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सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — 13772 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 13772 प्रश्न

श्रीमद्भागवत

कृष्ण के स्वागत में द्वारका कैसे सजाई गई?

कृष्ण के स्वागत में द्वारका के फाटक, राजमार्ग, बाजार, चौक और घरों के द्वार बंदनवार, ध्वज, फूल, अक्षत, कलश, धूप और दीप से सजाए गए।

द्वारका सजावटकृष्ण स्वागतद्वारका उत्सव
श्रीमद्भागवत

कृष्ण की द्वारका इतनी सुंदर क्यों थी?

कृष्ण की द्वारका सुंदर थी क्योंकि वह यादव वीरों से सुरक्षित, ऋतु-वैभव से संपन्न, उद्यानों, सरोवरों, सजावट और मंगल-चिह्नों से भरी थी।

कृष्ण की द्वारकाद्वारका नगरीद्वारकापुरी
श्रीमद्भागवत

कृष्ण ने पंचजन्य शंख क्यों बजाया?

कृष्ण ने पंचजन्य शंख इसलिए बजाया कि द्वारका के लोग उनके आने का संकेत पाएं और उनका विरह-दुख शांत हो।

पंचजन्यकृष्णद्वारका वापसी
श्रीमद्भागवत

पंचजन्य शंख किसका था?

पंचजन्य शंख श्रीकृष्ण का प्रिय शंख था, जिसे उन्होंने द्वारका पहुंचकर वहाँ के लोगों की विरह-वेदना शांत करने के लिए बजाया।

पंचजन्य शंखकृष्ण शंखद्वारका
महादेव का उपदेश

महादेव ने विष्णु को क्या आदेश दिया?

महादेव ने विष्णु से चराचर जगत का पालन करने, मोह छोड़ने और पितामह ब्रह्मा का पालन करने को कहा।

महादेवविष्णुजगत पालन
वरदान

विष्णु ने शिव से कौन सा वर मांगा?

विष्णु ने वर माँगा कि ब्रह्मा और विष्णु दोनों की महादेव के प्रति सदा दृढ़ भक्ति बनी रहे।

विष्णुशिववरदान
ब्रह्मा-विष्णु

ब्रह्मा और विष्णु का विवाद क्यों शुभ माना गया?

विष्णु ने कहा कि उनका विवाद मंगलकारी हुआ, क्योंकि उसी विवाद को समाप्त करने के लिए महादेव प्रकट हुए।

ब्रह्मा विष्णु विवादशुभ विवादमहादेव प्रकट
ब्रह्मा-विष्णु

ब्रह्मा और विष्णु शिव से कैसे जुड़े हैं?

महादेव ने कहा कि ब्रह्मा उनके दाएँ अंग से और विश्वात्मा विष्णु उनके बाएँ अंग से उत्पन्न हुए हैं।

ब्रह्माविष्णुशिव
शिव तत्त्व

शिव सृष्टि, पालन और संहार कैसे करते हैं?

महादेव ने कहा कि वे निष्कल परमेश्वर ही ब्रह्मा, विष्णु और भव रूपों में सृजन, पालन और संहार से युक्त हैं।

सृष्टिपालनसंहार
शिव तत्त्व

शिव के तीन रूप कौन से हैं?

निष्कल परमेश्वर शिव ब्रह्मा, विष्णु और भव नामों से तीन रूपों में सृजन, पालन और संहार के गुणों से युक्त हैं।

शिव के तीन रूपब्रह्माविष्णु
शिव भक्ति

ब्रह्मा और विष्णु को शिव भक्ति कैसे मिली?

महादेव के प्रसन्न होने पर विष्णु ने दृढ़ भक्ति का वर माँगा और महादेव ने दोनों को अचल श्रद्धा-भक्ति दी।

ब्रह्माविष्णुशिव भक्ति
शिव भक्ति

शिव भक्ति कैसे प्राप्त होती है?

