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पूर्व दिशा प्रश्नोत्तरी — 18 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित पूर्व दिशा विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 18 प्रश्न

मरणोपरांत आत्मा यात्रा

शवदाह में पुत्र या कर्ता किस दिशा में मुख करके क्रिया करता है?

शवदाह में पुत्र या कर्ता पूर्व दिशा की ओर मुख करके क्रिया करता है।

शवदाहकर्तापूर्व दिशा
साधना सामग्री

भुवनेश्वरी यंत्र की स्थापना कैसे करते हैं?

भुवनेश्वरी यंत्र स्थापना: पूर्व दिशा में (पश्चिम की ओर मुख करके)। लाल वस्त्र से ढके बाजोट पर यंत्र स्थापित करें। पंचोपचार पूजन: कुमकुम + अक्षत + धूप + दीप + पुष्प।

भुवनेश्वरी यंत्र स्थापनापूर्व दिशालाल वस्त्र
पूजा विधान

माँ बगलामुखी की साधना की पूर्ण विधि क्या है?

बगलामुखी साधना विधि: प्रातः स्नान → पीले वस्त्र → पूर्व/उत्तर दिशा, पीले आसन पर बैठें → गुरु-गणपति पूजन + मृत्युंजय एक माला → संकल्प-आवाहन-न्यास → हल्दी माला से मंत्र जाप (6 माला/दिन या सवा लाख) → दान।

बगलामुखी साधना विधिपूर्व दिशापीला आसन
व्रत-पूर्व तैयारी

वसंत पंचमी का संकल्प कैसे लेते हैं?

संकल्प विधि: पूर्व/उत्तर दिशा में कुशा आसन पर बैठें। दाहिने हाथ में जल + पीले पुष्प + अक्षत + दक्षिणा लें। 'यथोपलब्धपूजनसामग्रीभिः भगवत्या: सरस्वत्या: पूजनमहं करिष्ये।' — फिर जल भूमि पर छोड़ें।

वसंत पंचमी संकल्पइच्छाशक्तिपीले पुष्प अक्षत
दुर्गा सप्तशती

दुर्गा सप्तशती पढ़ने के नियम क्या हैं?

सप्तशती पाठ के नियम: स्नान के बाद पूर्व/उत्तर दिशा में बैठें। पुस्तक भूमि पर नहीं — काष्ठ/तांबे की चौकी पर रखें। बीच में बात करना, जम्हाई, अधूरा छोड़ना — सख्त वर्जित। अध्याय आरंभ और अंत में घंटी बजाना शुभ।

सप्तशती नियमपूर्व दिशाकाष्ठ चौकी
नियम और पात्रता

हवन में किस दिशा में मुख रखें?

हवन में यजमान का मुख पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए।

हवन दिशापूर्व दिशाउत्तर दिशा
जप का स्थान, समय, आसन और माला

जप में किस दिशा में मुख करना चाहिए?

जप में मुख पूर्व (East) या उत्तर (North) दिशा में होना चाहिए — पूर्व = सूर्य की दिशा (ज्ञान, प्रकाश, सकारात्मक ऊर्जा); उत्तर = कुबेर और देवताओं की दिशा।

पूर्व दिशाउत्तर दिशासूर्य
साधना विधि

नमः शिवाय जप के लिए कौन सी दिशा में बैठना चाहिए?

नमः शिवाय जप के लिए पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके आसन पर बैठना चाहिए।

पूर्व दिशाउत्तर दिशाजप दिशा
प्राण प्रतिष्ठा और स्थापना

पारद शिवलिंग पूजा में साधक किस दिशा में बैठे?

आगम शास्त्र के अनुसार पारद शिवलिंग की पूजा में साधक को पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठना चाहिए।

पूर्व दिशासाधकपूजा दिशा
महामृत्युंजय और महाकाल भैरव तुलना

महामृत्युंजय साधना में कौन सी दिशा में बैठना चाहिए?

महामृत्युंजय साधना में पूर्व दिशा (पूर्वाभिमुख) की ओर मुख करके बैठना चाहिए।

पूर्व दिशापूर्वाभिमुखमहामृत्युंजय
साधना विधि और नियम

असितांग भैरव साधना किस दिशा में करनी चाहिए?

