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शिव पुराण प्रश्नोत्तरी — 93 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित शिव पुराण विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 93 प्रश्न

लोक

भस्मासुर कथा के दो संस्करण क्यों मिलते हैं?

दो संस्करण इसलिए मिलते हैं क्योंकि भागवत में ब्रह्मचारी रूप है, जबकि लोकपरंपरा में मोहिनी रूप अधिक प्रसिद्ध हुआ।

कथा संस्करणश्रीमद्भागवतशिव पुराण
लोक

भस्मासुर कथा शिव पुराण में कैसे आती है?

शिव पुराण और लोकपरंपरा में भस्मासुर कथा प्रायः मोहिनी रूप और नृत्य प्रसंग के साथ सुनाई जाती है।

शिव पुराणभस्मासुरमोहिनी
लोक

शिव पुराण में अधोलोकों का वर्णन कैसे है?

शिव पुराण में अधोलोकों को अतल, वितल, सुतल, रसातल, तल, तलातल और पाताल के रूप में बताया गया है।

शिव पुराणउमा संहिताअधोलोक
लोक

वायु पुराण और शिव पुराण में महातल का क्या वर्णन है?

वायु पुराण में महातल में हिरण्याक्ष और किर्मीर के नगर बताए गए हैं, जबकि शिव पुराण में इसे तल या महातल कहा गया है।

वायु पुराणशिव पुराणमहातल
लोक

महातल लोक का धरातल कैसा बताया गया है?

महातल का धरातल स्वर्ण और मणियों से जटित, अत्यंत भव्य और विलासी बताया गया है।

महातल धरातलमणि जटितस्वर्ण
लोक

शिव पुराण में रसातल से कौन जुड़े हैं?

शिव पुराण में तारकासुर और उसके वंशजों को रसातल के विशिष्ट क्षेत्रों से जोड़ा गया है।

शिव पुराणरसातलतारकासुर
लोक

शिव पुराण के अनुसार वैराज देवगण अमूर्त क्यों कहे गए हैं?

क्योंकि वैराज देवगणों का स्थूल पाञ्चभौतिक शरीर नहीं होता; वे अशरीरी चेतनामय स्वरूप हैं।

शिव पुराणवैराजअमूर्त
लोक

शिव पुराण में तपोलोक की दूरी क्या बताई गई है?

शिव पुराण में तपोलोक जनलोक से आठ लाख योजन और सत्यलोक से अड़तालीस करोड़ योजन दूर बताया गया है।

शिव पुराणतपोलोक दूरीजनलोक
लोक

वैराज देवगणों का शरीर कैसा होता है?

वैराज देवगणों का स्थूल शरीर नहीं होता; वे अमूर्त, अशरीरी, चेतनामय और ज्ञान-स्वरूप होते हैं।

वैराज शरीरअमूर्तअशरीरी
लोक

शिव पुराण में सृष्टि के आरंभ में ब्रह्मा जी पर अविद्या का प्रभाव क्या दर्शाता है?

शिव पुराण का यह प्रसंग दर्शाता है — सृष्टि की इच्छा भी अविद्या है। सत्यलोक में भी जब तक सृष्टि-इच्छा है तब तक माया का सूक्ष्म प्रभाव रहता है। तप और शिव-कृपा से ही इसे पार किया जा सकता है।

शिव पुराणब्रह्माअविद्या
लोक

शिव पुराण में सत्यलोक का क्या वर्णन है?

शिव पुराण में ब्रह्मा जी शिव की आज्ञा से सत्यलोक में हैं। यहाँ सृष्टि के आरंभ में अविद्या के पाँच आवरण का प्रसंग और तपोलोक से 84,000 योजन की दूरी का उल्लेख है।

शिव पुराणसत्यलोकब्रह्मा
लोक

विभिन्न पुराणों में अतल लोक के वर्णन में क्या अंतर है?

भागवत माया-हाटक रस पर, वायु पुराण निवासियों पर, गरुड़ पुराण कामुकता पर, शिव पुराण पूर्वजन्म के तप पर और मार्कंडेय असुरों के विश्राम पर केंद्रित है।

विभिन्न पुराणअंतरभागवत
लोक

शिव पुराण में अतल लोक का क्या वर्णन है?

शिव पुराण के अनुसार अतल लोक के निवासियों को यह भोग-विलास उनके पूर्वजन्म की कठोर तपस्या के कारण मिला है। यहाँ श्रेष्ठ भोजन, संगीत और असीमित विलासिता है।

शिव पुराणअतल लोकतपस्या
पूर्णाहुति और समापन

हवन की भस्म धारण करने से क्या फायदा है?

हवन की भस्म = अभेद्य रक्षा-कवच। यह मानव शरीर के अंतिम सत्य (राख) का प्रतीक। शिव पुराण: नित्य भस्म धारण करने वाले को संपूर्ण तीर्थों और यज्ञों का फल स्वतः प्राप्त होता है।

भस्म धारण फायदारक्षा कवचतीर्थ फल
व्रत-पूर्व तैयारी

नहाए बिना पूजा कैसे करें — मंत्र स्नान क्या है?

