विस्तृत उत्तर
नारदजी ने भगवान से कहा कि मुझे आपका 'हरि' रूप दे दीजिये। भगवान ने मुनिके कल्याण के लिये उन्हें वानर (बन्दर) का मुख दे दिया।
चौपाई — 'मुनि हित कारन कृपानिधाना। दीन्ह कुरूप न जाइ बखाना। सो चरित्र लखि काहुँ न पावा। नारद जानि सबहिं सिर नावा॥'
अर्थ — कृपानिधान भगवानूने मुनिके कल्याणके लिये उन्हें ऐसा कुरूप बना दिया कि जिसका वर्णन नहीं हो सकता; पर यह चरित्र कोई भी न जान सका। सबने उन्हें नारद ही जानकर प्रणाम किया।
भगवान ने 'हरि' शब्द का दोहरा अर्थ प्रयोग किया — नारदजी ने 'हरि' का अर्थ भगवान विष्णु (सुन्दर) समझा, पर भगवान ने 'हरि' = वानर (बन्दर) का रूप दे दिया। एक बीमार व्यक्ति कुपथ्य माँगे तो वैद्य उसे नहीं देता — इसी प्रकार भगवान ने नारदजी का हित करते हुए उनका अभिमान तोड़ने के लिये ऐसा किया।





