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सूक्ष्म शरीर प्रश्नोत्तरी — 31 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित सूक्ष्म शरीर विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 31 प्रश्न

लोक

गरुड़ पुराण में महर्लोक को कण्ठ क्यों कहा गया है?

गरुड़ पुराण के सूक्ष्म शरीर-विज्ञान में महर्लोक कण्ठ (गले) क्षेत्र में है। यह विशुद्ध चक्र का स्थान है जो उच्चतर चेतना और सत्य का मुख्य द्वार है।

गरुड़ पुराणमहर्लोककण्ठ
लोक

भुवर्लोक में भूत-प्रेत क्यों भटकते हैं?

कर्म-बंधन, अकाल मृत्यु या भौतिक आसक्ति के कारण जो आत्माएं पृथ्वी के मोह से मुक्त नहीं हो पातीं वे सूक्ष्म शरीर में भुवर्लोक में भटकती रहती हैं।

भुवर्लोकभूत प्रेतकर्म बंधन
श्रीमद्भागवत

सूक्ष्म शरीर और जीव का संबंध क्या है?

स्थूल रूप से परे सूक्ष्म शरीर बताया गया है; आत्मा का उसमें आरोप या प्रवेश होने से वही जीव कहलाता है और उसका पुनर्जन्म होता है।

सूक्ष्म शरीरजीवपुनर्जन्म
श्राद्ध दर्शन

प्रेत योनि क्या है?

प्रेत योनि = मृत्यु के बाद आत्मा स्थूल शरीर त्यागकर सूक्ष्म शरीर धारण कर जिस अवस्था में जाती है। सपिण्डीकरण संस्कार से पहले आत्मा प्रेत रूप में भटकती है। गरुड़ पुराण के प्रेत कल्प में विस्तृत वर्णन।

प्रेत योनिगरुड़ पुराणसूक्ष्म शरीर
लोक

पिण्डदान से मृत आत्मा को सूक्ष्म शरीर कैसे मिलता है?

पिण्ड स्थूल शरीर का प्रतीक है और पिण्डदान मृत आत्मा को सूक्ष्म देह की सहायता देता है।

पिण्डदानसूक्ष्म शरीरप्रेतात्मा
लोक

हिंसक मृत्यु के बाद भूत योनि क्यों मिलती है?

हिंसक और अचानक मृत्यु में आत्मा मृत्यु को स्वीकार नहीं कर पाती, इसलिए सूक्ष्म शरीर पृथ्वी पर अटककर भूत बन सकता है।

हिंसक मृत्युभूत योनिअचानक मृत्यु
लोक

आत्महत्या के बाद प्रेत योनि क्यों मिलती है?

आत्महत्या अकाल मृत्यु है; आयु और आसक्ति शेष रहने से आत्मा प्रेत रूप में भटक सकती है।

आत्महत्याप्रेत योनिअकाल मृत्यु
लोक

अकाल मृत्यु से प्रेत योनि क्यों मिलती है?

अकाल मृत्यु में जीव की आयु और आसक्ति शेष रहती है, इसलिए वह शेष आयु तक प्रेत रूप में भटक सकता है।

अकाल मृत्युप्रेत योनिगरुड़ पुराण
लोक

प्रेत योनि में जीव को कैसा शरीर मिलता है?

प्रेत को वायु तत्व से बना वायव्य सूक्ष्म शरीर मिलता है, जिसमें वह भूख-प्यास और अतृप्ति की पीड़ा अनुभव करता है।

प्रेत शरीरवायव्य शरीरसूक्ष्म शरीर
लोक

प्रेत योनि क्या है?

प्रेत योनि वह अवस्था है जिसमें शरीर छोड़ चुकी आत्मा नई योनि या पितृलोक न पाकर वायव्य सूक्ष्म देह में भूख-प्यास से भटकती रहती है।

प्रेत योनिगरुड़ पुराणसूक्ष्म शरीर
लोक

यातना-देह नष्ट क्यों नहीं होती?

यातना-देह इसलिए नष्ट नहीं होती क्योंकि वह नरक के कष्ट भोगने के लिए बनी है; आग और शस्त्र उसे समाप्त नहीं करते।

यातना देहनरक यातनासूक्ष्म शरीर
लोक

यातना-देह क्या है?

यातना-देह वह सूक्ष्म शरीर है जिससे आत्मा नरक की यातनाएँ भोगती है, पर वह आग या शस्त्र से नष्ट नहीं होती।

यातना देहसूक्ष्म शरीरनरक
लोक

अंगुष्ठमात्र सूक्ष्म शरीर क्या होता है?

