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नक्षत्र

श्रवण नक्षत्र — नक्षत्र — पूजा, मंत्र, उपाय प्रश्नोत्तर(24)

श्रवण नक्षत्र से जुड़े 24 प्रश्न — विधि, नियम, मंत्र, लाभ। शास्त्र-सम्मत व्याख्या एक स्थान पर।

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श्रवण और श्रवणी कर्म-साक्षी क्यों माने गए हैं?

श्रवण-श्रवणी हर गुप्त कर्म को देखते-सुनते और यमराज के सामने प्रमाण देते हैं, इसलिए वे कर्म-साक्षी हैं।

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यमलोक की गुप्तचर व्यवस्था कैसे काम करती है?

यमलोक की गुप्तचर व्यवस्था श्रवण-श्रवणी देवों से चलती है, जो हर गुप्त कर्म देखकर चित्रगुप्त तक पहुँचाते हैं।

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श्रवण देवों की पूजा करने से मृत्यु के समय क्या लाभ होता है?

सत्य, दान-पुण्य और श्रवण देवों की पूजा करने वाले पर वे प्रसन्न होते हैं और मृत्यु के समय कष्ट नहीं होने देते।

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यमराज के सामने श्रवण देव गवाह कैसे बनते हैं?

यदि आत्मा पाप नकारती है, तो श्रवण-श्रवणी देव यमराज के सामने प्रत्यक्ष गवाह बनकर उसके कर्मों का प्रमाण देते हैं।

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श्रवण और श्रवणी चित्रगुप्त की सहायता कैसे करते हैं?

श्रवण-श्रवणी हर कर्म को देखकर-सुनकर चित्रगुप्त की पंजिका तक पहुँचाते हैं और यमराज के सामने गवाह बनते हैं।

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श्रवण देव गुप्त कर्मों को कैसे जानते हैं?

श्रवण देव ब्रह्मा के कानों और नेत्रों के प्रतीक हैं, इसलिए वे गुप्त से गुप्त कर्म भी देख-सुन लेते हैं।

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श्रवण देवों की उत्पत्ति कैसे हुई?

ब्रह्मा जी ने लोक-व्यवहार का सूक्ष्म ज्ञान रखने के लिए अपनी तपस्या से तेजस्वी और विशाल नेत्रों वाले श्रवण देव उत्पन्न किए।

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श्रवण और श्रवणी देव कौन हैं?

श्रवण और श्रवणी यमलोक के दिव्य गुप्तचर हैं, जो पुरुषों और स्त्रियों के शुभ-अशुभ कर्मों को देखते-सुनते हैं।

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जीवन एवं मृत्यु

प्रेतकल्प का श्रवण किसे नहीं करना चाहिए?

प्रेतकल्प का श्रवण किसी के लिए भी पूर्णतः वर्जित नहीं। 'घर में न रखने' की धारणा भ्रामक है। परंपरागत सावधानी — गर्भवती, अबोध बच्चे और अत्यंत संवेदनशील व्यक्तियों को विस्तृत यातना-वर्णन से दूर रखा जा सकता है।

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जीवन एवं मृत्यु

प्रेतकल्प का श्रवण किसे करना चाहिए?

प्रेतकल्प का श्रवण करना चाहिए — मृत के परिजनों को, मुमूर्षु को, पापाचारी को (विशेष लाभ), जिज्ञासु साधक को और सर्व-साधारण को। यह ग्रंथ किसी एक वर्ग के लिए नहीं — सर्वजन-हिताय है।

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जीवन एवं मृत्यु

प्रेतकल्प का श्रवण किस उद्देश्य से किया जाता है?

प्रेतकल्प श्रवण के उद्देश्य — मृत आत्मा की सद्गति, परिजनों को कर्तव्य-ज्ञान, मृत्यु की सच्चाई समझना, पाप-मोचन और वैराग्य-आत्मज्ञान की प्राप्ति।

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जीवन एवं मृत्यु

प्रेतकल्प का श्रवण कैसे किया जाता है?

प्रेतकल्प का श्रवण — योग्य ब्राह्मण द्वारा पाठ, दक्षिणाभिमुख बैठकर, श्रद्धापूर्वक, दीप-धूप के साथ, प्रतिदिन निश्चित समय पर। पाठ के बाद दान-दक्षिणा और ब्राह्मण-भोजन का विधान है।

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जीवन एवं मृत्यु

प्रेतकल्प का श्रवण किसके लिए लाभदायक है?

प्रेतकल्प का श्रवण लाभदायक है — मृत आत्मा को (सद्गति), शोकाकुल परिजनों को (धैर्य-कर्तव्य), पापी को (पाप-मोचन), जिज्ञासु को (ज्ञान) और सभी को (पितृदोष-निवारण, धर्म-बोध)।

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जीवन एवं मृत्यु

प्रेतकल्प का श्रवण कब किया जाता है?

प्रेतकल्प का श्रवण — मृत्यु के 13 दिनों में (मुख्य), श्राद्ध पक्ष में, पुण्यकाल (संक्रांति-ग्रहण) में और किसी भी शुभ समय में किया जा सकता है। 'किसी भी समय पाठ-श्रवण शुभ है।'

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जीवन एवं मृत्यु

प्रेतकल्प का श्रवण क्यों करना चाहिए?

