शिव नाम महिमाशिव को शंभू क्यों कहते हैंशंभू = 'शं' (शुभ, कल्याण) + 'भू' (स्वरूप) = आनंद-स्वरूप, कल्याण के साकार रूप। शिव स्वयं परमानंद हैं और भक्तों को भी आनंद देते हैं — इसीलिए 'शंभू'। वे अनंत, अनादि और सृष्टि के संचालक हैं।#शंभू#आनंद स्वरूप#कल्याण
तंत्र साधनातंत्र में शांति कर्म सबसे सात्विक क्यों माना जाता है?षट्कर्म: शांति(सात्विक)→वशीकरण→स्तंभन(राजसिक)→विद्वेषण→उच्चाटन→मारण(तामसिक)। शांति = कल्याण, निःस्वार्थ, पुण्य। सामान्य = केवल शांति। शेष = तांत्रिक/गुरु।#शांति कर्म#सात्विक#षट्कर्म
शंकर नामशंकर नाम का अर्थ क्या है?शंकर नाम का अर्थ कल्याण करने वाला बताया गया है।#शंकर#नाम अर्थ#कल्याण
शंकर महिमाशिव सबका कल्याण कैसे करते हैं?शिव दयार्द्र होकर प्राणियों का कल्याण करते हैं; उनकी आत्मा बिना प्रयत्न कल्याण करने वाली कही गई है।#शिव#कल्याण#शंकर
शंकर महिमाशिव स्थाणु क्यों कहलाए?रुद्रात्मक सृष्टि से निवृत्त होकर निष्कल आत्मा वाले शंकर अधिष्ठित हुए, इसलिए उनका स्थाणुत्व बताया गया।#शिव#स्थाणु#रुद्र
श्रीमद्भागवतपृथु अवतार में भगवान ने क्या किया?पृथु अवतार में भगवान ने पृथ्वी से समस्त औषधियों का दोहन किया, इसलिए यह अवतार सबके लिए कल्याणकारी कहा गया।#पृथु अवतार#पृथ्वी#औषधि
श्रीमद्भागवतसत्त्वगुण क्यों जरूरी है?सत्त्वगुण चित्त को निर्मल करता है, भगवान का दर्शन कराने वाला है और मनुष्य का परम कल्याण श्रीहरि से होता है।#सत्त्वगुण#विष्णु#मन शुद्धि
ऋषि संततिस्वाहा और अग्नि से कितने पुत्र हुए?स्वाहा और अग्नि से तीन पुत्र उत्पन्न हुए, जिन्हें तीनों लोकों के कल्याण के लिये कहा गया है।#स्वाहा#अग्नि#तीन पुत्र
श्रीमद्भागवतभगवान का अवतार क्यों होता है?भगवान का अवतार जीवों के परम कल्याण और भगवत प्रेममयी समृद्धि के लिये बताया गया है।#भगवान अवतार#हरि कथा#कृष्ण
श्रीमद्भागवतभगवान कृष्ण देवकी और वसुदेव के यहाँ क्यों आए?ऋषि सूतजी से कृष्ण के देवकी-वसुदेव से जन्म का प्रयोजन पूछते हैं और कहते हैं कि भगवान का अवतार जीवों के कल्याण के लिये होता है।#कृष्ण अवतार#देवकी#वसुदेव
श्रीमद्भागवतकलियुग में शास्त्रों का सार क्यों जरूरी है?क्योंकि लोग अल्पायु और बाधाग्रस्त हैं, शास्त्र बहुत हैं और उनमें अनेक कर्मों का वर्णन है; उनका एक अंश सुनना भी कठिन है।#कलियुग#शास्त्र सार#कल्याण
श्रीमद्भागवतभागवत पुराण मनुष्य का कल्याण कैसे करती है?यह परमात्मा का निरूपण करती है, तीन तापों का नाश बताती है और कलियुग के जीवों के लिये शास्त्रों का सार माँगा गया है।#कल्याण#भागवत पुराण#कलियुग
