्मा#शिव#मरणधर्मा प्रजा
रुद्र उत्पत्तिब्रह्मा ने रुद्रों की स्तुति कैसे की?ब्रह्मा ने नीललोहित रुद्रों को त्रिनेत्रधारी, सर्वज्ञ, सर्वव्यापी, नित्य, निर्मल, विश्वात्मा और शिवजी के आत्मज कहकर प्रणाम किया।#ब्रह्मा#रुद्र स्तुति#नीललोहित
रुद्र उत्पत्तिरुद्रों ने कितने भुवनों को व्याप्त किया?नीललोहित महादेव से उत्पन्न रुद्रों ने सभी चौदह भुवनों को पूर्ण रूप से व्याप्त कर लिया।#रुद्र#चौदह भुवन#नीललोहित
रुद्र उत्पत्तिनीललोहित महादेव ने क्या उत्पन्न किया?नीललोहित महादेव ने ब्रह्मा की प्रार्थना पर अपने तुल्य अनेक रुद्र उत्पन्न किये।#नीललोहित#महादेव#रुद्र
सती और शिवसती ने पार्वती रूप में किसे पति माना?सती ने पार्वती रूप में पुनः शिवजी को पति रूप में प्राप्त किया।#सती#पार्वती#शिव
सती और शिवसती ने दक्ष यज्ञ में क्या किया?सती ने दक्ष के यज्ञ का विध्वंस करके अपना देहत्याग किया।#सती#दक्ष यज्ञ#विध्वंस
पितृ वंशहैमवती गंगा कौन हैं?हैमवती गंगा मेना से उत्पन्न बताई गई हैं और शिवजी के मस्तक पर विराजमान रहने से जगत् को पवित्र करने वाली कही गई हैं।#हैमवती गंगा#मेना#गंगा
सती और रुद्रपुत्री को पुन्नामक नरक से रक्षा करने वाली क्यों कहा गया?ब्रह्मा ने दक्ष से सती की सेवा करने को कहा और पाठ में पुत्री को पुन्नामक नरक से रक्षा करने वाली बताया गया।#पुत्री#पुन्नामक नरक#सती
सती और रुद्रग्यारह रुद्र किसके अंश से उत्पन्न हुए?ग्यारह प्रकार के रुद्र शिव के अंश से उत्पन्न बताए गए हैं।#ग्यारह रुद्र#शिव#नीललोहित
सती और रुद्रस्त्रीजाति की उत्पत्ति सती से कैसे बताई गई है?सती के अंश से तीनों लोकों की स्त्रियों की उत्पत्ति कही गई है।#स्त्रीजाति#सती#शिव
सती और रुद्रअर्धनारीश्वर से स्त्री-पुरुष विभाग कैसे हुआ?ब्रह्मा ने सृष्टि के आरम्भ में शिव को अर्धनारीश्वर देखकर स्त्री-पुरुष विभाग करने को कहा, तब शिव की देह से सती अलग हुईं।#अर्धनारीश्वर#शिव#सती
सती और रुद्रसती का विवाह किससे हुआ?सती ने भगवान् रुद्र को पति रूप में प्राप्त किया और दक्ष ने उन्हें आदरपूर्वक रुद्र को सौंप दिया।#सती#रुद्र#दक्षप्रजापति
सती और रुद्रसती दक्ष की पुत्री कैसे बनीं?सती शिवसम्भवा मानसी पुत्री थीं; ब्रह्मा ने दक्ष से कहा कि अबसे यह सती तुम्हारी पुत्री होगी।#सती#दक्ष#शिवसम्भवा
शिव तत्त्वमहेश्वर एक ही क्यों बताए गए हैं?असंख्य कल्प, पितामह और विष्णु उत्पन्न होते हैं, पर महेश्वर मात्र एक बताए गए हैं।#महेश्वर#असंख्य कल्प#ब्रह्मा