विष्णु ने महादेव से वर माँगा कि उनकी और ब्रह्मा की शिव में सदा दृढ़ भक्ति रहे, और महादेव ने अचल श्रद्धा-भक्ति प्रदान की।

शिव भक्तिदृढ़ भक्तिमहादेव
लिंग आख्यान

लिंग आख्यान पढ़ने से क्या फल मिलता है?

शिवलिंग के सामने प्रतिदिन लिंग-आख्यान पढ़ने वाला शिवत्व को प्राप्त होता है।

लिंग आख्यानशिवत्वपाठ फल
लिंग आख्यान

शिवलिंग के सामने कौन सा पाठ करना चाहिए?

शिवलिंग के समक्ष लिंग-आख्यान का प्रतिदिन पाठ करना बताया गया है।

शिवलिंगलिंग आख्यानपाठ
लिंग तत्त्व

शिवलिंग को लिंग क्यों कहा जाता है?

क्योंकि यह समग्र जगत को अपने में लय करता है, इसलिए इसे लिंग कहा गया है।

शिवलिंगलिंगजगत का लय
लिंग तत्त्व

शिवलिंग का असली अर्थ क्या है?

समग्र जगत को अपने में लय करने के कारण इसे लिंग कहा गया है।

शिवलिंगलिंग अर्थलय
शिवलिंग पूजा

लिंगवेदी क्या होती है?

लिंगवेदी महादेवी पार्वती का रूप बताई गई है, जबकि लिंगरूप में साक्षात् महेश्वर प्रतिष्ठित रहते हैं।

लिंगवेदीपार्वतीमहादेवी
शिवलिंग पूजा

शिवलिंग में शिव और पार्वती कैसे माने जाते हैं?

लिंगवेदी के रूप में महादेवी पार्वती और लिंगरूप में साक्षात् महेश्वर प्रतिष्ठित बताए गए हैं।

शिवलिंगपार्वतीमहेश्वर
शिवलिंग पूजा

शिवलिंग पूजा की शुरुआत कैसे हुई?

ब्रह्मा-विष्णु को वर देकर महादेव के अन्तर्धान होने के बाद लोकों में शिवलिंग पूजन की प्रसिद्धि फैल गई।

शिवलिंग पूजामहादेवब्रह्मा
शिव नाम

शिव को वेदशास्त्ररूप क्यों कहा गया है?

स्तुति में शिव को वेदशास्त्ररूप, भुवनेशदेव, वेदगर्भ, गर्भरूप और विश्वगर्भ कहा गया है।

वेदशास्त्ररूपभुवनेशदेववेदगर्भ
शिव नाम

शिव को महायोगी क्यों कहा गया है?

स्तुति में शिव को रोग-विकारशून्य अनन्त, शाश्वत, वरिष्ठ, वारिगर्भ और महायोगी महेश्वर कहा गया है।

महायोगीमहेश्वरअनन्त शिव
शिव नाम

शिव को गणों का स्वामी क्यों कहा गया है?

स्तुति में शिव को गणों का अधिपति कहा गया है और उसी के साथ उन्हें गंधी तथा गुहा से भी गुह्यतम रुद्र कहा गया है।

गणों के अधिपतिरुद्रगुह्यतम
स्तोत्र फल

पाप शुद्धि के लिए क्या करना चाहिए?

सभी पापों की शुद्धि के लिए विष्णु द्वारा कहे गए स्तोत्र का नित्य जप, पाठ और धर्मनिष्ठ ब्राह्मणों को सुनाना चाहिए।

पाप शुद्धिविष्णु स्तोत्रनित्य जप
स्तोत्र फल

विष्णु स्तोत्र सुनाने से क्या फल मिलता है?

विष्णु स्तोत्र को वेदपारगामी ब्राह्मणों को सुनाने वाला भी पापकर्म में लिप्त होने पर ब्रह्मलोक प्राप्त करता है।

विष्णु स्तोत्रसुनानाब्राह्मण

विषय-वार प्रश्नोत्तर

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सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

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