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अर्थ प्रश्नोत्तरी — 73 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित अर्थ विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 73 प्रश्न

ध्यान अनुभव

ध्यान करते समय आँखों के सामने रंगीन प्रकाश दिखने का क्या अर्थ है?

चक्र अनुसार: लाल=मूलाधार, नारंगी=स्वाधिष्ठान, पीला=मणिपुर/आत्मा, हरा=अनाहत, नीला=आज्ञा/जीवात्मा, सफेद=सहस्रार।: 'अंधेरा→रंगीन→सफेद = प्रगति।' साक्षी बनें।

ध्यानरंगीनप्रकाश
श्रीमद्भागवत

पैसा किसलिए कमाना चाहिए?

अर्थ को धर्म के लिये बताया गया है; धन का फल भोग-विलास नहीं, और भोग का उद्देश्य केवल जीवन-निर्वाह है।

धनअर्थधर्म
अविद्या

तम, मोह, महामोह, तामिस्र और अन्धतामिस्र का अर्थ क्या है?

तम का अर्थ अज्ञान, महामोह का अर्थ भोगेच्छा, तामिस्र का अर्थ क्रोध और अन्धतामिस्र का अर्थ अभिनिवेश बताया गया है।

तममोहमहामोह
श्रीमद्भागवत

भागवत सप्ताह से कौन से फल मिलते हैं?

विधिपूर्वक सप्ताह करने से पाप निवृत्ति, तत्काल फल और धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष चारों की प्राप्ति कही गई है।

भागवत सप्ताह फलधर्मअर्थ
लोक

क्षीरसागर का मतलब क्या है?

क्षीरसागर सृष्टि के कारण-जल और अव्यक्त चेतना का प्रतीक है।

क्षीरसागरअर्थकारण जल
लोक

वैकुण्ठ का अर्थ क्या है?

वैकुण्ठ वह धाम है जहाँ कोई कुंठा या भय नहीं होता।

वैकुण्ठअर्थभक्ति
मातामह श्राद्ध

दौहित्र का अर्थ क्या है?

दौहित्र का अर्थ = 'पुत्री का पुत्र' (नाती)। माता के पिता (नाना) के दृष्टिकोण से = बेटी का बेटा। दौहित्र को नाना-नानी का श्राद्ध करने का विशिष्ट शास्त्रीय अधिकार है। याज्ञवल्क्य स्मृति: पौत्र और दौहित्र दोनों समान रूप से पूर्वजों को नरक से तार सकते हैं।

दौहित्रनातीपुत्री का पुत्र
मातामह श्राद्ध

मातामह का अर्थ क्या है?

मातामह का अर्थ = 'नाना' (माता के पिता)। संस्कृत शब्द — 'माता+महः'। दौहित्र (पुत्री के पुत्र) के दृष्टिकोण से मातृकुल के सर्वोच्च पुरुष पूर्वज। मातामह श्राद्ध = नाना का श्राद्ध, प्रतिपदा तिथि पर।

मातामहनानाअर्थ
श्राद्ध परिचय

श्राद्ध शब्द का अर्थ क्या है?

'श्रद्धया दीयते यस्मात् तत् श्राद्धम्' = श्रद्धा से जो दिया जाए वही श्राद्ध। पितरों को अन्न/जल/पिण्ड/तर्पण श्रद्धा-आस्तिकता से अर्पण = श्राद्ध। मूल तत्त्व 'श्रद्धा' है।

श्राद्धव्युत्पत्तिअर्थ
श्राद्ध परिचय

श्राद्ध क्या होता है?

श्राद्ध = पितरों के लिए श्रद्धापूर्वक अन्न, जल, पिण्ड, तर्पण अर्पण। 'श्रद्धया दीयते यस्मात् तत् श्राद्धम्'। तीन ऋणों (देव, ऋषि, पितृ) में से पितृ ऋण से मुक्ति का एकमात्र शास्त्र-सम्मत मार्ग। सनातन धर्म का सबसे पवित्र अनुष्ठान।

श्राद्धपरिभाषाअर्थ
लोक

जनलोक का अर्थ क्या होता है?

जनलोक का नाम 'जन' शब्द से जुड़ा है, जिसका अर्थ उत्पत्ति, प्रजा और सृजनकर्ता सत्ताओं से है।

जनलोकजनअर्थ
लोक

तपोलोक का अर्थ क्या होता है?

तपोलोक का अर्थ है तपस्या का लोक या तपस्वियों का संसार।

तपोलोकअर्थतपस्या
मंदिर ज्ञान

मंदिर में तोरण बांधने का क्या अर्थ होता है?

स्वागत (देवता+भक्त), शुभता (आम=सदाबहार), रक्षा (नकारात्मकता नहीं), ऊर्जा (ऑक्सीजन), उत्सव। 'तोरणं मंगलं विद्यात्'। आम पत्ता सर्वप्रचलित।

तोरणबांधनाअर्थ
रुद्राभिषेक के मंत्र

रुद्र मंत्र 'ॐ नमो भगवते रुद्राय' का क्या अर्थ है?

'ॐ नमो भगवते रुद्राय' का अर्थ है 'मैं पवित्र रुद्र को नमन करता हूँ' — यह रुद्र का सीधा आह्वान मंत्र है जो अभिषेक के दौरान जपा जाता है।

रुद्र मंत्रॐ नमो भगवते रुद्रायअर्थ
अर्धनारीश्वर स्वरूप और दर्शन

अर्धनारीश्वर का क्या अर्थ है?