असितांग भैरव साधना में पूर्व दिशा की ओर मुख करके जप करना चाहिए — वे पूर्व दिशा के दिक्पाल हैं।

पूर्व दिशादिक्पालजप दिशा
असितांग भैरव परिचय और स्वरूप

असितांग भैरव किस दिशा के संरक्षक हैं?

असितांग भैरव पूर्व दिशा के संरक्षक (दिक्पाल) हैं — इसीलिए उनकी साधना में जप करते समय पूर्व दिशा की ओर मुख करना चाहिए।

पूर्व दिशादिक्पालसंरक्षक
असितांग भैरव परिचय और स्वरूप

अष्ट भैरवों में असितांग भैरव का क्या स्थान है?

असितांग भैरव अष्ट भैरवों में तृतीय स्थान पर हैं — वे पूर्व दिशा के संरक्षक (दिक्पाल) हैं और ज्ञान, सृजनात्मकता तथा शाप-निवृत्ति से संबंधित हैं।

अष्ट भैरवतृतीय स्थानपूर्व दिशा
पाठ विधि और नियम

चन्द्रशेखराष्टकम् पाठ के लिए कौन सी दिशा में बैठना चाहिए?

सामान्य: प्रातःकाल पूर्व, सायंकाल पश्चिम दिशा। चन्द्रदोष निवारण के लिए उत्तर या उत्तर-पश्चिम (वायव्य) दिशा में बैठकर पाठ करना विशेष लाभकारी है।

दिशापूर्व दिशापश्चिम दिशा
स्तोत्र पाठ विधि और नियम

नीलकंठ स्तोत्र का पाठ किस दिशा में बैठकर करें?

नीलकंठ स्तोत्र पाठ के लिए पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठना चाहिए।

पूर्व दिशाआसनपाठ विधि
पूजा विधि एवं नियम

मूर्ति का मुख किस दिशा में होना चाहिए?

मूर्ति का मुख प्रायः पश्चिम दिशा में हो, ताकि पूजा करने वाले का मुख पूर्व में रहे। पूजाघर घर के उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) में सर्वोत्तम होता है। अलग-अलग देवताओं के लिए दिशाएं भिन्न हो सकती हैं।

मूर्ति दिशावास्तुपूजाघर
मंत्र साधना

मंत्र जप में पूर्व दिशा की तरफ मुख करके बैठने का वैज्ञानिक कारण

पूर्व मुख: शास्त्रीय = सूर्योदय, प्रकाश, ज्ञान। वैज्ञानिक: (1) चुम्बकीय क्षेत्र अनुकूल → मस्तिष्क रक्त प्रवाह। (2) प्रातः सूर्य किरणें → ऊर्जा, विटामिन D, सजगता। (3) Circadian rhythm अनुकूल। उत्तर भी शुभ। दिशा सहायक, एकाग्रता/भक्ति प्रधान।

मंत्र जपपूर्व दिशासूर्य
दैनिक कर्म

सूर्य को जल देते समय किस दिशा में खड़े हों

सूर्य को जल देते समय मुख सदैव पूर्व दिशा (सूर्योदय की दिशा) की ओर रखें। खुले स्थान पर नंगे पैर खड़े होकर, दोनों हाथों से तांबे का लोटा उठाकर धारा से जल अर्पित करें। जल की धारा से सूर्य किरणें देखना शुभ है। पूर्व दिशा देवताओं की दिशा मानी गई है।

सूर्य अर्घ्यदिशापूर्व दिशा

विषय-वार प्रश्नोत्तर

🙏पूजा विधि📿मंत्र जाप विधि🔱शिव पूजा🔮तंत्र साधना🏠वास्तु शास्त्र💭सपनों का मतलब🪐ज्योतिष उपाय🙏व्रत उपवास🔥देवी पूजा🧘ध्यान साधना🛕तीर्थ यात्रा🔥हवन यज्ञ📜स्तोत्र पाठ🐘गणेश पूजा🙏विष्णु भक्ति📖सनातन दर्शन🕯️श्राद्ध पितृ कर्म🎗️संस्कार विधि❤️भक्ति साधनाधार्मिक उपाय

सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

पौराणिक प्रश्नोत्तरी पर आपको हिंदू धर्म, वेद, पुराण, भगवद गीता, रामायण, महाभारत, पूजा विधि, व्रत-त्योहार, मंत्र, देवी-देवताओं और सनातन संस्कृति से जुड़े सैकड़ों प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर शास्त्रों और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत, प्रमाणित उत्तर पढ़ें।