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नारद प्रश्नोत्तरी — 44 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित नारद विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 44 प्रश्न

लोक

नारद जी ने पाताल लोकों के बारे में क्या कहा?

नारद जी ने कहा कि पाताल लोक स्वर्ग से भी अधिक सुंदर और श्रेष्ठ हैं।

नारदपाताल लोकस्वर्ग से सुंदर
लोक

वितल लोक स्वर्ग से भी सुंदर क्यों माना गया है?

वितल लोक स्वर्ग से सुंदर माना गया है क्योंकि नारद जी ने पाताल लोकों के ऐश्वर्य, रत्न, संगीत और सौंदर्य को स्वर्ग से श्रेष्ठ बताया।

वितल स्वर्ग से सुंदरनारदबिल-स्वर्ग
लोक

नारद जी ने पाताल लोकों को स्वर्ग से सुंदर क्यों कहा?

नारद जी ने पाताल लोकों को स्वर्ग से सुंदर कहा क्योंकि वहाँ का सौंदर्य, संपदा और वास्तुकला देवताओं के स्वर्ग से अधिक ऐश्वर्यशाली है।

नारदपाताल लोकस्वर्ग से सुंदर
लोक

सुतल लोक का सौंदर्य स्वर्ग से अधिक क्यों है?

सुतल लोक स्वर्ग से अधिक सुंदर है क्योंकि उसके महल, रत्न, उद्यान, नदियाँ, सरोवर और प्राकृतिक सौंदर्य देवताओं के स्वर्ग से भी श्रेष्ठ बताए गए हैं।

सुतल सौंदर्यस्वर्ग से श्रेष्ठनारद
लोक

सुतल लोक स्वर्ग से बेहतर क्यों माना जाता है?

सुतल लोक स्वर्ग से बेहतर माना गया है क्योंकि इसका ऐश्वर्य, सौंदर्य, वास्तुकला और सुख-सुविधाएँ इन्द्र के स्वर्ग से भी अधिक बताई गई हैं।

सुतल लोक स्वर्ग से श्रेष्ठबिल-स्वर्गनारद
लोक

नारद जी ने पाताल लोकों के बारे में क्या कहा?

नारद जी ने कहा कि पाताल लोक इन्द्र के स्वर्ग से भी अधिक सुंदर और मनोरम हैं।

नारदपाताल लोकतलातल
लोक

तलातल लोक स्वर्ग से भी सुंदर क्यों माना गया है?

तलातल मय दानव की मायावी वास्तुकला, रत्नमय महलों, उद्यानों और सरोवरों के कारण स्वर्ग से भी सुंदर माना गया है।

तलातल स्वर्ग से सुंदरनारदइन्द्र स्वर्ग
लोक

देवर्षि नारद ने अतल लोक के बारे में क्या कहा?

विष्णु पुराण में नारद जी ने देव-सभा में कहा कि पाताल लोक का सौंदर्य और ऐश्वर्य इंद्र के स्वर्ग से भी अधिक आनंददायक है।

नारदस्वर्गअतल लोक
लोक

नारद जी ने अतल लोक के बारे में क्या कहा?

नारद जी ने स्वर्ग की सभा में कहा कि पाताल का सौंदर्य और ऐश्वर्य इंद्र के स्वर्ग से भी अधिक आनंददायक है। उन्होंने रंग-बिरंगी भूमि, रत्न-महल और मधुर संगीत का वर्णन किया।

नारदअतल लोकस्वर्ग
लोक

अतल लोक स्वर्ग से बेहतर है क्या?

हाँ, नारद जी ने कहा कि पाताल का सौंदर्य स्वर्ग से भी अधिक आनंददायक है। पर यह केवल भौतिक सुख है — यहाँ आध्यात्मिक ज्ञान नहीं है।

अतल लोकस्वर्गबेहतर
लोक

अतल लोक की भूमि कैसी है?

अतल लोक की भूमि सात रंगों की है — सफेद, काली, लाल, पीली, रेतीली, पथरीली और स्वर्णमयी। यहाँ के महल रत्नों और मणियों से बने हैं।

अतल लोकभूमिरंग
रामचरितमानस — बालकाण्ड

अभिमान का परिणाम — नारद प्रसंग से शिक्षा?

नारद — अभिमान किया, वानर-मुख मिला, अपमान, शाप दिया, पश्चाताप। शिक्षा — अभिमान सबसे बड़ा शत्रु, सब उपलब्धि ईश्वर कृपा।

बालकाण्डअभिमाननारद
रामचरितमानस — बालकाण्ड

भगवान ने नारदजी के शाप को कैसे स्वीकार किया?

