विस्तृत उत्तर
सनातन परंपरा में प्रेतकल्प के श्रवण की एक निश्चित विधि है।
पाठक — गरुड़ पुराण का पाठ योग्य ब्राह्मण आचार्य द्वारा किया जाता है। वे शुद्ध और विधिपूर्वक पाठ करते हैं।
स्थान — सामान्यतः मृत व्यक्ति के घर में, एक शुद्ध और शांत स्थान पर।
आसन और दिशा — दक्षिण दिशा में मुँह करके बैठकर पाठ किया जाता है क्योंकि दक्षिण पितरों की दिशा है।
श्रोताओं की स्थिति — परिजन शांत चित्त से, श्रद्धापूर्वक बैठकर सुनते हैं। मध्य में उठकर जाना उचित नहीं।
समय — प्रतिदिन एक निश्चित समय पर, प्रायः सुबह या सायंकाल।
साथ में — दीपदान, धूप, जलार्पण और अन्य पूजा-सामग्री के साथ।
फल — पाठ के अंत में दान-दक्षिणा और ब्राह्मण को भोजन का प्रावधान है।
गरुड़ पुराण में कहा गया है — 'जो मनुष्य इसका पाठ करता है या सुनता है, वह पापमुक्त होकर स्वर्ग प्राप्त करता है।'



