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सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — 13772 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 13772 प्रश्न

लोक

भूलोक का संबंध मृत्यु के बाद की यात्रा से क्या है?

मृत्यु के बाद भूलोक में किए कर्मों के अनुसार स्वर्ग-नरक मिलता है लेकिन वहाँ का भोग पूरा होने पर पुनः भूलोक में ही लौटना पड़ता है। यहीं जन्म-मरण का चक्र तोड़ा जा सकता है।

भूलोकमृत्युपरलोक
लोक

जम्बूद्वीप का नाम जम्बू क्यों पड़ा?

जम्बूद्वीप का नाम एक विशाल दिव्य जम्बू (जामुन) वृक्ष के कारण पड़ा। इसके फलों के रस से जम्बू नदी बनती है और उस रस से जाम्बूनद (दिव्य सोना) उत्पन्न होता है।

जम्बूद्वीपजम्बू वृक्षजाम्बूनद
लोक

भूलोक पर गंगा की कितनी धाराएँ हैं?

गंगा मेरु पर्वत से चार धाराओं में बँटती हैं — सीता (पूर्व), अलकनंदा/भागीरथी (दक्षिण), चक्षु (पश्चिम) और सोमा/भद्रा (उत्तर)।

गंगाचार धाराएँसीता
लोक

गंगा नदी का भूलोक पर अवतरण कैसे हुआ?

भगवान वामन के त्रिविक्रम स्वरूप के चरण के नाखून से ब्रह्मांड का आवरण टूटा और बाहर का कारण-जल भीतर आया। चरण-स्पर्श से वह 'विष्णुपदी गंगा' बनी।

गंगाअवतरणवामन अवतार
लोक

महाराज प्रियव्रत कौन थे?

महाराज प्रियव्रत स्वायम्भुव मनु के पुत्र थे जिन्होंने 11 करोड़ वर्षों तक शासन किया। उनके रथ के पहियों से सप्तद्वीप बने और उन्होंने सात पुत्रों को सात द्वीपों का राजा बनाया।

महाराज प्रियव्रतस्वायम्भुव मनुभूमण्डल
लोक

सप्तद्वीपों की उत्पत्ति कैसे हुई?

महाराज प्रियव्रत के सूर्य-रथ के पीछे सात बार परिक्रमा करने से रथ के पहियों के दबाव से सात खाइयाँ बनीं जो सात महासागर बन गईं और बीच के भू-भाग सप्तद्वीप बन गए।

सप्तद्वीपउत्पत्तिप्रियव्रत
लोक

देवता भारत में जन्म लेने की इच्छा क्यों करते हैं?

देवता स्वर्ग में भी भारत में जन्म लेना चाहते हैं क्योंकि केवल यहाँ मोक्ष संभव है। विष्णु पुराण में 'गायन्ति देवाः' श्लोक में यही कहा गया है।

देवताभारतवर्षजन्म
लोक

भारतवर्ष को सबसे श्रेष्ठ क्यों माना गया है?

भारतवर्ष एकमात्र कर्मभूमि है जहाँ मोक्ष प्राप्त हो सकता है। अन्य वर्ष केवल भोगभूमि हैं। यहाँ चारों युग होते हैं और नए कर्म करने की स्वतंत्रता है।

भारतवर्षकर्मभूमिमोक्ष
लोक

सुमेरु पर्वत क्या है?

सुमेरु पर्वत जम्बूद्वीप के केंद्र में स्थित सम्पूर्ण ब्रह्मांड की धुरी है। यह 84,000 योजन ऊँचा और 16,000 योजन गहरा है। इसके शिखर पर ब्रह्मा जी की पुरी है।

सुमेरु पर्वतमेरुब्रह्मांड धुरी
लोक

जम्बूद्वीप क्या है और कहाँ है?

जम्बूद्वीप सप्तद्वीपों के केंद्र में स्थित है। इसका विस्तार एक लाख योजन है और यह लवण सागर से घिरा है। इसके केंद्र में सुमेरु पर्वत है।

जम्बूद्वीपभूलोकलवण सागर
लोक

सात महासागर कौन-कौन से हैं?

सात महासागर हैं — लवण सागर (खारा जल), इक्षु सागर (गन्ने का रस), सुरा सागर (मदिरा), सर्पि सागर (घी), दधि सागर (दही), दुग्ध सागर (दूध) और जल सागर (मीठा जल)।

सात महासागरलवण सागरइक्षु सागर
लोक

भूलोक में कितने द्वीप हैं और उनके नाम क्या हैं?

भूलोक में सात द्वीप हैं — जम्बू, प्लक्ष, शाल्मलि, कुश, क्रौंच, शाक और पुष्कर। प्रत्येक द्वीप अपने पूर्ववर्ती से दोगुना बड़ा है।

सप्तद्वीपजम्बू द्वीपपुष्कर द्वीप
लोक

भूलोक का विस्तार कितना है?

भूलोक का विस्तार पचास करोड़ योजन (लगभग चार अरब मील) है। यह सात द्वीपों और सात महासागरों में विभक्त है जिनमें प्रत्येक द्वीप पूर्ववर्ती से दोगुना बड़ा है।

भूलोकविस्तारपचास करोड़ योजन
लोक

भूलोक किस आकार का है?