श्रीमद्भागवतभागवत पुराण का मुख्य उद्देश्य क्या है?इसका उद्देश्य परम सत्य का ध्यान, निष्कपट धर्म, तीन तापों का नाश और जीवों का कल्याण बताया गया है।#भागवत पुराण#उद्देश्य#कल्याण
श्रीमद्भागवतरोगी लोग भागवत कथा क्यों सुनें?धनहीन, क्षयरोगी, अन्य रोगों से पीड़ित, भाग्यहीन, पापी, पुत्रहीन और मोक्ष इच्छुक लोगों को कथा सुनने को कहा गया है।#रोगी#भागवत कथा#श्रवण
श्रीमद्भागवतभागवत कथा सुनने के क्या लाभ हैं?भागवत कथा को पवित्र करने वाली, कृष्ण-प्राप्ति कराने वाली, भक्ति बढ़ाने वाली और वैकुंठफलदायक कहा गया है।#भागवत कथा#श्रवण#भक्ति
अभेद दर्शनमत्स्य पुराण का 'यथा भेदं न पश्यामि' श्लोक का क्या अर्थ है?'यथा भेदं न पश्यामि शिवविष्ण्वर्कपद्मजान्...' अर्थ: जैसे मैं शिव, विष्णु, सूर्य और ब्रह्मा में कोई भेद नहीं देखता — वैसे ही विश्वात्मा शंकर (जो कल्याण करे = शं कल्याणं करोति) सदा मेरे लिए कल्याणकारी हों।#यथा भेदं#अभेद दर्शन#शंकर अर्थ
हवन विधि'ॐ विश्वानि देव सवितर्दुरितानि...' मंत्र का क्या अर्थ है?'ॐ विश्वानि देव सवितर्दुरितानि परा सुव। यद् भद्रं तन्न आ सुव॥' अर्थ: हे सकल जगत के उत्पत्तिकर्ता परमेश्वर! हमारे सम्पूर्ण दुर्गुण, दुर्व्यसन और दुःख दूर करें। जो कल्याणकारक गुण, कर्म और पदार्थ हैं, वे सब हमें प्राप्त कराएं।#विश्वानि देव सवितर्#यजुर्वेद मंत्र अर्थ#दुर्गुण नाश
शिव तत्त्व परिचय'शिवेतरक्षतये' का क्या अर्थ है?'शिवेतरक्षतये' = 'शिव' (कल्याण) + 'इतर' (अकल्याणकारी) + 'क्षतये' (विनाश के लिए)। अर्थ: शिव वह सत्ता हैं जो समस्त अकल्याणकारी, अनिष्ट और तामसिक तत्त्वों का विनाश कर जीव का परम कल्याण सुनिश्चित करते हैं।#शिवेतरक्षतये#अकल्याणकारी नाश#तमस विनाश
सावधानियाँचन्द्रशेखराष्टकम् का तामसिक उद्देश्य से पाठ करना सही है क्या?नहीं — यह स्तुति दिव्य कल्याण के लिए है। लोभ, प्रतिशोध या हानि पहुँचाने के लिए इसका उपयोग वर्जित है — ऐसे में लाभ नहीं मिलता और मानसिक शांति भंग रहती है।#तामसिक उद्देश्य#वर्जित#नकारात्मक
सावधानियाँकालसर्प पूजा केवल किन उद्देश्यों के लिए करनी चाहिए?कालसर्प पूजा केवल ग्रह-शांति, मानसिक स्थिरता, परिवार कल्याण, स्वास्थ्य-लाभ और आध्यात्मिक उन्नति जैसे सात्त्विक उद्देश्यों के लिए करें — तामसिक प्रयोग पूर्णतः निषिद्ध है।#सात्त्विक उद्देश्य#ग्रह शांति#मानसिक स्थिरता
शिव पूजाशिव पूजा से क्या लाभ होते हैं?शिव पूजा लाभ: पाप-नाश ('शिवपूजाकरो नित्यं पापं नश्यति')। रोग-निवारण (वैद्यनाथ)। धन-समृद्धि। संतान-प्राप्ति। ग्रह-दोष शांति (शनि, राहु, केतु)। शत्रु-नाश। मोक्ष। परिवार-रक्षा। स्कंद पुराण: नित्य शिव-आराधना = निश्चित मुक्ति।#शिव पूजा#लाभ#फल