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सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — 13772 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 13772 प्रश्न

श्रीमद्भागवत

कृष्ण नाम लेने का महत्व क्या है?

जन्म-मृत्यु के घोर चक्र में पड़ा जीव भी यदि भगवान के मंगलमय नाम का उच्चारण कर ले, तो तुरंत मुक्त हो सकता है।

कृष्ण नामभगवान नाममुक्ति
श्रीमद्भागवत

भगवान का अवतार क्यों होता है?

भगवान का अवतार जीवों के परम कल्याण और भगवत प्रेममयी समृद्धि के लिये बताया गया है।

भगवान अवतारहरि कथाकृष्ण
श्रीमद्भागवत

भगवान कृष्ण देवकी और वसुदेव के यहाँ क्यों आए?

ऋषि सूतजी से कृष्ण के देवकी-वसुदेव से जन्म का प्रयोजन पूछते हैं और कहते हैं कि भगवान का अवतार जीवों के कल्याण के लिये होता है।

कृष्ण अवतारदेवकीवसुदेव
श्रीमद्भागवत

कलियुग के लोगों के लिए सहज कल्याण क्या है?

ऋषि सूतजी से यही पूछते हैं कि शास्त्रों का सार बताइए जिससे कलियुग के जीवों का परम कल्याण हो।

कलियुगसहज कल्याणशास्त्र सार
श्रीमद्भागवत

कलियुग में शास्त्रों का सार क्यों जरूरी है?

क्योंकि लोग अल्पायु और बाधाग्रस्त हैं, शास्त्र बहुत हैं और उनमें अनेक कर्मों का वर्णन है; उनका एक अंश सुनना भी कठिन है।

कलियुगशास्त्र सारकल्याण
श्रीमद्भागवत

कलियुग में मनुष्य की हालत कैसी बताई गई है?

कलियुग में मनुष्य अल्पायु, साधना में अरुचि वाला, आलसी, मंदबुद्धि, मंदभाग्य और अनेक बाधाओं से घिरा बताया गया है।

कलियुगमनुष्यअल्पायु
श्रीमद्भागवत

सूतजी को पुराणों का ज्ञाता क्यों माना गया?

क्योंकि उन्होंने इतिहास, पुराण और धर्मशास्त्रों का अध्ययन और व्याख्या की थी तथा व्यासादि मुनियों के ज्ञान को जानते थे।

सूतजीपुराणधर्मशास्त्र
श्रीमद्भागवत

सूतजी से ऋषियों ने क्या पूछा?

ऋषियों ने सूतजी से शास्त्रों का सार, कलियुग के जीवों का कल्याण, कृष्ण अवतार, हरि कथा और धर्म का आश्रय पूछा।

सूतजीऋषिप्रश्न
श्रीमद्भागवत

नैमिषारण्य में ऋषि क्यों इकट्ठे हुए थे?

शौनकादि ऋषि नैमिषारण्य में भगवत प्राप्ति की इच्छा से हजार वर्ष में पूर्ण होने वाला महान यज्ञ कर रहे थे।

नैमिषारण्यऋषियज्ञ
श्रीमद्भागवत

भागवत पुराण सुनने की इच्छा से क्या होता है?

जब सुकृती पुरुष इसे सुनने की इच्छा करते हैं, तब ईश्वर शीघ्र उनके हृदय में आकर बंध जाता है।

भागवत श्रवणईश्वरहृदय
श्रीमद्भागवत

भागवत पुराण को वेदों का सार क्यों माना जाता है?

भागवत को वेद रूप कल्पवृक्ष का पका फल कहा गया है और ऋषि शास्त्रों का सार सुनना चाहते हैं।

वेदभागवत पुराणशास्त्र सार
श्रीमद्भागवत

भागवत पुराण मनुष्य का कल्याण कैसे करती है?

यह परमात्मा का निरूपण करती है, तीन तापों का नाश बताती है और कलियुग के जीवों के लिये शास्त्रों का सार माँगा गया है।

कल्याणभागवत पुराणकलियुग
श्रीमद्भागवत

श्रीमद्भागवत को परम धर्म क्यों कहा गया है?

क्योंकि इसमें मोक्ष तक की फल-कामना से रहित, निष्कपट और सत्पुरुषों के योग्य परम धर्म का निरूपण है।

परम धर्मश्रीमद्भागवतनिष्कपट धर्म
श्रीमद्भागवत

भागवत पुराण में परम सत्य किसे कहा गया है?

परम सत्य उस स्वयंप्रकाश परमात्मा को कहा गया है, जिससे जगत की सृष्टि, स्थिति और लय होते हैं।

परम सत्यपरमात्मासृष्टि
श्रीमद्भागवत

भागवत पुराण का मुख्य उद्देश्य क्या है?

इसका उद्देश्य परम सत्य का ध्यान, निष्कपट धर्म, तीन तापों का नाश और जीवों का कल्याण बताया गया है।

भागवत पुराणउद्देश्यकल्याण
श्रीमद्भागवत

श्रीमद्भागवत किसने रची?

श्रीमद्भागवत को महामुनि व्यासदेव द्वारा निर्मित बताया गया है।

श्रीमद्भागवतव्यासदेवमहापुराण
श्रीमद्भागवत

श्रीमद्भागवत महापुराण क्या है?

यह व्यासदेव रचित महापुराण है, जिसमें परम सत्य, निष्कपट परम धर्म, परमात्मा और भगवत रस का वर्णन है।

श्रीमद्भागवतभागवत पुराणपरम धर्म
सृष्टि आरम्भ

ब्रह्मा ने भू भुव स्व मह लोकों की रचना कैसे की?

पृथ्वी को पुनः व्यवस्थित करने के बाद ब्रह्मा ने भू आदि चार लोकों की पूर्ववत् रचना की।

भूभुवस्व
सृष्टि आरम्भ

पृथ्वी को फिर से कैसे स्थापित किया गया?

ब्रह्मा ने पृथ्वी को निकालकर पूर्ववत् स्थापित किया, नदी-समुद्र बनाए और दबे-उठे भागों को समतल किया।

पृथ्वी स्थापनाब्रह्मावाराह
सृष्टि आरम्भ

जल में डूबी पृथ्वी को किसने निकाला?

जल में डूबी पृथ्वी को सनातन ब्रह्मा ने वाराह रूप धारण करके निकाला।

पृथ्वीजलब्रह्मा
सृष्टि आरम्भ

ब्रह्मा ने वाराह रूप क्यों धारण किया?

ब्रह्मा ने जल में डूबी पृथ्वी को निकालकर फिर से स्थापित करने के लिए वाराह रूप धारण किया।

ब्रह्मावाराह रूपपृथ्वी उद्धार
सृष्टि आरम्भ

प्रलय के बाद ब्रह्मा ने क्या सोचा?

प्रलयकालीन रात बीतने पर ब्रह्मा ने चराचर जगत् को शून्य देखकर सृष्टि करने का विचार किया।

प्रलयब्रह्मासृष्टि विचार
ब्रह्मा काल

ब्रह्मा को नारायण क्यों कहा गया है?

प्रलय की रात में ब्रह्माजी जलराशि में शयन करते हैं, इसलिए उन्हें नारायण कहा गया है।

ब्रह्मानारायणप्रलय
प्रलय

प्रलय में कौन से लोक नष्ट नहीं होते?

भू:, भुव:, स्व: और मह: से ऊपर के लोकों का नाश नहीं होता बताया गया है।

प्रलयऊपर के लोकलोक

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सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

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