भूलोक का आकार एक विशाल खिले हुए कमल-पत्र के समान है। इसका विस्तार पचास करोड़ योजन (लगभग चार अरब मील) बताया गया है।

भूलोकआकारकमल पत्र
लोक

भूलोक को कर्मभूमि क्यों कहते हैं?

भूलोक को कर्मभूमि इसलिए कहते हैं क्योंकि केवल यहाँ नए कर्म करने की स्वतंत्रता है और केवल यहीं मोक्ष प्राप्त हो सकता है। अन्य सभी लोक केवल भोगभूमियाँ हैं।

भूलोककर्मभूमिमोक्ष
लोक

भूलोक के नीचे कौन-कौन से लोक हैं?

भूलोक के नीचे सात अधोलोक हैं — अतल, वितल, सुतल, तलातल, महातल, रसातल और पाताल। यहाँ सर्प-मणियों का प्रकाश है और असुर-नाग-दानव रहते हैं।

भूलोकअधोलोकपाताल
लोक

भूलोक के ऊपर कौन-कौन से लोक हैं?

भूलोक के ऊपर छह लोक हैं — भुवर्लोक, स्वर्लोक, महर्लोक, जनलोक, तपोलोक और सत्यलोक (ब्रह्मलोक)।

भूलोकऊर्ध्व लोकस्वर्लोक
लोक

भूलोक ब्रह्मांड के 14 लोकों में कहाँ है?

भूलोक 14 लोकों में मध्य लोक है — यह ऊर्ध्व लोकों का प्रथम सोपान है। ऊपर 6 लोक और नीचे 7 अधोलोक हैं। भगवान शेषनाग इसे अपने फनों पर धारण करते हैं।

भूलोक14 लोकमध्य लोक
लोक

भूलोक क्या है?

भूलोक परब्रह्म की योगमाया द्वारा रचित कर्म, भोग और मोक्ष का क्षेत्र है। जहाँ तक सूर्य-चन्द्र का प्रकाश पहुँचे और प्राणी विचरण करें वह सब भूलोक है।

भूलोककर्मभूमिवैदिक
स्तोत्र लाभ

शनि चालीसा पढ़ने से लाभ?

साढ़ेसाती/ढैय्या कम, शनि दोष, आर्थिक स्थिरता, न्याय, शत्रु शांति। शनिवार शाम, पीपल/मंदिर, तेल दीपक+'ॐ शं शनैश्चराय' 108।

शनि चालीसालाभ
रत्न शास्त्र

रत्न कितने दिन में असर दिखाता है?

नीलम 2-3 दिन(तेज), मोती 10-15, पुखराज 15, माणिक/हीरा/गोमेद 15-30, मूंगा 21-30, पन्ना 30-45, लहसुनिया ~1 माह। 3-5 वर्ष प्रभाव।

रत्न असरसमय
तंत्र साधना

तंत्र साधना में भैरवी साधना क्या होती है?

छठवीं महाविद्या — सौम्य-उग्र। बीज 'ह्सौः'। बंधन मुक्ति, तप शक्ति, विद्या। गुरु अनुशंसित। सामान्य: भैरवी अष्टकम् (सुरक्षित)। बीज/तांत्रिक = गुरु। गोपनीय।

भैरवीसाधनातंत्र
तंत्र शास्त्र

तंत्र में नजर उतारने की विधि क्या है?

लोक: नमक/मिर्च/नींबू/कपूर — सिर से 7 बार घुमाकर आग/पानी में। काला टीका (बच्चे)। मंत्र: 'ॐ हूं फट् स्वाहा' 3 बार। हनुमान चालीसा। [समीक्षा आवश्यक] — लोक परंपरा, शास्त्र प्रमाण सीमित। नियमित पूजा = सर्वश्रेष्ठ। अंधविश्वास से बचें।

नजरदृष्टि दोषउतारना
रुद्राभिषेक

रुद्राभिषेक में गन्ने के रस से अभिषेक का क्या फल मिलता है?

शिव पुराण: 'श्रिया इक्षुरसेन वै' — गन्ने के रस से 'श्री' (लक्ष्मी) प्राप्ति। फल: आर्थिक समृद्धि, कर्ज मुक्ति, जीवन में मधुरता, गुरु ग्रह बल। ताजा शुद्ध रस प्रयोग करें। अभिषेक के बाद शुद्ध जल से धोएं।

गन्ने का रसइक्षुरसअभिषेक

विषय-वार प्रश्नोत्तर

🙏पूजा विधि📿मंत्र जाप विधि🔱शिव पूजा🔮तंत्र साधना🏠वास्तु शास्त्र💭सपनों का मतलब🪐ज्योतिष उपाय🙏व्रत उपवास🔥देवी पूजा🧘ध्यान साधना🛕तीर्थ यात्रा🔥हवन यज्ञ📜स्तोत्र पाठ🐘गणेश पूजा🙏विष्णु भक्ति📖सनातन दर्शन🕯️श्राद्ध पितृ कर्म🎗️संस्कार विधि❤️भक्ति साधनाधार्मिक उपाय

सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

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