विस्तृत उत्तर
चातुर्मास के भोजन निषेध नियम पूर्णतः स्वास्थ्य-विज्ञान पर आधारित हैं। वर्षा ऋतु में मनुष्य की जठराग्नि (पाचन शक्ति) अत्यंत मंद हो जाती है और संक्रामक रोगों का भय रहता है। इसलिए शास्त्रों ने सावन में हरी पत्तेदार सब्जियाँ (साग) (कीड़े होने के डर से), भाद्रपद में दही, आश्विन में दूध और कार्तिक में दालों व द्विदल अन्न के त्याग का निर्देश दिया है, ताकि बीमारियां न फैलें और पाचन सही रहे।





