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विस्तृत उत्तर
यदि व्यक्ति स्वस्थ अवस्था में स्वयं अपने हाथों से दान करता है, तो उसका फल 1000 गुना बताया गया है। दान का आत्मा की पारलौकिक यात्रा पर सीधा प्रभाव माना गया है। मृत्यु के समय अथवा एकादशाह और द्वादशाह के कृत्यों में गोदान, तिल दान, लवण दान, लौह दान, कपास दान, स्वर्ण दान, धान्य दान और भूमि दान जैसे दानों का विधान बताया गया है। इन दानों में यदि व्यक्ति स्वयं स्वस्थ रहते हुए दान करे, तो उसका फल अत्यधिक, अर्थात 1000 गुना, माना गया है।
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