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सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — 13772 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 13772 प्रश्न

शिव तत्त्व

रुद्र से संहार कैसे होता है?

तीन प्रधान देवों में रुद्र से जगत् का संहार बताया गया है और प्रलयकाल तमोगुण से जुड़ा है।

रुद्रसंहारतमोगुण
सृष्टि तत्त्व

विष्णु से जगत की रक्षा कैसे होती है?

तीन प्रधान देवों में विष्णु से जगत् की रक्षा होती है और पालन की स्थिति सत्त्वगुण से जुड़ी बताई गई है।

विष्णुजगत रक्षापालन
सृष्टि तत्त्व

ब्रह्मा से सृष्टि कैसे होती है?

माया-वितत लिंगों से उद्भूत तीन प्रधान देवों में ब्रह्मा से जगत् की उत्पत्ति बताई गई है।

ब्रह्मासृष्टिशिवात्मक
शिव तत्त्व

ब्रह्मा विष्णु रुद्र शिवात्मक कैसे हैं?

ब्रह्मा, विष्णु और रुद्र तीनों प्रधान देव माया-वितत लिंगों से उद्भूत और शिवात्मक बताए गए हैं।

ब्रह्माविष्णुरुद्र
सृष्टि तत्त्व

छब्बीस तत्त्व कौन से हैं?

छब्बीस रूपवाले लिंगतत्त्व का वर्णन सात, आठ और ग्यारह रूपों के क्रम से किया गया है।

छब्बीस तत्त्वलिंग तत्त्वमहत्तत्त्व
सृष्टि तत्त्व

पंचभूत कौन से हैं?

पंचभूत पृथ्वी, जल, तेज, आकाश और वायु बताए गए हैं।

पंचभूतपृथ्वीजल
प्रकृति तत्त्व

शिव और प्रकृति का संबंध क्या है?

निर्गुण शिव प्रकृति के मूल कारण हैं और शिव की दृष्टि से प्रकृति शैवी कही गई है।

शिवप्रकृतिशैवी शक्ति
प्रकृति तत्त्व

प्रकृति को लिंग क्यों कहा गया है?

प्रकृति को लिंग कहा गया है क्योंकि प्रधान प्रकृति शब्द-स्पर्श-रूप-रस-गन्धादि से संयुक्त उत्तम लिंग बताई गई है।

प्रकृतिलिंगप्रधान
शिव तत्त्व

निर्गुण शिव क्या है?

निर्गुण शिव वह अलिंग तत्त्व है जो शब्द, स्पर्श, रूप, रस, गन्ध और गुणों से रहित है।

निर्गुण शिवअलिंगपरमात्मा
शिव तत्त्व

लिंग तत्त्व क्या है?

लिंग तत्त्व प्रधान प्रकृति है, जो शब्द, स्पर्श, रूप, रस और गन्ध आदि से संयुक्त बताई गई है।

लिंग तत्त्वप्रकृतिप्रधान
शिव तत्त्व

अलिंग क्या है?

अलिंग निर्गुण ब्रह्म शिव है, जो शब्द, स्पर्श, रूप, रस और गन्ध आदि से रहित बताया गया है।

अलिंगनिर्गुण शिवनिर्गुण ब्रह्म
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा के नित्य पाठ से क्या मिलता है?

इस पवित्र आख्यान के नित्य पाठ से अपुनर्भव, यानी पुनर्जन्म से छूटने का फल बताया गया है।

नित्य पाठभागवत कथामोक्ष
श्रीमद्भागवत

गोकर्ण कथा सुनने का फल क्या है?

गोकर्ण कथा का एक अक्षर भी कानों से ग्रहण करने वालों को फिर गर्भ में नहीं आना पड़ा, ऐसा फल बताया गया है।

गोकर्ण कथाश्रवण फलपाप नाश
श्रीमद्भागवत

श्राद्ध में भागवत कथा पढ़ने का फल क्या है?

कथा में कहा गया है कि श्राद्ध में इस पवित्र आख्यान का पाठ करने से पितरों को बड़ी तृप्ति होती है।

श्राद्धभागवत कथापितृ तृप्ति
श्रीमद्भागवत

कथा सुनने से पाप कैसे जलते हैं?

भागवत सप्ताह को अग्नि के समान कहा गया है, जो मन-वचन-कर्म से हुए नए-पुराने सभी पापों को जला देता है।

कथा श्रवणपापअग्नि
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा से सबकी मुक्ति कैसे हुई?

दूसरी सप्ताह कथा के बाद भगवान प्रकट हुए और गोकर्ण की कृपा से गाँव के सभी जीव विमानों पर चढ़ाकर हरिलोक भेजे गए।

सर्वमुक्तिभागवत कथागोकर्ण
श्रीमद्भागवत

श्रावण मास में भागवत कथा का फल क्या है?

श्रावण मास में गोकर्ण ने फिर सप्ताह कथा कही; उसके बाद भगवान विमानों सहित प्रकट हुए और श्रोताओं को दिव्य गति मिली।

श्रावण मासभागवत कथासप्ताह
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा सुनने से भगवान कैसे प्रसन्न होते हैं?

कथा श्रवण से भगवान कृष्ण प्रसन्न होकर प्रकट हुए, शंख बजाया, गोकर्ण को गले लगाया और श्रोताओं को दिव्य गति दी।

भगवान कृष्णभागवत कथाश्रवण
श्रीमद्भागवत

भागवत श्रवण से गोलोक कैसे मिलता है?

श्रावण मास में पुनः भागवत सप्ताह के बाद भगवान कृष्ण प्रकट हुए और गोकर्ण सहित श्रोताओं को गोलोक-हरिलोक ले गए।

गोलोकभागवत श्रवणगोकर्ण
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा से वैकुंठ कैसे मिलता है?

धुंधुकारी के लिये वैकुंठवासी पार्षद विमान लेकर आए; उन्होंने कहा कि सही श्रवण-मनन से सबको वैकुंठ फल मिल सकता है।

वैकुंठभागवत कथाश्रवण फल
श्रीमद्भागवत

शरीर नश्वर है तो क्या करना चाहिए?

शरीर नश्वर है, इसलिए उससे अविनाशी फल कमाने के लिये भागवत कथा सुननी और हृदय में उतारनी चाहिए।

शरीर नश्वरभागवत श्रवणमुक्ति
श्रीमद्भागवत

जीवन का स्थायी फल कैसे मिले?

नश्वर शरीर से स्थायी फल पाने का मार्ग भागवत कथा श्रवण, पाप-क्षय, संशय-नाश और मुक्ति से जोड़ा गया है।

जीवनस्थायी फलभागवत कथा
श्रीमद्भागवत

शरीर को नश्वर क्यों कहा गया है?

शरीर को हड्डी, नस, मांस, रक्त, चर्म और मल-मूत्र का पात्र कहकर क्षणभंगुर और रोग-दुख से भरा बताया गया है।

शरीरनश्वरतावैराग्य
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा को तीर्थ क्यों कहा गया है?

भागवत कथा को तीर्थ कहा गया है क्योंकि वह संसार के कीचड़ को धोती है और हृदय में स्थित होकर मुक्ति देती है।

कथा तीर्थभागवत कथामुक्ति

विषय-वार प्रश्नोत्तर

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सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

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