ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण

सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — 13772 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 13772 प्रश्न

सृष्टि क्रम

मेरु पर्वत कैसे उत्पन्न हुआ?

अति उन्नत स्वर्णपर्वत मेरु स्वर्ण अंड के गर्भावरण से निर्मित बताया गया है।

मेरु पर्वतस्वर्ण अंडगर्भावरण
सृष्टि क्रम

आकाश और पृथ्वी कैसे बने?

स्वर्ण अंड जल में एक हजार वर्ष रहा, फिर वायु से दो भागों में बँटा; एक खंड से आकाश और दूसरे से पृथ्वी बनी।

आकाशपृथ्वीस्वर्ण अंड
शिव तत्त्व

शिव सगुण और निर्गुण कैसे हैं?

विष्णु ने कहा कि महादेव ने अपने को सगुण और निर्गुण दो रूपों में विभाजित किया; निर्गुण अव्यक्त और सगुण महेश्वर रूप में हैं।

सगुणनिर्गुणमहेश्वर
सृष्टि तत्त्व

शिव बीजी, ब्रह्मा बीज और विष्णु योनि कैसे हैं?

विष्णु ने कहा कि शिव बीजवान् हैं, ब्रह्मा बीज हैं और वे स्वयं योनि हैं; शिव के लिंग से निकला बीज विष्णु की योनि में गिरा।

बीजीबीजयोनि
शिवमाहात्म्य

शिव को जगत का कारण क्यों कहा गया?

विष्णु ने शिव को जगत का कारण, प्राचीन पुरुष, सभी कारणों का मूल बीज, निर्विकार और एकमात्र ज्योति कहा।

शिवजगत कारणप्राचीन पुरुष
शिवमाहात्म्य

विष्णु ने ब्रह्मा को शिव के बारे में क्या बताया?

विष्णु ने बताया कि आने वाले प्रभु आदि-अन्तरहित पार्वतीनाथ शिव हैं, जो धर्मस्वरूप, प्रचण्ड, महायोग-प्रदीपक और वरदाता हैं।

विष्णुब्रह्माशिवमाहात्म्य
महादेव आगमन

ब्रह्मा ने शिव को देखकर क्या सोचा?

ब्रह्मा ने अद्भुत रूप वाले शिव को आते देखकर विष्णु से पूछा कि यह विशाल, दस भुजाओं वाला, त्रिशूलधारी और भयंकर तेजस्वी प्राणी कौन है।

ब्रह्माशिव दर्शनदश भुजा
महादेव आगमन

महादेव के आने पर क्या हुआ?

महादेव के आने पर उनके चरणों के वेग से समुद्र की बड़ी बूँदें आकाश तक उठीं और गर्म-शीतल वायु चलने लगी।

महादेवशूलपाणिसमुद्र
ब्रह्मा-विष्णु संवाद

ब्रह्मा और विष्णु में संघर्ष क्यों हुआ?

शिव की माया से मोहित होकर ब्रह्मा और विष्णु एक-दूसरे की महिमा में उलझे, और समुद्र के मध्य उनके बीच संघर्ष चल रहा था।

ब्रह्माविष्णुसंघर्ष
ब्रह्मा नाम

ब्रह्मा को पद्मयोनि क्यों कहा गया?

विष्णु ने ब्रह्मा से कहा कि वे कमल से उतर आएँ और आज से पद्मयोनि नाम से लोक में प्रसिद्ध होंगे।

ब्रह्मापद्मयोनिनाभिकमल
नाभिकमल

ब्रह्मा विष्णु की नाभि से बाहर कैसे आए?

सभी द्वार बंद देखकर ब्रह्मा ने अत्यन्त सूक्ष्म रूप धारण किया, नाभि में मार्ग पाया और कमलनाल से बाहर आए।

ब्रह्माविष्णु नाभिकमलनाल
उदर में लोक

ब्रह्मा ने विष्णु के भीतर क्या देखा?

ब्रह्मा ने विष्णु के उदर में वही सब लोक देखे जो विष्णु ने उनके उदर में देखे थे, पर वे भी उसका अंत नहीं पा सके।

ब्रह्माविष्णुउदर
उदर में लोक

विष्णु ने ब्रह्मा के भीतर क्या देखा?

विष्णु ने ब्रह्मा के उदर में अठारह द्वीप, समुद्र, पर्वत, चार वर्ण, सात लोक और स्थावर-जंगम सब कुछ देखा।

विष्णुब्रह्माउदर
शिव माया

शिव की माया क्या करती है?

शिव की माया ब्रह्मा और विष्णु को मोहित करती है; कल्प के आरम्भ में ब्रह्मा का ज्ञान भी उससे नष्ट हो जाता है।

शिव मायामोहब्रह्मा
शिव माया

ब्रह्मा और विष्णु एक-दूसरे को क्यों नहीं पहचान पाए?

