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ग्रह शांति — प्रश्नोत्तरी

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 13 प्रश्न

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तंत्र शास्त्र

तंत्र साधना में ग्रह शांति कैसे करें?

तांत्रिक: मंत्र जप (बीज) + यंत्र + हवन (ग्रह सामग्री) + रत्न + दान + अभिषेक। सूर्य=गेहूं, चंद्र=चावल, शनि=तिल। तांत्रिक=वैदिक+यंत्र=अधिक प्रभावी। ज्योतिषी+गुरु → सही उपाय।

ग्रह शांतितंत्रमंत्र
ज्योतिष

राहु मंत्र का जप राहु दोष शांति के लिए कैसे करें?

बीज: 'ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः' 18,000। सरल: 'ॐ रां राहवे नमः' 108 नित्य। शनिवार/बुधवार रात्रि, काले वस्त्र, गोमेद/रुद्राक्ष माला, सरसों दीपक। 40 दिन। दुर्गा सप्तशती भी प्रभावी। ज्योतिषी परामर्श।

राहुमंत्रदोष
पूजा घर नियम

पूजा घर में अष्टधातु की मूर्ति रखने का क्या लाभ है?

अष्टधातु (8 धातुओं) की मूर्ति में सभी ग्रहों की धातुएँ हैं — यह सर्वग्रह शांति, शक्तिशाली सकारात्मक ऊर्जा और सर्वदोष निवारण करती है। शास्त्रों में यह सर्वश्रेष्ठ धातु मानी गई है। असली अष्टधातु की पहचान करें।

अष्टधातुमूर्तिआठ धातु
ज्योतिष

केतु मंत्र का जप केतु दोष शांति के लिए कैसे करें?

बीज: 'ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः' 17,000। सरल: 'ॐ कें केतवे नमः' 108। मंगलवार/शनिवार, भूरे वस्त्र, 7 मुखी रुद्राक्ष। गणेश पूजा। केतु = मोक्षकारक भी। ज्योतिषी परामर्श।

केतुमंत्रदोष
वास्तु शास्त्र

नवग्रह पूजा से वास्तु दोष का निवारण कैसे करें

वास्तु में प्रत्येक दिशा का स्वामी ग्रह है। दोषित दिशा के अनुसार उस ग्रह की शांति करें — जैसे ईशान दोष में गुरु शांति, दक्षिण दोष में मंगल शांति। नवग्रह पूजा/हवन योग्य पंडित से कराएं।

नवग्रहवास्तु दोषग्रह शांति
संस्कार विधि

वास्तु पूजा में नवग्रह स्थापना कैसे करें?

नवग्रह स्थापना: यंत्र/मण्डल (केन्द्र=सूर्य, चारों दिशा+कोण) → प्रत्येक ग्रह पर सम्बंधित पुष्प-मंत्र → हवन (108×9 आहुति, सम्बंधित समिधा) → नवग्रह स्तोत्र। उद्देश्य: वास्तु+ग्रह दोष शांति।

वास्तु पूजानवग्रहस्थापना
तंत्र साधना

तंत्र साधना में काले उड़द का प्रयोग क्यों होता है?

काला उड़द: शनि ग्रह सम्बद्ध (शनि दोष शांति), नकारात्मक ऊर्जा अवशोषक (काला रंग = तमोगुण शोषक), शिव भोग (शनिवार), नजर उतारना (लोक तंत्र), पितृ पिण्डदान। सात्त्विक: शनिवार दान, शनि मंदिर तेल दीपक।

काला उड़दशनितंत्र
पूजा विधि

नवग्रह शांति पूजा की विधि क्या है?

नवग्रह शांति: मण्डल स्थापना (9 ग्रह अपने अनाज-वस्त्र सहित) → पूजन-मंत्र → नवग्रह स्तोत्र → प्रत्येक ग्रह की विशेष समिधा से हवन → निर्धारित जप संख्या → ग्रहानुसार दान। ज्योतिषीय परामर्श और अनुभवी पुरोहित आवश्यक।

नवग्रहग्रह शांतिनवग्रह पूजा
तंत्र साधना

तंत्र में कुंडली दोष निवारण कैसे किया जाता है?

कुंडली दोष तांत्रिक निवारण: मंगल दोष — हनुमान चालीसा + मंगल मंत्र। काल सर्प — नागबलि + राहु-केतु मंत्र। शनि — शनि मंत्र 23,000 + हनुमान चालीसा। पितृ — तर्पण + श्राद्ध। सर्वदोष — नवग्रह यंत्र + रुद्राभिषेक। योग्य ज्योतिषी से परामर्श अनिवार्य।

कुंडली दोषग्रह शांतिमंगल दोष
तंत्र साधना

तंत्र में नवग्रह यंत्र कैसे प्रयोग करें?

नवग्रह यंत्र प्रयोग: ताम्र/रजत पट्ट पर 9 ग्रहों के यंत्र। विधि: गंगाजल से शुद्धि → प्राण प्रतिष्ठा (शुक्ल पक्ष) → प्रत्येक ग्रह बीज मंत्र 108 बार → ईशान कोण में स्थापना। नित्य धूप-दीप। सावधानी: भूमि पर न रखें, अशुद्ध स्पर्श वर्जित।

नवग्रह यंत्रयंत्र साधनाग्रह शांति
मंत्र सिद्धि

नवग्रह मंत्र सिद्धि कैसे करें?

ग्रह-अनुसार मंत्र, वार, और पुष्प: सूर्य (रविवार, लाल), चंद्र (सोमवार, सफेद), शनि (शनिवार, तिल)। व्यक्तिगत ग्रह-शांति: कुंडली में दोषकारक ग्रह का पुरश्चरण। सम्पूर्ण नवग्रह: प्रत्येक का 108 जप एक बैठक में। कुंडली-विश्लेषण के बिना ग्रह-साधना अनुचित।

नवग्रह मंत्रग्रह शांतिज्योतिष
ज्योतिष

ग्रह शांति के लिए कौन से मंत्र जपने चाहिए?

सार्वभौमिक: नवग्रह स्तोत्र, महामृत्युंजय, गायत्री। 9 ग्रह बीज: सूर्य (ह्रां), चंद्र (श्रां), मंगल (क्रां), बुध (ब्रां), गुरु (ग्रां), शुक्र (द्रां), शनि (प्रां), राहु (भ्रां), केतु (स्रां)। कुण्डली → ज्योतिषी → विशिष्ट ग्रह जप।

ग्रह शांतिनवग्रहमंत्र
यंत्र

नवग्रह यंत्र स्थापित करने की विधि क्या है?

रविवार/गुरुवार, गंगाजल+पंचामृत शुद्धि, पूर्व/उत्तर। नवग्रह स्तोत्र + 9 बीज 108-108। हवन (9 सामग्री)। नित्य: स्तोत्र+दीपक। सर्वग्रह शांति। ज्योतिषी से सही यंत्र चयन।

नवग्रहयंत्रस्थापना

सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

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