अंगुष्ठमात्र सूक्ष्म शरीर अंगूठे के आकार की वह देह है जिसे यमदूत शरीर से निकालते हैं और जिससे आत्मा यातनाएँ भोगती है।

अंगुष्ठमात्रसूक्ष्म शरीरयातना देह
लोक

यमदूत आत्मा को शरीर से कैसे निकालते हैं?

यमदूत अंगुष्ठमात्र सूक्ष्म शरीर को स्थूल शरीर से बलपूर्वक खींच निकालकर काल-पाश में बांधते हैं।

यमदूतआत्मासूक्ष्म शरीर
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

मृत्यु के बाद आत्मा क्या देख सकती है?

मृत्यु के बाद आत्मा ब्रह्मांड, यमदूतों और पुण्य होने पर विष्णु पार्षदों को देख सकती है।

मृत्यु के बादआत्मादर्शन
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

मृत्यु के बाद आत्मा अंगूठे के आकार की क्यों कही गई है?

प्राण निकलते ही आत्मा अंगुष्ठमात्र सूक्ष्म स्वरूप धारण करती है, जिसे यमदूत पाश से बाँधते हैं।

अंगुष्ठमात्र आत्मामृत्युसूक्ष्म शरीर
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

लिंग शरीर में कितने तत्त्व बताए गए हैं?

लिंग शरीर में सत्रह तत्त्व बताए गए हैं।

लिंग शरीर17 तत्त्वसूक्ष्म शरीर
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

सूक्ष्म शरीर क्या होता है?

सूक्ष्म शरीर सत्रह तत्त्वों से बना वह शरीर है जिसमें आत्मा मृत्यु के बाद कर्म-संस्कारों के साथ आगे बढ़ती है।

सूक्ष्म शरीरलिंग शरीरमृत्यु
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

लिंग शरीर क्या होता है?

लिंग शरीर सत्रह तत्त्वों से बना सूक्ष्म शरीर है, जो कर्म और संस्कारों का वाहक होता है।

लिंग शरीरसूक्ष्म शरीरकर्म
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

मृत्यु को सनातन धर्म में जीवन का अंत क्यों नहीं माना गया है?

मृत्यु स्थूल शरीर का अंत है, लेकिन आत्मा लिंग शरीर और अन्य पारलौकिक देहों के साथ आगे यात्रा करती है।

मृत्युसनातन धर्मआत्मा
लोक

जनलोक के निवासी किस प्रकार के शरीर में रहते हैं?

जनलोक के निवासी स्थूल शरीरों में नहीं, बल्कि सूक्ष्म शरीरों में रहते हैं।

जनलोक निवासीसूक्ष्म शरीरस्थूल शरीर
बीज मंत्र और देवता का स्वरूप

बीज मंत्र देवता का 'सूक्ष्म शरीर' क्यों कहलाता है?

तंत्र और आगम: जैसे स्थूल शरीर को सूक्ष्म सत्ता (मन, बुद्धि, प्राण) चलाती है — वैसे देवता का ऊर्जा-स्वरूप और चेतना-स्वरूप ही उनका सूक्ष्म शरीर है और बीज मंत्र उसी की साक्षात् अभिव्यक्ति है।

सूक्ष्म शरीरतंत्र आगमचेतना स्वरूप
काशी के शिवलिंग

शंकुकर्णेश्वर महादेव को 'गुप्त शिवलिंग' क्यों कहते हैं?

दो कारण — (1) ऐतिहासिक: ऐबक, लोदी, औरंगजेब के आक्रमणों से बचाने के लिए छिपाया गया, (2) दार्शनिक: शिव का वास साधक के सूक्ष्म शरीर (लिंग देह) में गुप्त रूप से है — गुप्त शिवलिंग इसी सत्य का प्रतीक।

गुप्त शिवलिंगशंकुकर्णेश्वरकाशी
जीवन एवं मृत्यु

प्रेत को सूक्ष्म शरीर से ही क्यों रहना पड़ता है?

प्रेत को सूक्ष्म शरीर में इसलिए रहना पड़ता है क्योंकि वासनाएँ उसका शरीर बन जाती हैं, कर्म-फल भोगने के लिए यह जरूरी है, पिंडदान से 'हस्तमात्र' यातना-देह बनती है और यमराज के निर्णय तक यही संक्रमण-अवस्था है।

प्रेतसूक्ष्म शरीरवासना

विषय-वार प्रश्नोत्तर

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सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

पौराणिक प्रश्नोत्तरी पर आपको हिंदू धर्म, वेद, पुराण, भगवद गीता, रामायण, महाभारत, पूजा विधि, व्रत-त्योहार, मंत्र, देवी-देवताओं और सनातन संस्कृति से जुड़े सैकड़ों प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर शास्त्रों और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत, प्रमाणित उत्तर पढ़ें।