विस्तृत उत्तर
विष्णु पुराण में वर्णित है कि एक बार देवर्षि नारद पाताल लोकों (अतल आदि) का भ्रमण करके स्वर्ग लौटे। स्वर्ग की देव-सभा में उन्होंने उद्घोष किया कि पाताल लोक का सौंदर्य और ऐश्वर्य इंद्र के स्वर्ग से भी कहीं अधिक आनंददायक और श्रेष्ठ है। श्रीमद्भागवत महापुराण और विष्णु पुराण में इन सात अधोलोकों को बिल-स्वर्ग कहा गया है और यहाँ के निवासियों का जीवन देवराज इंद्र के स्वर्गलोक से भी अधिक सुखमय, समृद्ध और विलासितापूर्ण बताया गया है। परंतु यहाँ का सुख केवल भौतिक है — यहाँ के निवासियों में आध्यात्मिक चेतना और आत्मज्ञान का नितांत अभाव होता है।
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