अग्नि वंश49 अग्नियाँ क्या हैं?पुत्रों और पौत्रों को मिलाकर, आदिम सप्तक को छोड़कर कुल उनचास अग्नियाँ कही गई हैं।#49 अग्नियाँ#अग्नि#यज्ञ
अग्नि वंशस्वाहा के पुत्र कौन-कौन हैं?स्वाहा के पुत्र पवमान, पावक और शुचि बताए गए हैं।#स्वाहा#अग्नि#पवमान
अग्नि वंशअग्नि के तीन पुत्र कौन हैं?अग्नि के तीन पुत्र पवमान, पावक और शुचि बताए गए हैं। ये तीनों स्वाहा के पुत्र हैं।#अग्नि#स्वाहा#पवमान
ऋषि संततिऊर्जा और वसिष्ठ की संतान कौन थीं?ऊर्जा और वसिष्ठ से रज, सुहोत्र, बाहु, सवन, अनघ, सुतपा और शुक्र नामक सात पुत्र उत्पन्न हुए।#ऊर्जा#वसिष्ठ#रज
ऋषि संततिअनसूया और अत्रि की संतान कौन थीं?अनसूया और अत्रि से श्रुति तथा सत्यनेत्र, मुनिर्भव्य, मूर्तिराप, शनैश्चर और सोम उत्पन्न हुए।#अनसूया#अत्रि#श्रुति
ऋषि संततिस्मृति और अंगिरा की संतान कौन थीं?स्मृति और अंगिरा से सिनीवाली, कुहू, राका, अनुमति और अग्नि उत्पन्न हुए।#स्मृति#अंगिरा#सिनीवाली
ऋषि संततिसन्नति और क्रतु के बालखिल्य पुत्र कौन थे?सन्नति और क्रतु के साठ हजार पुत्र हुए, जो बालखिल्य नाम से प्रसिद्ध बताए गए हैं।#सन्नति#क्रतु#बालखिल्य
ऋषि संततिप्रीति और पुलस्त्य की संतान कौन थीं?प्रीति और पुलस्त्य से दत्तोर्ण, वेदबाहु और दृषद्वती उत्पन्न हुए।#प्रीति#पुलस्त्य#दत्तोर्ण
ऋषि संततिक्षमा और पुलह की संतान कौन थीं?क्षमा और पुलह से कर्दम, वरीयांस, सहिष्णु और पीवरी उत्पन्न हुए।#क्षमा#पुलह#कर्दम
ऋषि संततिसम्भूति और मरीचि की संतान कौन थीं?सम्भूति और मरीचि से पूर्णमास, मारीच, तुष्टि, दृष्टि, कृषि और अपचिति उत्पन्न हुए।#सम्भूति#मरीचि#पूर्णमास
ऋषि संततिख्याति और भृगु की संतान कौन थीं?ख्याति और भृगु से श्री यानी लक्ष्मी, धाता और विधाता उत्पन्न हुए।#ख्याति#भृगु#श्री
दक्ष वंशधर्म की पत्नियाँ कौन थीं?श्रद्धा से लेकर कीर्ति तक तेरह कन्याएँ प्रजापति धर्म की पत्नियाँ बनीं।#धर्म#धर्म की पत्नियाँ#श्रद्धा
मनु और शतरूपाआकूति और प्रसूति कौन थीं?आकूति और प्रसूति मनु-शतरूपा की कन्याएँ थीं; आकूति ज्येष्ठ और प्रसूति छोटी कही गई हैं।#आकूति#प्रसूति#मनु पुत्री
मनु और शतरूपाप्रियव्रत और उत्तानपाद कौन थे?प्रियव्रत और उत्तानपाद स्वायम्भुव मनु और शतरूपा के पुत्र थे; प्रियव्रत ज्येष्ठ और उत्तानपाद कनिष्ठ बताए गए हैं।#प्रियव्रत#उत्तानपाद#स्वायम्भुव मनु
मनु और शतरूपास्वायम्भुव मनु और शतरूपा कौन थे?स्वायम्भुव मनु और रानी शतरूपा का सृजन ब्रह्मा ने किया; शतरूपा अयोनिजा और पुण्यशालिनी कही गई हैं।#स्वायम्भुव मनु#शतरूपा#ब्रह्मा
ऋषि और मानस पुत्रऋभु और सनत्कुमार कौन थे?ऋभु और सनत्कुमार ब्रह्मा के अग्रजन्मा दिव्य पुत्र थे, जिन्हें नैष्ठिक ब्रह्मचारी और ब्रह्मवादी कहा गया है।#ऋभु#सनत्कुमार#नैष्ठिक ब्रह्मचारी