शिव पुराण: 'आपोहिष्ठा' मंत्र की तीन ऋचाएं पढ़ते हुए क्रमशः पैर-मस्तक-हृदय पर जल छिड़कें। यह मंत्र स्नान पूर्ण शारीरिक स्नान का विकल्प है। इसके बाद तीन बार आचमन करें।

मंत्र स्नानआपोहिष्ठाबिना नहाए पूजा
कार्तिकेय और गणेश जन्म

शिव पुराण के अनुसार गणेश का जन्म कैसे हुआ?

शिव पुराण: पार्वती ने उबटन से बालक बनाया → शिव रोके गए → शिव ने मस्तक काटा → पार्वती का क्रोध → नंदी हाथी का सिर लाए → शिव ने जोड़कर जीवित किया और 'गणपति' नाम दिया। हाथी मस्तक = परम ज्ञान, पूर्व मस्तक = अहंकार नाश।

गणेश जन्मशिव पुराणउबटन
जप संख्या

शिव पुराण के अनुसार 5 लाख और 10 लाख जप से क्या होता है?

शिव पुराण (2.1.14): 5 लाख जप = भगवान शिव के प्रत्यक्ष दर्शन और समस्त कामनाएं पूर्ण; 10 लाख जप = अकल्पनीय पुण्य। कलियुग में 5 लाख (चार गुना) जप अनुशंसित, सवा लाख न्यूनतम प्रामाणिक संख्या।

5 लाख जप10 लाख जपशिव दर्शन
महामृत्युंजय मंत्र परिचय

शुक्राचार्य और महामृत्युंजय मंत्र का क्या संबंध है?

शिव पुराण सती खंड: शुक्राचार्य ने कठोर तपस्या से शिव से 'मृत-संजीवनी विद्या' प्राप्त की — इससे वे देवासुर संग्राम में मृत असुर सैनिकों को पुनः जीवित करते थे।

शुक्राचार्यमृत संजीवनी विद्याअसुर
108 मनकों का रहस्य

शिव पुराण में 108 मनकों की माला के बारे में क्या कहा गया है?

शिव पुराण की वायवीय संहिता में भगवान शिव स्वयं 108 मनकों की माला को सर्वश्रेष्ठ बताते हैं और इसे 'सर्वसिद्धिदायक' (सभी सिद्धियाँ देने वाली) कहा गया है।

शिव पुराणवायवीय संहितासर्वसिद्धिदायक
शास्त्रीय प्रमाण और फलश्रुति

शिव पुराण में रावण और पारद शिवलिंग का क्या संबंध है?

शिव पुराण की रुद्र संहिता के अनुसार लंकापति रावण — महान तांत्रिक और उच्च कोटि के रसायन शास्त्री — ने पारद शिवलिंग का निर्माण और पूजन करके भगवान शिव को प्रसन्न किया था।

शिव पुराणरुद्र संहितारावण
असितांग भैरव परिचय और स्वरूप

'भरणाद भैरव स्मृत' का क्या अर्थ है?

'भरणाद भैरव स्मृत' का अर्थ है 'भरण-पोषण करने वाला भैरव' — शिव पुराण के अनुसार भैरव केवल संहारक नहीं बल्कि सृष्टि के संरक्षक, पोषक और स्वास्थ्य के दाता हैं।

भरणाद भैरव स्मृतभरण पोषणशिव पुराण
गुप्त रुद्राक्ष प्रयोग

बिना मंत्र और विधान के रुद्राक्ष धारण करने पर क्या चेतावनी दी गई है?

शिव पुराण के अनुसार बिना मंत्र के रुद्राक्ष धारण करने वाला मनुष्य घोर नरक में पड़ता है।

चेतावनीशिव पुराणनरक
गुप्त रुद्राक्ष प्रयोग

१ मुखी रुद्राक्ष के प्रमाणित बीज-मंत्र क्या हैं?

१ मुखी रुद्राक्ष का प्रमाणित बीज मंत्र 'ॐ ह्रीं नमः' है।

1 मुखी मंत्रबीज मंत्रशिव पुराण
पाशुपत अस्त्र साधना

पाशुपतास्त्र साधना के मुख्य संदर्भ ग्रंथ कौन से हैं?

शिव पुराण, महाभारत, अग्नि पुराण और रुद्रयामल तंत्र इसके मुख्य संदर्भ ग्रंथ हैं।

ग्रंथसंदर्भशिव पुराण

विषय-वार प्रश्नोत्तर

🙏पूजा विधि📿मंत्र जाप विधि🔱शिव पूजा🔮तंत्र साधना🏠वास्तु शास्त्र💭सपनों का मतलब🪐ज्योतिष उपाय🙏व्रत उपवास🔥देवी पूजा🧘ध्यान साधना🛕तीर्थ यात्रा🔥हवन यज्ञ📜स्तोत्र पाठ🐘गणेश पूजा🙏विष्णु भक्ति📖सनातन दर्शन🕯️श्राद्ध पितृ कर्म🎗️संस्कार विधि❤️भक्ति साधनाधार्मिक उपाय

सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

पौराणिक प्रश्नोत्तरी पर आपको हिंदू धर्म, वेद, पुराण, भगवद गीता, रामायण, महाभारत, पूजा विधि, व्रत-त्योहार, मंत्र, देवी-देवताओं और सनातन संस्कृति से जुड़े सैकड़ों प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर शास्त्रों और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत, प्रमाणित उत्तर पढ़ें।