विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में प्रेतकल्प के श्रवण के समय का विधान स्पष्ट है।
मृत्यु के बाद 13 दिन — सर्वाधिक प्रचलित समय। 'मृत्यु के 10 से 13 दिनों तक गरुड़ पुराण का पाठ, भूखों को भोजन, वस्त्र दान और जलदान करने से आत्मा की यात्रा सहज होती है।' यह समय मृत आत्मा के घर में रहने का काल है।
शुद्धि के बाद — 13वें दिन के बाद जब परिवार अशौच से मुक्त हो जाता है, तब भी पाठ होता है।
श्राद्ध पक्ष में — पितृपक्ष (भाद्र कृष्ण प्रतिपदा से आश्विन अमावस्या) में गरुड़ पुराण का पाठ विशेष फलदायी है।
पुण्यकाल में — संक्रांति, ग्रहण, अमावस्या और अन्य पवित्र अवसरों पर।
किसी भी समय — गरुड़ पुराण की घर में सदा रखने और पढ़ने की परंपरा है। 'घर में नहीं रखना चाहिए' — यह भ्रांत धारणा है। किसी भी समय पाठ-श्रवण शुभ है।



