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मरणोपरांत आत्मा यात्रा प्रश्नोत्तरी — 240 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित मरणोपरांत आत्मा यात्रा विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 240 प्रश्न

मरणोपरांत आत्मा यात्रा

मृत्यु से पहले जीव की अवस्था कैसी होती है?

मृत्यु से पहले पापी जीव वृद्ध, रोगग्रस्त, वैराग्यहीन और यमदूतों को देखकर भयभीत बताया गया है।

मरणासन्न अवस्थामृत्यु से पहलेभागवत पुराण
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

यातना देह में आत्मा को पीड़ा कैसे होती है?

यातना देह में आत्मा जलने, कटने, फटने, भूख-प्यास, थकान और यममार्ग के कष्टों को अनुभव करती है।

यातना देहआत्मा की पीड़ायममार्ग
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

यातना देह नष्ट क्यों नहीं होती?

यातना देह कष्ट सहने के लिए बनी होती है; वह पीड़ा अनुभव करती है लेकिन नष्ट नहीं होती।

यातना देहनरकपीड़ा
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

पापी जीव को यातना देह क्यों मिलती है?

पापी जीव को अपने कर्मों के अनुसार यममार्ग और नरक की यातनाएँ सहने के लिए यातना देह मिलती है।

पापी जीवयातना देहयमदूत
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

यातना देह क्या होती है?

यातना देह पापी आत्मा को कष्ट सहने के लिए मिलने वाला ऐसा शरीर है जो पीड़ा पाता है पर नष्ट नहीं होता।

यातना देहपापी जीवयममार्ग
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

पिण्डदान से आत्मा का शरीर कैसे बनता है?

पिण्डदान के भागों से प्रेत के अंग बनते हैं, यमदूत संतुष्ट होते हैं और प्रेत को क्षुधा-शांति मिलती है।

पिण्डदानआत्मा का शरीरदशगात्र
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

पिण्डज शरीर कैसे बनता है?

पिण्डज शरीर दस दिनों के पिण्डदान से सिर से पैरों तक क्रमशः बनता है।

पिण्डज शरीरदशगात्रपिण्डदान
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

पिण्डज शरीर क्या होता है?

पिण्डज शरीर पिण्डदान से दस दिनों में बनने वाला प्रेत का पारलौकिक शरीर है।

पिण्डज शरीरपिण्डदानदशगात्र
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

वायुजा देह अग्नि रहित शिखा जैसी क्यों कही गई है?

वायुजा देह वायव्य, अस्थूल और कर्म-अक्षम होती है, इसलिए उसे अग्नि रहित शिखा जैसी कहा गया है।

वायुजा देहअग्नि रहित शिखावायव्य शरीर
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

मृत्यु के तुरंत बाद आत्मा को वायुजा देह क्यों मिलती है?

मृत्यु के तुरंत बाद पिण्डज शरीर बनने से पहले आत्मा वायुजा देह में वायुमंडल में विचरण करती है।

वायुजा देहमृत्युआत्मा
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

वायुजा देह क्या होती है?

वायुजा देह मृत्यु के तुरंत बाद मिलने वाला वायव्य शरीर है, जिसमें आत्मा भटकती है पर स्थूल अन्न ग्रहण नहीं कर सकती।

वायुजा देहमृत्यु के बादप्रेत
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

मृत्यु के समय आत्मा स्थूल शरीर कैसे छोड़ती है?

आत्मा मृत्यु के समय लिंग शरीर में आवेष्टित होकर स्थूल पञ्चभौतिक शरीर छोड़ती है।

मृत्युआत्मास्थूल शरीर
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

लिंग शरीर में कितने तत्त्व बताए गए हैं?

लिंग शरीर में सत्रह तत्त्व बताए गए हैं।

लिंग शरीर17 तत्त्वसूक्ष्म शरीर
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

लिंग शरीर किन तत्त्वों से बना होता है?

लिंग शरीर पाँच ज्ञानेन्द्रियाँ, पाँच कर्मेन्द्रियाँ, पाँच प्राण, मन और बुद्धि से बना होता है।

लिंग शरीरसत्रह तत्त्वज्ञानेन्द्रियाँ
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

सूक्ष्म शरीर क्या होता है?

सूक्ष्म शरीर सत्रह तत्त्वों से बना वह शरीर है जिसमें आत्मा मृत्यु के बाद कर्म-संस्कारों के साथ आगे बढ़ती है।

सूक्ष्म शरीरलिंग शरीरमृत्यु
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

लिंग शरीर क्या होता है?

लिंग शरीर सत्रह तत्त्वों से बना सूक्ष्म शरीर है, जो कर्म और संस्कारों का वाहक होता है।

लिंग शरीरसूक्ष्म शरीरकर्म
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

स्थूल शरीर क्या होता है?

स्थूल शरीर पञ्चभौतिक देह है, जिसे आत्मा मृत्यु के समय छोड़ देती है।

स्थूल शरीरपञ्चभौतिक देहमृत्यु
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

मृत्यु के बाद आत्मा कौन-कौन से शरीर धारण करती है?

मृत्यु के बाद आत्मा लिंग शरीर, वायुजा देह, पिण्डज शरीर और पापी होने पर यातना देह धारण कर सकती है।

आत्मा के शरीरलिंग शरीरवायुजा देह
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

मृत्यु के बाद आत्मा किस शरीर में जाती है?

मृत्यु के बाद आत्मा पहले लिंग शरीर में रहती है, फिर वायुजा देह धारण करती है और पिण्डदान से पिण्डज शरीर प्राप्त करती है।

मृत्यु के बादआत्मालिंग शरीर
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

मृत्यु को सनातन धर्म में जीवन का अंत क्यों नहीं माना गया है?

मृत्यु स्थूल शरीर का अंत है, लेकिन आत्मा लिंग शरीर और अन्य पारलौकिक देहों के साथ आगे यात्रा करती है।

मृत्युसनातन धर्मआत्मा
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

विष्णु पुराण में मृत्यु के बाद आत्मा की गति क्या बताई गई है?

विष्णु पुराण के अनुसार आत्मा मृत्यु के तुरंत बाद यमलोक नहीं जाती, बल्कि घर-परिवार के पास रहती है और आगे कर्म व संस्कारों के अनुसार उसकी गति होती है।

विष्णु पुराणआत्मा की गतिमृत्यु के बाद
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

भागवत पुराण में मृत्यु के समय जीव की स्थिति कैसी बताई गई है?

भागवत पुराण में पापी जीव मृत्यु के समय वृद्ध, व्याधिग्रस्त, वैराग्यहीन और यमदूतों को देखकर भयभीत बताया गया है।

भागवत पुराणमृत्युमरणासन्न अवस्था
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

गरुड़ पुराण में मृत्यु के बाद आत्मा की यात्रा कैसे बताई गई है?

गरुड़ पुराण में आत्मा की यात्रा वायुजा देह, पिण्डज शरीर, सपिण्डीकरण, यमदूतों के पाश और 348 दिन की यमयात्रा के रूप में बताई गई है।

गरुड़ पुराणआत्मा की यात्राप्रेत खण्ड
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

मृत्यु के बाद आत्मा की 13 दिन की यात्रा क्या है?

मृत्यु के बाद 13 दिनों में आत्मा वायुजा देह से पिण्डज शरीर पाती है, सपिण्डीकरण से प्रेतत्व छोड़ती है और तेरहवें दिन यममार्ग की यात्रा शुरू करती है।

मृत्यु के बाद आत्मा13 दिन की यात्रागरुड़ पुराण

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