प्रेतकल्प का श्रवण करना चाहिए — पापों से मुक्ति, मृत आत्मा को सद्गति, विष्णु-प्रदत्त ज्ञान की प्राप्ति, प्रेतत्व से बचाव और परिजनों को कर्तव्य-ज्ञान के लिए।

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पंचांग एवं ज्योतिष

श्रवण नक्षत्र क्या होता है?

श्रवण 27 नक्षत्रों में 22वाँ। मकर 10°–23°20'। स्वामी चंद्रमा, देवता विष्णु। प्रतीक तीन पदचिह्न। विद्यारंभ-मंत्रदीक्षा के लिए शुभ। जन्म में बुद्धिमान, जिज्ञासु, सुशील, यात्राप्रिय।

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भक्ति एवं आध्यात्म

भगवान हमारी प्रार्थना कैसे सुनते हैं

भगवान अंतर्यामी हैं — हर हृदय में निवास करते हैं। प्रार्थना सीधे उन तक पहुँचती है। उनका उत्तर मन में शांति, स्पष्ट विचार, परिस्थिति में बदलाव या गुरु-संत के माध्यम से आता है।

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भक्ति एवं आध्यात्म

नवधा भक्ति में कौन सी भक्ति सबसे सरल है

प्रह्लाद के अनुसार श्रवण सर्वश्रेष्ठ है। कलियुग के लिए नाम-संकीर्तन सबसे सुलभ है — देश-काल का कोई बंधन नहीं। जो स्वभाव से सहज लगे वही सबसे सरल भक्ति है।

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भक्ति एवं आध्यात्म

श्रवण कीर्तन स्मरण पादसेवन अर्चन वंदन दास्य सख्य आत्मनिवेदन

नवधा भक्ति के नौ अंग — श्रवण (कथा सुनना), कीर्तन (गान), स्मरण (स्मरण), पादसेवन (चरण-सेवा), अर्चन (पूजा), वंदन (नमस्कार), दास्य (सेवक-भाव), सख्य (मित्र-भाव), आत्मनिवेदन (पूर्ण समर्पण)। एक भी पूर्ण हो तो मोक्ष मिले।

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दैनिक आचार

गर्भावस्था में कौन से मंत्र सुनने चाहिए

गायत्री मंत्र (बुद्धि), विष्णु सहस्रनाम, गीता, सुंदरकांड, संतान गोपाल, महामृत्युंजय। शास्त्र: अभिमन्यु + प्रह्लाद = गर्भ में सीखा। विज्ञान: prenatal music therapy लाभकारी।

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शास्त्र ज्ञान

उपनिषद में आत्मज्ञान कैसे प्राप्त करें?

उपनिषदों में आत्मज्ञान की विधि है — मुमुक्षुत्व → सद्गुरु → श्रवण → मनन → निदिध्यासन → 'नेति नेति' विचार → अपरोक्षानुभूति। बृहदारण्यक (4/4/22) — 'आत्मा श्रोतव्यो मन्तव्यो निदिध्यासितव्यः।' कठोपनिषद (2/24) — आत्मा बलहीन को नहीं मिलती।

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शास्त्र ज्ञान

उपनिषद में साधना का महत्व क्या है?

उपनिषदों में साधना का मूल मार्ग है — श्रवण → मनन → निदिध्यासन (बृहदारण्यक 4/4/22)। साधन-चतुष्टय — विवेक, वैराग्य, षट्सम्पत्ति और मुमुक्षुत्व — वेदांत साधना के चार अनिवार्य अंग हैं। छान्दोग्य (7/26) — आहार-शुद्धि से मन-शुद्धि और मन-शुद्धि से ब्रह्म-साक्षात्कार।

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मंत्र विधि

मंत्र जप ऑनलाइन सुनकर करने से भी फल मिलता है क्या?

श्रवण = भक्ति का प्रथम प्रकार — सुनना लाभदायी। परंतु: स्वयं जप > सुनना (कंपन, चक्र, चारों इन्द्रियां)। ऑनलाइन सीमा: विक्षेप, अशुद्ध उच्चारण। सुझाव: सुनते समय मन में जपें। प्रामाणिक स्रोत। स्वयं जप = कोई विकल्प नहीं।

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कथा एवं श्रवण

श्रीमद भागवत कथा सुनने के नियम

भागवत कथा सुनने का कोई कठोर तिथि-नियम नहीं है, इसे कभी भी सुना जा सकता है। श्रद्धा, एकाग्र मन, सात्विकता और ब्रह्मचर्य का पालन मुख्य नियम हैं। केवल सुनना नहीं, बल्कि सुनी बात पर मनन करना और आचरण में उतारना भी आवश्यक है।

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आज का पंचांग
आज की तिथि, नक्षत्र, मुहूर्त

पंचांग सहित दैनिक मुहूर्त, राहु काल और चौघड़िया।

पर्व-पञ्चांग
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होली, दिवाली, नवरात्रि, एकादशी — पर्व-केन्द्रित प्रश्नोत्तर।