ऋषि और मानस पुत्रमरीचि, भृगु, अंगिरा, पुलस्त्य, पुलह, क्रतु, दक्ष, अत्रि और वसिष्ठ कौन थे?ये ब्रह्मा की योगविद्या से उत्पन्न नौ ब्रह्मवादी ऋषि और मानस पुत्र थे।#मरीचि#भृगु#अंगिरा
ऋषि और मानस पुत्रब्रह्मा के नौ मानस पुत्र कौन थे?ब्रह्मा के नौ मानस पुत्र मरीचि, भृगु, अंगिरा, पुलस्त्य, पुलह, क्रतु, दक्ष, अत्रि और वसिष्ठ थे।#ब्रह्मा के मानस पुत्र#मरीचि#भृगु
ऋषि और मानस पुत्रसनक, सनन्दन और सनातन कौन थे?सनक, सनन्दन और सनातन ब्रह्मा द्वारा उत्पन्न श्रेष्ठ मुनि थे; सनत्कुमार का भी उल्लेख साथ आता है।#सनक#सनन्दन#सनातन
सर्गकौमार सर्ग क्या है?कौमार सर्ग नौवाँ सर्ग है, जिसे प्राकृत और वैकृत दोनों कहा गया है।#कौमार सर्ग#सनक#सनन्दन
सर्गअनुग्रह सर्ग क्या है?अनुग्रह सर्ग सत्त्व और तमप्रधान सर्ग बताया गया है और नौ सर्गों में आठवाँ है।#अनुग्रह सर्ग#सत्त्व#तम
सर्गअर्वाक्स्रोत सृष्टि क्या है?अर्वाक्स्रोत सृष्टि मनुष्य आदि की सृष्टि है और नौ सर्गों में सातवाँ सर्ग कही गई है।#अर्वाक्स्रोत#मनुष्य#मानव सृष्टि
सर्गऊर्ध्वस्रोत सृष्टि क्या है?ऊर्ध्वस्रोत सृष्टि सात्त्विक रूप कही गई है और देवताओं की सृष्टि से जुड़ी है।#ऊर्ध्वस्रोत#देवसर्ग#देवता
सर्गतिर्यक्स्रोत सृष्टि क्या है?तिर्यक्स्रोत सृष्टि पशु आदि तिर्यक् योनिवाले जीवों की सृष्टि है।#तिर्यक्स्रोत#पशु#पक्षी
सर्गमुख्य सर्ग क्या है?मुख्य सर्ग वृक्षादि सृष्टि है, जिसमें वृक्ष, गुल्म, लता, वीरुध् और तृणरूप सर्ग बताए गए हैं।#मुख्य सर्ग#वृक्ष#गुल्म
अविद्यातम, मोह, महामोह, तामिस्र और अन्धतामिस्र का अर्थ क्या है?तम का अर्थ अज्ञान, महामोह का अर्थ भोगेच्छा, तामिस्र का अर्थ क्रोध और अन्धतामिस्र का अर्थ अभिनिवेश बताया गया है।#तम#मोह#महामोह
अविद्यापंचपर्वा अविद्या क्या है?पंचपर्वा अविद्या वे पांच अविद्याएँ हैं जो ब्रह्मा से पहले उत्पन्न हुईं: तम, मोह, महामोह, तामिस्र और अन्धतामिस्र।#पंचपर्वा अविद्या#अविद्या#तम
प्रलयमहाप्रलय में क्या होता है?महाप्रलय में सम्पूर्ण सृष्टि का लय हो जाता है और शिव की आज्ञा से प्रलय का भी प्रलय होता है।#महाप्रलय#सृष्टि लय#शिव आज्ञा
विशेष काल गणनाध्रुव वर्ष क्या होता है?मनुष्यों के नौ हजार नब्बे वर्ष मिलाकर एक ध्रुव वर्ष बताया गया है।#ध्रुव वर्ष#ध्रौव्य वर्ष#मनुष्य वर्ष
ब्रह्मा कालब्रह्मा का दिन क्या होता है?ब्रह्मा की प्राकृत सृष्टि का समय ही उनका दिन बताया गया है।#ब्रह्मा#ब्रह्मा का दिन#कल्प
सृष्टि तत्त्वप्राकृत सर्ग क्या है?प्राकृत सर्ग पुरुषाधिष्ठित, ईश्वरकृत, अबुद्धिपूर्वक उत्पन्न और कल्याणकारी प्राथमिक सर्ग बताया गया है।#प्राकृत सर्ग#प्राथमिक सर्ग#पुरुषाधिष्ठित
सृष्टि तत्त्वतामस अहंकार क्या है?तामस अहंकार तमोगुण की अधिकता वाला अहंकार है, जिससे भूतसर्ग का वर्णन किया गया है।#तामस अहंकार#तमोगुण#महत्तत्त्व
