विस्तृत उत्तर
भगवान शिव के 1008 नामों का संग्रह 'शिव सहस्रनामावली' के रूप में प्रसिद्ध है। यह महाभारत और शिवपुराण दोनों में उपलब्ध है। इन 1008 नामों में प्रत्येक नाम शिव के एक विशेष गुण, रूप या कार्य को प्रकट करता है।
इन 1008 नामों में से कुछ सर्वाधिक प्रसिद्ध और प्रभावशाली नाम इस प्रकार हैं — 'महादेव' (समस्त देवताओं में महान), 'शम्भु' (सुख देने वाले), 'शंकर' (मंगल देने वाले), 'नीलकंठ' (जिन्होंने हलाहल विष को कंठ में धारण किया), 'त्र्यम्बक' (तीन नेत्रों वाले), 'पशुपति' (सभी प्राणियों के स्वामी), 'उमापति' (माँ पार्वती के पति), 'भोलेनाथ' (सरल और भोले स्वभाव वाले), 'महाकाल' (काल के भी काल), 'विश्वनाथ' (सम्पूर्ण विश्व के नाथ), 'स्थाणु' (स्थिर एवं अविचल), 'भीम' (प्रचंड शक्तिवान), 'गिरीश' (कैलास पर्वत के अधिपति), 'ईशान' (सर्वश्रेष्ठ ईश्वर) और 'नटराज' (ताण्डव नृत्य करने वाले)।
महाशिवरात्रि, श्रावण मास, प्रदोष और सोमवार के दिन शिव सहस्रनामावली का पाठ विशेष फलदायक माना जाता है। 'ॐ नमः शिवाय' — यह पंचाक्षर मंत्र शिव के 1008 नामों का सार माना जाता है।