वे महात्मा शिव की माया से मोहित थे, इसलिए ब्रह्मा विष्णु को पहचान नहीं पाए और दोनों अपने-अपने आदिकर्ता भाव में बोलने लगे।

ब्रह्माविष्णुशिव माया
ब्रह्मा-विष्णु संवाद

ब्रह्मा ने विष्णु से क्या पूछा?

ब्रह्मा ने विष्णु से पूछा कि आप कौन हैं और समुद्र के मध्य आश्रय लेकर क्यों सो रहे हैं।

ब्रह्माविष्णुप्रश्न
प्रलय और विष्णु

विष्णु शेषनाग पर कैसे सो रहे थे?

प्रलय-सागर में विष्णु हजार फनों वाले शेषनाग की छायायुक्त फण-शय्या पर अनिर्वचनीय योग में स्थित होकर शयन कर रहे थे।

विष्णुशेषनागशेषशय्या
नाभिकमल

ब्रह्मा का जन्म कमल से कैसे हुआ?

विष्णु ने अपनी नाभि से एक विशाल कमल उत्पन्न किया; बाद में ब्रह्मा कमलनाल के सहारे नाभि से बाहर आकर उसी कमल पर शोभित हुए।

ब्रह्माकमल जन्मनाभिकमल
श्रीमद्भागवत

कृष्ण गृहस्थ होकर भी निर्लिप्त कैसे रहे?

कृष्ण गृहस्थ होकर भी निर्लिप्त रहे क्योंकि वे परमेश्वर हैं; वे अपनी माया से मनुष्यलोक में लीला करते हैं, पर प्रकृति के गुण उन्हें बांध नहीं पाते।

कृष्ण गृहस्थ जीवनकृष्ण निर्लिप्तकृष्ण लीला
श्रीमद्भागवत

भागवत पुराण में कृष्ण का रूप कैसा है?

भागवत पुराण में कृष्ण का रूप ऐसा बताया गया है कि उनका वक्ष सौंदर्य की लक्ष्मी का निवास, मुख नेत्रों के लिए सौंदर्य-सुधा और चरण भक्तों का आश्रय हैं।

कृष्ण रूपभागवत पुराणकृष्ण दर्शन
श्रीमद्भागवत

कृष्ण भक्तों से कैसे मिलते हैं?

कृष्ण भक्तों और नगरवासियों से उनकी योग्यता के अनुसार मिले: किसी को प्रणाम किया, किसी से बोले, किसी को गले लगाया, किसी से हाथ मिलाया और किसी को प्रेमभरी दृष्टि दी।

कृष्ण भक्तकृष्ण मिलनभक्ति
श्रीमद्भागवत

कृष्ण को पूर्णकाम क्यों कहा जाता है?

कृष्ण को पूर्णकाम कहा जाता है क्योंकि वे अपने आप में सदा पूर्ण हैं और किसी बाहरी वस्तु से उनकी कोई कमी पूरी नहीं होती।

पूर्णकाम कृष्णकृष्ण अर्थआत्माराम
श्रीमद्भागवत

कृष्ण को आत्माराम क्यों कहा जाता है?

कृष्ण को आत्माराम कहा जाता है क्योंकि वे अपने आत्मस्वरूप में ही पूर्ण आनंद और संतोष रखने वाले हैं; उन्हें बाहरी वस्तुओं से पूर्णता नहीं मिलती।

आत्माराम कृष्णकृष्ण अर्थभक्ति
श्रीमद्भागवत

द्वारका में कृष्ण का स्वागत कैसे हुआ?

द्वारका में कृष्ण का स्वागत भेंट, स्तुति, वेदपाठ, शंख-तुरही, ब्राह्मणों, हाथी, रथों, नर्तकों, गायकों और प्रेम से उमड़े परिजनों के साथ हुआ।

कृष्ण स्वागतद्वारकावासीवसुदेव

विषय-वार प्रश्नोत्तर

🙏पूजा विधि📿मंत्र जाप विधि🔱शिव पूजा🔮तंत्र साधना🏠वास्तु शास्त्र💭सपनों का मतलब🪐ज्योतिष उपाय🙏व्रत उपवास🔥देवी पूजा🧘ध्यान साधना🛕तीर्थ यात्रा🔥हवन यज्ञ📜स्तोत्र पाठ🐘गणेश पूजा🙏विष्णु भक्ति📖सनातन दर्शन🕯️श्राद्ध पितृ कर्म🎗️संस्कार विधि❤️भक्ति साधनाधार्मिक उपाय

सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

पौराणिक प्रश्नोत्तरी पर आपको हिंदू धर्म, वेद, पुराण, भगवद गीता, रामायण, महाभारत, पूजा विधि, व्रत-त्योहार, मंत्र, देवी-देवताओं और सनातन संस्कृति से जुड़े सैकड़ों प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर शास्त्रों और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत, प्रमाणित उत्तर पढ़ें।