ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण

पार्वती प्रश्नोत्तरी — 44 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित पार्वती विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 44 प्रश्न

पुराणों में अर्धनारीश्वर का प्राकट्य

ऋषि भृंगी ने पार्वती की पूजा क्यों नहीं की?

ऋषि भृंगी केवल शिव के भक्त थे और शिव-शक्ति में भेद मानते थे, इसीलिए उन्होंने पार्वती की पूजा से इनकार किया।

ऋषि भृंगीपार्वतीशिव भक्त
पुराणों में अर्धनारीश्वर का प्राकट्य

पार्वती ने महादेव से क्या इच्छा प्रकट की थी?

पार्वती ने महादेव से 'अंग से अंग' मिलाकर हमेशा के लिए साथ रहने की इच्छा प्रकट की थी, जिससे अर्धनारीश्वर स्वरूप का प्राकट्य हुआ।

पार्वतीमहादेवभक्ति
पुराणों में अर्धनारीश्वर का प्राकट्य

स्कंदपुराण में अर्धनारीश्वर रूप कैसे प्रकट हुआ?

स्कंदपुराण के अनुसार, पार्वती ने शिव से 'अंग से अंग' मिलाकर रहने की इच्छा प्रकट की — उनकी इस परम भक्ति और प्रेम से अर्धनारीश्वर रूप का प्राकट्य हुआ।

स्कंदपुराणअर्धनारीश्वरपार्वती
रामचरितमानस — बालकाण्ड

तपस्या और दृढ़ संकल्प की शिक्षा — पार्वती प्रसंग से?

'जन्म कोटि लगि रगर हमारी' — करोड़ जन्म हठ, सप्तर्षियों की परीक्षा में अडिग। शिक्षा — दृढ़ संकल्प से असम्भव भी सम्भव।

बालकाण्डतपस्यादृढ़ संकल्प
रामचरितमानस — बालकाण्ड

'गिरिजा' कौन हैं?

पार्वतीजी — गिरि (पर्वत/हिमवान) की पुत्री। 'सुनु गिरिजा हरिचरित सुहाए।' अन्य नाम — उमा, भवानी, अम्बिका, गौरी, शैलकुमारी, अपर्णा।

बालकाण्डगिरिजापार्वती
रामचरितमानस — बालकाण्ड

सीताजी ने पार्वती पूजन में क्या-क्या अर्पित किया?

मानस में विस्तृत सामग्री वर्णन संक्षिप्त है। सीताजी ने पार्वतीजी के मन्दिर में चरणों में वन्दना की, हाथ जोड़कर स्तुति की, और प्रेमपूर्वक पूजन किया। मुख्य भाव — हृदय से प्रार्थना और मनोरथ निवेदन।

बालकाण्डसीता पूजनपार्वती
रामचरितमानस — बालकाण्ड

सीताजी ने माता पार्वती से कैसा वर माँगा?

सीताजी ने सीधे शब्दों में नहीं कहा — 'मोर मनोरथु जानहु नीकें' — मेरा मनोरथ आप जानती हैं। नारदजी के वचन स्मरण कर मन में पवित्र प्रीति जागी — रामजी उनके वर बनें, यही हृदय भाव से प्रार्थना।

बालकाण्डसीतापार्वती
रामचरितमानस — बालकाण्ड

शिवजी ने राम अवतार के कितने कारण बताये?

शिवजी ने अनेक कारण बताये पर कहा — 'इदमित्थं कहि जाइ न सोई' — निश्चित संख्या नहीं कही जा सकती। प्रमुख कारण — धर्म हानि, जय-विजय शाप, नारद शाप, मनु-शतरूपा वरदान, प्रतापभानु कथा, भक्त प्रेम। कारण अनन्त हैं।

बालकाण्डअवतार कारण संख्याशिवजी
रामचरितमानस — बालकाण्ड

सप्तर्षियों ने परीक्षा उत्तीर्ण होने पर पार्वतीजी को क्या आशीर्वाद दिया?

सप्तर्षि बोले — 'जय जय जगदंबिके भवानी!' — आप माया हैं, शिवजी भगवान हैं, आप दोनों जगत के माता-पिता हैं। मुनि पार्वतीजी के चरणों में सिर नवाकर बार-बार पुलकित होते हुए चले गये।

बालकाण्डसप्तर्षि आशीर्वादपार्वती
रामचरितमानस — बालकाण्ड

पार्वतीजी ने 'अपर्णा' नाम कैसे पाया?

'अपर्णा' = अ (बिना) + पर्णा (पत्ते) = पत्तों के बिना रहने वाली। जब पार्वतीजी ने तपस्या में सूखे पत्ते खाना भी छोड़ दिया, तब उनका नाम 'अपर्णा' पड़ा। चौपाई — 'पुनि परिहरे सुखानेउ परना। उमहि नामु तब भयउ अपरना॥'

बालकाण्डअपर्णापार्वती
रामचरितमानस — बालकाण्ड

नारदजी ने पार्वतीजी का हाथ देखकर क्या भविष्यवाणी की?

नारदजी ने कहा — (1) सब गुणों की खान, सुन्दर, सुशील, (2) पति को सदा प्यारी, सुहाग अचल, (3) जगत में पूज्य होगी। परन्तु एक दोष बताया — वर निर्गुण, निलज, कुबेष, अकुल, अगेह, दिगम्बर होगा — जो शिवजी के ही लक्षण हैं।

बालकाण्डनारदभविष्यवाणी
रामचरितमानस — बालकाण्ड

नारदजी हिमवान के घर क्यों आये?

