विस्तृत उत्तर
संस्कृत व्याकरण में 'शिवेतरक्षतये' (शिव + इतर + क्षतये) सूत्र के माध्यम से एक अन्य गूढ़ अर्थ प्रकट होता है।
शिव का अर्थ है कल्याण, 'इतर' का अर्थ है जो कल्याण से अलग हो (अर्थात अकल्याणकारी या अनिष्ट), और 'क्षतये' का अर्थ है विनाश के लिए।
तात्पर्य यह है कि शिव वह सत्ता हैं जो जगत में व्याप्त सभी अकल्याणकारी, अनिष्ट और तामसिक तत्त्वों का विनाश कर जीव का परम कल्याण सुनिश्चित करते हैं। जब संसार में महामारी, प्राकृतिक आपदाएं या अज्ञान का अंधकार बढ़ता है, तब शिव प्रलयकारी रूप धारण कर उस तमस को नष्ट करते हैं।