भगवान ने शाप प्रसन्नतापूर्वक सिर पर चढ़ाया — यह उनकी लीला-योजना का अंश था। नारदजी के पश्चाताप पर कहा — सब मेरी इच्छा से हुआ, चिन्ता मत करो। शंकर शतनाम जपो, शान्ति मिलेगी। 'कोउ नहीं सिव समान प्रिय मोरें' — शिवजी के समान मुझे कोई प्रिय नहीं।

बालकाण्डभगवानशाप स्वीकार
रामचरितमानस — बालकाण्ड

नारदजी को स्वयंवर में किसका मुख मिला?

वानर (बन्दर) का मुख मिला। शिवगणों ने मुस्कुराकर कहा — दर्पण में मुँह देखो। नारदजी ने जल में झाँककर बन्दर का मुख देखा तो क्रोध से भर गये और शिवगणों को शाप दिया — 'होहु निसाचर' (राक्षस हो जाओ)।

बालकाण्डवानर मुखनारद
रामचरितमानस — बालकाण्ड

नारदजी ने भगवान विष्णु से सुन्दर रूप का वरदान माँगा तो भगवान ने क्या किया?

नारदजी ने 'हरि रूप' माँगा — भगवान ने 'हरि' = वानर (बन्दर) का मुख दे दिया। 'हरि' शब्द का दोहरा अर्थ — विष्णु भी, वानर भी। भगवान ने मुनि के कल्याण (अभिमान तोड़ने) के लिये कुरूप बनाया पर माया से किसी को पता नहीं चला।

बालकाण्डहरि रूपवानर मुख
रामचरितमानस — बालकाण्ड

शिवजी ने नारदजी को अभिमान करने से क्यों मना किया?

शिवजी जानते थे कि काम-विजय भगवान की कृपा से हुई, नारदजी की अपनी शक्ति नहीं। भगवान की माया प्रचण्ड है — किसी को भी मोहित कर सकती है। अभिमान करने पर माया का शिकार होना निश्चित था, इसलिये शिवजी ने बरज (मना) दिया।

बालकाण्डशिव चेतावनीनारद
रामचरितमानस — बालकाण्ड

नारदजी ने कामदेव को जीतने के बाद किससे अपनी विजय का वर्णन किया?

नारदजी ने पहले शिवजी को (जिन्होंने मना किया था) और फिर भगवान विष्णु को क्षीरसागर में जाकर काम-विजय का पूरा वृत्तान्त सुनाया। यद्यपि शिवजी ने पहले से बरज रखा था कि यह बात किसी से न कहना।

बालकाण्डनारदकाम विजय
रामचरितमानस — बालकाण्ड

नारदजी ने माता मैना को कैसे समझाया?

पहले पार्वतीजी ने माता को समझाया — 'जो विधाता रच दे वह नहीं टलता, दोष किसी को मत दो।' फिर नारदजी ने आकर सबको समझाया कि शिवजी स्वयं भगवान हैं। शिवजी ने सुन्दर रूप धारण किया तो सब प्रसन्न हुए।

बालकाण्डनारदमैना
रामचरितमानस — बालकाण्ड

नारदजी ने पार्वतीजी का हाथ देखकर क्या भविष्यवाणी की?

नारदजी ने कहा — (1) सब गुणों की खान, सुन्दर, सुशील, (2) पति को सदा प्यारी, सुहाग अचल, (3) जगत में पूज्य होगी। परन्तु एक दोष बताया — वर निर्गुण, निलज, कुबेष, अकुल, अगेह, दिगम्बर होगा — जो शिवजी के ही लक्षण हैं।

बालकाण्डनारदभविष्यवाणी
भक्ति दर्शन

हिंदू धर्म में भक्ति क्या है?

भक्ति ईश्वर के प्रति परम, निष्काम प्रेम है। भागवत पुराण में प्रह्लाद द्वारा बताई नवधा भक्ति — श्रवण, कीर्तन, स्मरण, पाद-सेवन, अर्चन, वंदन, दास्य, सख्य और आत्म-निवेदन — भक्ति के नौ रूप हैं।

भक्तिप्रेमउपासना

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सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

पौराणिक प्रश्नोत्तरी पर आपको हिंदू धर्म, वेद, पुराण, भगवद गीता, रामायण, महाभारत, पूजा विधि, व्रत-त्योहार, मंत्र, देवी-देवताओं और सनातन संस्कृति से जुड़े सैकड़ों प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर शास्त्रों और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत, प्रमाणित उत्तर पढ़ें।