अर्धनारीश्वर का अर्थ है — पुरुष (शिव/चेतना) और प्रकृति (शक्ति/ऊर्जा) का शाश्वत, अविभाज्य एकत्व, जो सृष्टि की पूर्णता का प्रतीक है।

अर्धनारीश्वरअर्थशिव शक्ति
रामचरितमानस — बालकाण्ड

'योगाग्नि' से शरीर त्यागने का क्या अर्थ है?

'योगाग्नि' = योगशक्ति से प्रकट आन्तरिक दिव्य अग्नि। यह बाहरी आग नहीं, बल्कि प्राणशक्ति और योगसाधना से शरीर के भीतर अग्नि तत्व जाग्रत करना है। यह इच्छामृत्यु का उच्चतम रूप है जो केवल सिद्ध योगी कर सकते हैं।

बालकाण्डयोगाग्निअर्थ
जीवन एवं मृत्यु

प्रेत शब्द का अर्थ क्या है?

'प्रेत' = 'प्र + इत' = 'आगे गया हुआ।' यह मृत व्यक्ति की आत्मा का नाम है। गरुड़ पुराण में वह आत्मा जो मृत्यु के बाद श्राद्ध-संस्कार की प्रतीक्षा में है — वह प्रेत कहलाती है।

प्रेतअर्थव्युत्पत्ति
भक्ति एवं आध्यात्म

चार पुरुषार्थ क्या हैं?

धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष — ये चार पुरुषार्थ हैं। धर्म नींव है, अर्थ-काम जीवन के साधन हैं, और मोक्ष — जन्म-मरण से मुक्ति — परम लक्ष्य है।

पुरुषार्थधर्मअर्थ
भक्ति एवं पूजा

सच्ची भक्ति क्या होती है

बिना शर्त प्रेम। नवधा भक्ति (श्रवण→आत्मनिवेदन)। कुछ न मांगना, कृतज्ञता, सुख-दुख समान, दिखावा नहीं, सेवा में भगवान। मीरा/हनुमान/प्रह्लाद। गीता: ज्ञानी+प्रेमी दोनों प्रिय।

भक्तिसच्चीअर्थ
महिला एवं धर्म

16 श्रृंगार कौन से आध्यात्मिक अर्थ

16 श्रृंगार = 16 ऊर्जा बिंदु। बिंदी=आज्ञा, सिंदूर=सहस्रार, नथ=प्राण, हार=अनाहत, चूड़ी=नाड़ी, बिछिया=प्रजनन, पायल=रक्त। सौंदर्य+स्वास्थ्य+आध्यात्मिकता।

सोलह श्रृंगारआध्यात्मिकअर्थ
महिला एवं धर्म

मंगलसूत्र पहनने का आध्यात्मिक अर्थ

मंगल (शुभ)+सूत्र (बंधन)। दो मोती=शिव-शक्ति। सोना=अनाहत चक्र। काला=नकारात्मकता रक्षा। पति बंधन प्रतीक। दक्षिण='ताली'। आधुनिक: सम्मान+आस्था; बाध्यता नहीं।

मंगलसूत्रआध्यात्मिकविवाह
ज्योतिष दोष एवं उपाय

ज्योतिष में दशा अंतर्दशा अर्थ

दशा=ग्रह शासनकाल (विंशोत्तरी 120 वर्ष)। शनि=19, राहु=18, बुध=17, गुरु=16, शुक्र=20 वर्ष। महादशा>अंतर्दशा>प्रत्यंतर्दशा। शुभ ग्रह=अच्छा; अशुभ=कठिनाई।

दशाअंतर्दशाविंशोत्तरी
मंत्र

महामृत्युंजय मंत्र का शब्दशः अर्थ क्या है

ऋग्वेद 7.59.12: 'हम तीन नेत्रधारी (शिव), सुगंधित, पोषक की पूजा करते हैं। जैसे पका फल डंठल से स्वतः मुक्त हो, वैसे हमें मृत्यु से मुक्त करें, अमृत (मोक्ष) दें।' प्रतीक: मृत्यु = प्राकृतिक, कष्टरहित (पके फल जैसी)। दीर्घायु और मोक्ष का सर्वशक्तिमान मंत्र।

महामृत्युंजयशिवमंत्र
हिंदू दर्शन

धर्म अर्थ काम मोक्ष चार पुरुषार्थ क्या हैं

चार पुरुषार्थ: धर्म (कर्तव्य/नैतिकता — आधार), अर्थ (धर्मपूर्वक धन — साधन), काम (धर्मयुक्त इच्छापूर्ति — सुख), मोक्ष (जन्म-मृत्यु से मुक्ति — परम लक्ष्य)। मनुस्मृति — धर्म के 10 लक्षण। कौटिल्य — 'अर्थ का मूल धर्म'। चारों में संतुलन = सार्थक जीवन।

पुरुषार्थधर्मअर्थ

विषय-वार प्रश्नोत्तर

🙏पूजा विधि📿मंत्र जाप विधि🔱शिव पूजा🔮तंत्र साधना🏠वास्तु शास्त्र💭सपनों का मतलब🪐ज्योतिष उपाय🙏व्रत उपवास🔥देवी पूजा🧘ध्यान साधना🛕तीर्थ यात्रा🔥हवन यज्ञ📜स्तोत्र पाठ🐘गणेश पूजा🙏विष्णु भक्ति📖सनातन दर्शन🕯️श्राद्ध पितृ कर्म🎗️संस्कार विधि❤️भक्ति साधनाधार्मिक उपाय

सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

पौराणिक प्रश्नोत्तरी पर आपको हिंदू धर्म, वेद, पुराण, भगवद गीता, रामायण, महाभारत, पूजा विधि, व्रत-त्योहार, मंत्र, देवी-देवताओं और सनातन संस्कृति से जुड़े सैकड़ों प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर शास्त्रों और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत, प्रमाणित उत्तर पढ़ें।