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गरुड़ पुराण प्रश्नोत्तरी — 591 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित गरुड़ पुराण विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 591 प्रश्न

लोक

यमराज पापी और पुण्यात्मा के साथ अलग व्यवहार क्यों करते हैं?

यमराज का व्यवहार जीवात्मा के कर्मों के अनुसार होता है; पापी को भय और पुण्यात्मा को सम्मान प्राप्त होता है।

यमराजपापी आत्मापुण्यात्मा
लोक

पुण्यात्माओं को यमराज का सौम्य रूप क्यों दिखाई देता है?

सत्य, धर्म, दान और अहिंसा का पालन करने वाली पुण्यात्मा को यमराज शांत, सौम्य और देव रूप में दिखाई देते हैं।

यमराज सौम्य रूपपुण्यात्माधर्म
लोक

यमराज का भयानक स्वरूप पापियों को क्यों दिखाई देता है?

पापी आत्मा अपने ही पाप कर्मों की छाया यमराज के भयानक स्वरूप में देखती है, इसलिए उसे वे डरावने दिखाई देते हैं।

यमराज स्वरूपपापी आत्मागरुड़ पुराण
लोक

यमलोक पृथ्वी से कितनी दूरी पर है?

गरुड़ पुराण के अनुसार मृत्युलोक से यमलोक की दूरी ८६,००० योजन, लगभग ६,८८,००० मील है।

यमलोक दूरी86000 योजनगरुड़ पुराण
लोक

यमलोक को पौराणिक ब्रह्मांड विज्ञान में कैसे समझाया गया है?

पौराणिक ब्रह्मांड विज्ञान में यमलोक कर्म-फल, न्याय और यातना-देह द्वारा कर्म-शोधन का निश्चित पारलौकिक आयाम है।

यमलोकपौराणिक ब्रह्मांड विज्ञानकर्म फल
लोक

यमलोक क्या है?

यमलोक वह पारलौकिक न्याय-स्थान है जहाँ मृत्यु के बाद जीवात्मा के कर्मों का निष्पक्ष मूल्यांकन होता है और उनके अनुसार फल दिया जाता है।

यमलोकगरुड़ पुराणकर्म न्याय
लोक

सुतल लोक मोक्ष का स्थान है या कर्म-भोग का?

गरुड़ पुराण के अनुसार सुतल लोक कर्म-भोग का स्थान है, मोक्ष का नहीं, पर भगवान विष्णु की उपस्थिति से यह पवित्र है।

सुतल मोक्षकर्म भोगगरुड़ पुराण
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

मृत्यु के बाद आत्मा की गति को शास्त्रीय विधान क्यों कहा गया है?

आत्मा की गति लिंग शरीर, वायुजा देह, पिण्डज शरीर, सपिण्डीकरण और यमयात्रा की शास्त्र-सम्मत श्रृंखला है।

आत्मा की गतिशास्त्रीय विधानगरुड़ पुराण
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

गरुड़ पुराण के अनुसार मृत्यु के बाद सबसे जरूरी कर्म कौन से हैं?

मृत्यु के बाद पवित्रता-विधान, षट्पिण्ड, दशगात्र पिण्डदान, अन्न-जल, दीपदान, सपिण्डीकरण और महादान जरूरी हैं।

गरुड़ पुराणमृत्यु कर्मपिण्डदान
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

हत्या से मृत्यु को अकाल मृत्यु क्यों माना गया है?

हत्या से हुई मृत्यु गरुड़ पुराण में अकाल मृत्यु के कारणों में शामिल है।

हत्याअकाल मृत्युनारायण बलि
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

डूबने से मृत्यु को अकाल मृत्यु क्यों माना गया है?

डूबने से हुई मृत्यु अकाल मृत्यु के कारणों में गिनी गई है।

डूबनाअकाल मृत्युनारायण बलि
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

सर्पदंश से मृत्यु को अकाल मृत्यु क्यों माना गया है?

सर्पदंश से हुई मृत्यु गरुड़ पुराण में अकाल मृत्यु मानी गई है।

सर्पदंशअकाल मृत्युनारायण बलि
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

अकाल मृत्यु क्या होती है?

उपवास, दुर्घटना, आत्महत्या, सर्पदंश, डूबना, हत्या आदि से हुई मृत्यु अकाल मृत्यु मानी जाती है।

अकाल मृत्युगरुड़ पुराणनारायण बलि
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

यममार्ग की 16 पुरियाँ कौन-कौन सी हैं?

यममार्ग की 16 पुरियाँ सौम्यपुर से बहुभीतिपुर तक क्रम से आती हैं।

यममार्ग16 पुरियाँगरुड़ पुराण
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

यममार्ग में छाया या विश्राम क्यों नहीं मिलता?

यममार्ग तपते सूर्य से दग्ध और छाया-विहीन है; विश्राम केवल 16 पुरियों में थोड़े समय के लिए मिलता है।

यममार्गछायाविश्राम
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

यममार्ग का वातावरण कैसा है?

यममार्ग तपता, छाया-विहीन, भयावह और भूख-प्यास व यातना से भरा मार्ग है।

यममार्गवातावरणगरुड़ पुराण
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

आत्मा को यमलोक पहुँचने में कितने दिन लगते हैं?

आत्मा को यमलोक पहुँचने में 348 दिन लगते हैं।

यमलोक348 दिनयमयात्रा
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

यममार्ग में आत्मा को कौन-कौन से कष्ट होते हैं?

यममार्ग में आत्मा भूख, प्यास, थकान, दाह, प्रहार, कुत्तों-कौवों और भयानक मार्ग की यातनाएँ सहती है।

यममार्गआत्मा के कष्टयातना देह
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

गरुड़ पुराण में तेरहवें दिन के प्रस्थान का क्या वर्णन है?

गरुड़ पुराण में तेरहवें दिन आत्मा को पाश से बाँधकर यमदूतों द्वारा यममार्ग ले जाने का वर्णन है।

गरुड़ पुराणतेरहवाँ दिनयममार्ग
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

तेरहवें दिन यमदूत आत्मा को कैसे ले जाते हैं?

तेरहवें दिन यमदूत आत्मा को गले में पाश से बाँधकर यममार्ग की ओर खींचते हैं।

तेरहवाँ दिनयमदूतपाश
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

स्वस्थ अवस्था में दान करने का फल कितना बताया गया है?

स्वस्थ अवस्था में अपने हाथों से दान करने का फल 1000 गुना बताया गया है।

स्वस्थ अवस्थादान फलमहादान
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

तिल भगवान विष्णु से कैसे जुड़ा है?

तिल भगवान विष्णु के पसीने से उत्पन्न माने गए हैं।

तिलभगवान विष्णुदान
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

श्राद्ध द्वादशी को क्यों करना चाहिए?

एकादशी श्राद्ध वर्जित है, इसलिए श्राद्ध अगले दिन द्वादशी को किया जाना चाहिए।

श्राद्धद्वादशीएकादशी
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

एकादशी के दिन श्राद्ध क्यों नहीं करना चाहिए?

एकादशी श्राद्ध करने से कर्ता, पितर और पुरोहित तीनों को नरकगामी बताया गया है, इसलिए श्राद्ध द्वादशी को करना चाहिए।

एकादशीश्राद्धगरुड़ पुराण

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सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

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