देव कालरुद्र का एक दिन कितना बताया गया है?विष्णु के नौ हजार दिनों का समय कालात्मा रुद्र के एक दिन का समय कहा गया है।#रुद्र#रुद्र का दिन#विष्णु का दिन
शिव तत्त्वसदाशिव सर्वात्मक क्यों कहे गए हैं?सदाशिव भव, विष्णु, ब्रह्मा आदि रूपों में स्थित होने और लोकों तथा पितामह के रूप में कहे जाने से सर्वात्मक बताए गए हैं।#सदाशिव#सर्वात्मक#भव
शिव तत्त्वमहेश्वर रजोगुण सत्त्वगुण और तमोगुण से कैसे जुड़े हैं?महेश्वर सृष्टि में रजोगुण, पालन में सत्त्वगुण और प्रलय में तमोगुण से जुड़े बताए गए हैं।#महेश्वर#रजोगुण#सत्त्वगुण
शिव तत्त्वमहेश्वर सृष्टि पालन और संहार कैसे करते हैं?महेश्वर तीन रूपों में होकर सृष्टि, पालन और संहार करते हैं।#महेश्वर#सृष्टि#पालन
ब्रह्माण्ड वर्णनकरोड़ों ब्रह्माण्डों की उत्पत्ति कैसे बताई गई है?प्रधान प्रकृति सदाशिव के आश्रय से करोड़ों ब्रह्माण्डों में ब्रह्मा, विष्णु और शिव का सृजन करती है।#करोड़ों ब्रह्माण्ड#प्रधान#सदाशिव
ब्रह्माण्ड वर्णनब्रह्माण्ड अण्ड कैसे उत्पन्न होता है?महत्तत्त्व से पंचमहाभूत तक सभी तत्त्व अण्ड की उत्पत्ति करते हैं।#ब्रह्माण्ड#अण्ड#महत्तत्त्व
शिव तत्त्वब्रह्मा विष्णु शिव की विश्व प्राज्ञ तैजस अवस्थाएँ क्या हैं?बीजरूप ब्रह्मा, योनिरूप विष्णु और प्रधानरूप शिव की विश्व, प्राज्ञ और तैजस अवस्थाएँ कही गई हैं।#ब्रह्मा#विष्णु#शिव
शिव तत्त्वशिव को जगत का बीज क्यों कहा गया है?शिव को बीजरहित होकर भी जगत् का बीज यानी मूल कारण कहा गया है।#शिव#जगत बीज#बीज
शिव तत्त्वव्यक्त और अव्यक्त रूप क्या हैं?लिंग को व्यक्त और अलिंग को अव्यक्त रूप कहा गया है; दोनों रूप शिवात्मक बताए गए हैं।#व्यक्त#अव्यक्त#लिंग
शिव तत्त्वसगुण और निर्गुण शिव में क्या अंतर है?निर्गुण शिव अलिंग हैं और सगुण रूप लिंग यानी व्यक्त प्रकृति से जुड़ा बताया गया है।#सगुण शिव#निर्गुण शिव#लिंग
शिव तत्त्वरुद्र से संहार कैसे होता है?तीन प्रधान देवों में रुद्र से जगत् का संहार बताया गया है और प्रलयकाल तमोगुण से जुड़ा है।#रुद्र#संहार#तमोगुण
शिव तत्त्वब्रह्मा विष्णु रुद्र शिवात्मक कैसे हैं?ब्रह्मा, विष्णु और रुद्र तीनों प्रधान देव माया-वितत लिंगों से उद्भूत और शिवात्मक बताए गए हैं।#ब्रह्मा#विष्णु#रुद्र
प्रकृति तत्त्वशिव और प्रकृति का संबंध क्या है?निर्गुण शिव प्रकृति के मूल कारण हैं और शिव की दृष्टि से प्रकृति शैवी कही गई है।#शिव#प्रकृति#शैवी शक्ति
शिव तत्त्वनिर्गुण शिव क्या है?निर्गुण शिव वह अलिंग तत्त्व है जो शब्द, स्पर्श, रूप, रस, गन्ध और गुणों से रहित है।#निर्गुण शिव#अलिंग#परमात्मा