नारदजी ने पार्वतीजी के जन्म के समाचार सुनकर कौतुकवश हिमवान के घर आये। पर्वतराज ने बड़ा आदर किया। नारदजी ने पार्वतीजी का हाथ देखकर भविष्यवाणी की और शिवजी प्राप्ति के लिये तपस्या का उपाय बताया।

बालकाण्डनारदजीहिमवान
पौराणिक कथाएँ

कामदेव को शिव ने क्यों भस्म किया?

देवों के आग्रह पर कामदेव ने तारकासुर वध के लिए शिव की तपस्या भंग करने हेतु पुष्प बाण चलाया। क्रोधित शिव ने तीसरा नेत्र खोलकर कामदेव को भस्म कर दिया। तभी से वे 'अनंग' (शरीर रहित) कहलाए।

कामदेवशिवभस्म
शिव

शीघ्र विवाह के लिए भगवान शिव का कौन सा मंत्र जपना चाहिए

विवाह हेतु 'ॐ साम्ब सदाशिवाय नमः' मंत्र और सोमवार के दिन शिव-पार्वती की विधिवत पूजा फलदायी होती है।

विवाहशिव मंत्रपार्वती
महिला एवं धर्म

पार्वती माता तप से स्त्रियां क्या सीखें

दृढ़ संकल्प (मना करने पर भी), आत्म-सम्मान (अपमान सहन नहीं), कठिन परिश्रम (शॉर्टकट नहीं), प्रेम+शक्ति संतुलन, नई शुरुआत। पार्वती=बेटी+तपस्विनी+पत्नी+माता+योद्धा।

पार्वतीतपस्त्री
व्रत

हरतालिका तीज व्रत कैसे रखें विधि सहित

हरतालिका तीज: भाद्रपद शुक्ल तृतीया। निर्जला व्रत (जल भी वर्जित)। बालू से शिव-पार्वती प्रतिमा → षोडशोपचार पूजा → कथा श्रवण → रात्रि जागरण → अगले दिन पारण। कथा: पार्वती ने शिव प्राप्ति हेतु किया। सौभाग्य, मनचाहा वर।

हरतालिकातीजपार्वती
पौराणिक कथा

गणेश जी की कथा क्या है?

गणेश जी का जन्म माता पार्वती ने अपने शरीर के मैल से किया। शिव जी ने अनजाने में उनका सिर काट दिया, फिर हाथी का सिर लगाकर पुनर्जीवित किया और 'प्रथम पूज्य' घोषित किया। माता-पिता की परिक्रमा से प्रथम पूज्य का वरदान मिला। परशुराम से युद्ध में एक दाँत टूटने से 'एकदंत' नाम पड़ा।

गणेश कथाजन्म कथाहाथी का सिर
शिव लीला

पार्वती ने शिव की आँखें क्यों ढक दी थीं और उससे क्या हुआ?

पार्वती ने शिव की आँखें खेल-भाव से ढकी थीं। इससे पूरे जगत में घोर अंधकार हो गया। सृष्टि बचाने के लिए शिव ने तीसरा नेत्र खोला। उसकी उष्मा से पार्वती के पसीने की बूँदों से एक भयंकर बालक 'अंधक' प्रकट हुआ।

पार्वतीशिव आँखेंअंधकार
शिव महिमा

पार्वती ने शिव का गला क्यों दबाया जब वे विष पी रहे थे?

माता पार्वती ने शिव का गला इसलिए दबाया ताकि विष उदर में न जाए — क्योंकि शिव के भीतर सम्पूर्ण सृष्टि है और विष वहाँ पहुँचता तो सृष्टि नष्ट हो जाती। माता की शक्ति ने विष को कंठ में ही स्थिर रखा।

पार्वतीशिव विषपानगला दबाया
शिव महिमा

शिव ने हलाहल विष को गले में क्यों रोका, नीचे क्यों नहीं उतरने दिया?

शिव के भीतर समस्त सृष्टि समाहित है — विष उदर में जाता तो सृष्टि नष्ट हो जाती। माता पार्वती ने गला दबाकर विष को कंठ में ही रोक दिया। इससे शिव जी का कंठ नीला पड़ गया और वे 'नीलकंठ' कहलाए।

हलाहलशिव गलानीलकंठ

विषय-वार प्रश्नोत्तर

🙏पूजा विधि📿मंत्र जाप विधि🔱शिव पूजा🔮तंत्र साधना🏠वास्तु शास्त्र💭सपनों का मतलब🪐ज्योतिष उपाय🙏व्रत उपवास🔥देवी पूजा🧘ध्यान साधना🛕तीर्थ यात्रा🔥हवन यज्ञ📜स्तोत्र पाठ🐘गणेश पूजा🙏विष्णु भक्ति📖सनातन दर्शन🕯️श्राद्ध पितृ कर्म🎗️संस्कार विधि❤️भक्ति साधनाधार्मिक उपाय

सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

पौराणिक प्रश्नोत्तरी पर आपको हिंदू धर्म, वेद, पुराण, भगवद गीता, रामायण, महाभारत, पूजा विधि, व्रत-त्योहार, मंत्र, देवी-देवताओं और सनातन संस्कृति से जुड़े सैकड़ों प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर शास्त्रों और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत, प्रमाणित उत्तर पढ़ें।