सृष्टि तत्त्वराजस अहंकार क्या है?राजस अहंकार महत्तत्त्व से उत्पन्न रजोगुण की अधिकता वाला अहंकार है।#राजस अहंकार#रजोगुण#महत्तत्त्व
सृष्टि तत्त्वसात्त्विक अहंकार क्या है?सात्त्विक अहंकार महत्तत्त्व से उत्पन्न संकल्प-अध्यवसायवृत्तिरूप अहंकार है।#सात्त्विक अहंकार#महत्तत्त्व#संकल्प
प्रकृति तत्त्वअजा प्रकृति क्या है?अजा प्रकृति विश्व को धारण करनेवाली शैवी शक्ति है, जो बहुविध प्रजाओं की उत्पत्ति करती है।#अजा#प्रकृति#शैवी शक्ति
शिव तत्त्वब्रह्मा विष्णु शिव की विश्व प्राज्ञ तैजस अवस्थाएँ क्या हैं?बीजरूप ब्रह्मा, योनिरूप विष्णु और प्रधानरूप शिव की विश्व, प्राज्ञ और तैजस अवस्थाएँ कही गई हैं।#ब्रह्मा#विष्णु#शिव
शिव तत्त्वव्यक्त और अव्यक्त रूप क्या हैं?लिंग को व्यक्त और अलिंग को अव्यक्त रूप कहा गया है; दोनों रूप शिवात्मक बताए गए हैं।#व्यक्त#अव्यक्त#लिंग
प्रकृति तत्त्वशिव और प्रकृति का संबंध क्या है?निर्गुण शिव प्रकृति के मूल कारण हैं और शिव की दृष्टि से प्रकृति शैवी कही गई है।#शिव#प्रकृति#शैवी शक्ति
शिव तत्त्वनिर्गुण शिव क्या है?निर्गुण शिव वह अलिंग तत्त्व है जो शब्द, स्पर्श, रूप, रस, गन्ध और गुणों से रहित है।#निर्गुण शिव#अलिंग#परमात्मा
शिव तत्त्वलिंग तत्त्व क्या है?लिंग तत्त्व प्रधान प्रकृति है, जो शब्द, स्पर्श, रूप, रस और गन्ध आदि से संयुक्त बताई गई है।#लिंग तत्त्व#प्रकृति#प्रधान
शिव तत्त्वअलिंग क्या है?अलिंग निर्गुण ब्रह्म शिव है, जो शब्द, स्पर्श, रूप, रस और गन्ध आदि से रहित बताया गया है।#अलिंग#निर्गुण शिव#निर्गुण ब्रह्म
पाठ फलअनुक्रमणिका पाठ का फल क्या है?अनुक्रमणिका का कीर्तन करने वाला मनुष्य सभी पापों से छूटकर ब्रह्मलोक को प्राप्त होता है।#अनुक्रमणिका#पाठ फल#पाप मुक्ति
गुण और देव रूपमहेश्वर का निर्गुण स्वरूप क्या है?गुणों से रहित अवस्था को महेश्वरस्वरूप बताया गया है।#महेश्वर#निर्गुण#शिव
गुण और देव रूपहिरण्यगर्भ क्या है?हिरण्यगर्भ वह स्वरूप है जो रजोगुण से युक्त होने पर प्रकट बताया गया है।#हिरण्यगर्भ#रजोगुण#ब्रह्मा
गुण और देव रूपकालरुद्र कौन हैं?कालरुद्र वह रूप है जो तमोगुण से युक्त होने पर प्रकट बताया गया है।#कालरुद्र#तमोगुण#रुद्र
ॐकार और शब्दब्रह्मॐकार क्या है?ॐकार को शब्दब्रह्म, अकार-उकार-मकारात्मक और चारों वेदों से सम्बद्ध बताया गया है।#ॐकार#ओंकार#शब्दब्रह्म
शिव तत्त्वलिंग माहात्म्य का सरल अर्थ क्या है?लिङ्गमाहात्म्य का भाव लिङ्ग से जुड़ी पवित्र महिमा और कथा-विषय से है।#लिंग माहात्म्य#लिङ्गमाहात्म्य#लिंग
पुराण कथासूतजी कौन थे?सूतजी पुराणों के ज्ञाता, परम बुद्धिमान और व्यासजी से पुराणसंहिता प्राप्त करने वाले पौराणिक थे।#सूतजी#व्यासजी#पुराण