शिव तत्त्वलिंग तत्त्व क्या है?लिंग तत्त्व प्रधान प्रकृति है, जो शब्द, स्पर्श, रूप, रस और गन्ध आदि से संयुक्त बताई गई है।#लिंग तत्त्व#प्रकृति#प्रधान
शिव तत्त्वअलिंग क्या है?अलिंग निर्गुण ब्रह्म शिव है, जो शब्द, स्पर्श, रूप, रस और गन्ध आदि से रहित बताया गया है।#अलिंग#निर्गुण शिव#निर्गुण ब्रह्म
शिव तत्त्वलिंग मूर्ति की विशेषता क्या बताई गई है?भगवान् शंकर के विग्रहों की व्यापकता और उनकी लिङ्गमूर्ति की विशेषता वर्णित बताई गई है।#लिंग मूर्ति#शंकर#विग्रह
शिव कथासुदर्शन की उत्पत्ति किस प्रसंग से जुड़ी है?सुदर्शन की उत्पत्ति जालन्धरवध और शिवकृत दमन के प्रसंगों के साथ बताई गई है।#सुदर्शन#जालन्धरवध#शिव
शिव कथाशिव ने किन असुरों और संकटों का दमन किया?त्रिपुरासुर, अन्धकासुर, दक्ष, कामदेव, हलाहल विष, दैत्यों-असुरों और जालन्धरवध जैसे प्रसंग शिवकृत दमन में गिनाए गए हैं।#शिव#त्रिपुरासुर#अन्धकासुर
अवतार कथापृथ्वी का भार उतारने के लिए विष्णु ने किसकी आराधना की?पृथ्वी का भार उतारने के लिए विष्णु द्वारा शंकरजी की आराधना का वर्णन बताया गया है।#विष्णु#शंकर#पृथ्वी का भार
शिव तत्त्वशिवजी ने ब्रह्मा को परम ज्ञान क्यों दिया?मधु-कैटभ के संसर्ग से नष्ट ज्ञानवाले ब्रह्मा को परम ज्ञान देने के लिए शिव का प्रादुर्भाव बताया गया है।#शिव#ब्रह्मा#परम ज्ञान
शिव कथाश्वेतमुनि की रक्षा के लिए शिव ने किसका संहार किया?श्वेतमुनि की रक्षा के लिए शिव द्वारा काल के संहार का वर्णन बताया गया है।#श्वेतमुनि#काल#शिव
शिव तत्त्वशिवलिंग का प्राकट्य किस विवाद के बाद बताया गया है?शिवलिंग का प्राकट्य ब्रह्मा और विष्णु के विवाद के बाद बताया गया है।#शिवलिंग#प्राकट्य#ब्रह्मा
शिव तत्त्वरुद्र के आठ नाम किस घटना के बाद बताए गए हैं?रुद्र के रुदन के बाद उनके आठ नामों का वर्णन बताया गया है।#रुद्र#रुद्र के आठ नाम#रुदन
शिव तत्त्वप्रलयकाल में नारायण रूप में कौन शयन करते हैं?प्रलयकालीन जलराशि में सदाशिव का ही नारायण रूप में शयन बताया गया है।#प्रलयकाल#नारायण#सदाशिव
शिव तत्त्वसदाशिव से ब्रह्मा विष्णु और कालरुद्र कैसे प्रकट होते हैं?सदाशिव से रजोगुण के आश्रय से ब्रह्मा, सत्त्व के आश्रय से विष्णु और तमोगुण के आश्रय से कालरुद्र का प्रादुर्भाव बताया गया है।#सदाशिव#ब्रह्मा#विष्णु
शिव तत्त्वशिव लिंग रूप क्यों धारण करते हैं?महेश्वर शिव सृष्टि, पालन और संहाररूप लीला के लिए लिङ्गस्वरूप धारण करते हैं।#शिव#लिंग रूप#महेश्वर
सृष्टि तत्त्वजीव और शिव का संबंध कैसे बताया गया है?जीव को ध्याता और शिव को ध्येय के रूप में रखा गया है।#जीव#शिव#ध्याता