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विस्तृत उत्तर
शिव पुराण के स्पष्ट उल्लेख के अनुसार तपोलोक में रहने वाले वैराज देवगणों का कोई स्थूल शरीर नहीं होता। वे अमूर्त या अशरीरी होते हैं। वे चेतनामय प्रकाश-स्वरूप और ज्ञान-स्वरूप माने जाते हैं। चूँकि उनका शरीर भौतिक पंचमहाभूतों, अर्थात पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश, से निर्मित स्थूल शरीर नहीं होता, इसलिए उन्हें बुढ़ापा, रोग, थकान, शोक या मृत्यु का लौकिक भय कभी नहीं सताता।
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