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क्या है

बालकाण्ड क्या है?(24)

बालकाण्ड का अर्थबालकाण्ड क्या है?बालकाण्ड का महत्व
सरल उत्तर

मुख्यतः भगवान श्रीरामजी को — 'कृपासिंधु बोले मृदु बचना।' कई स्थानों पर शिवजी और विष्णुजी को भी। पर सर्वाधिक बार यह रामजी की उपाधि है — कृपा का समुद्र।

स्रोत प्रश्न: 'कृपासिंधु' किसे कहा गया है बालकाण्ड में? →
रामचरितमानस — बालकाण्ड

'त्रिपुरारि' और 'उमापति' कौन हैं?

शिवजी — त्रिपुरारि (त्रिपुर का नाश करने वाले) और उमापति (उमा/पार्वती के पति)। अन्य नाम — महेश, शम्भु, शंकर, वृषकेतु, चन्द्रमौलि, पुरारि।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

'गिरिजा' कौन हैं?

पार्वतीजी — गिरि (पर्वत/हिमवान) की पुत्री। 'सुनु गिरिजा हरिचरित सुहाए।' अन्य नाम — उमा, भवानी, अम्बिका, गौरी, शैलकुमारी, अपर्णा।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

'भार्गव' और 'रेणुकासुत' कौन हैं?

परशुरामजी — भार्गव (भृगु वंश से) और रेणुकासुत (माता रेणुका के पुत्र)। पिता जमदग्नि ऋषि। शिवजी से फरसा (परशु) मिला — इसलिये 'परशुराम'।

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'कौसिक' और 'गाधिसुत' कौन हैं?

विश्वामित्रजी — कौसिक (कुशिक वंश से) और गाधिसुत (गाधि राजा के पुत्र)। 'गाधिसूनु सब कथा सुनाई' — गाधि के पुत्र विश्वामित्रजी ने कथा सुनाई। पहले क्षत्रिय, तपस्या से ब्रह्मर्षि बने।

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'भानुकुलभूषण' किसे कहा गया?

श्रीरामजी — सूर्यवंश (भानुकुल) के भूषण (आभूषण)। 'देखि भानुकुलभूषनहि बिसरा सखिन्ह अपान।' राम रघुवंश (सूर्यवंश) के राजकुमार — इसलिये 'भानुकुलभूषण', 'रघुकुलतिलक', 'रघुवर'।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

'मिथिलेश' कौन हैं?

राजा जनक — मिथिला (जनकपुर) के राजा। मिथिला + ईश = मिथिलेश। अन्य नाम — विदेह, जनक, सीरध्वज। बालकाण्ड में — 'बेगि बिदेह नगर निअराया।'

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'विदेहकुमारी' कौन हैं?

सीताजी — राजा जनक (विदेह) की पुत्री। जनक को 'विदेह' कहते हैं (देह-भाव से परे)। सीताजी के अन्य नाम — जानकी, वैदेही, सीता, जनकसुता, भूमिजा।

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'कृपासिंधु' किसे कहा गया है बालकाण्ड में?

मुख्यतः भगवान श्रीरामजी को — 'कृपासिंधु बोले मृदु बचना।' कई स्थानों पर शिवजी और विष्णुजी को भी। पर सर्वाधिक बार यह रामजी की उपाधि है — कृपा का समुद्र।

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रामचरितमानस में कथा-वक्ता और श्रोता की प्रथम (मुख्य) जोड़ी कौन है?

शिवजी (वक्ता) और पार्वतीजी (श्रोता) — मुख्य कथा-संवाद। 'सुनु गिरिजा हरिचरित सुहाए' — शिवजी ने कैलास पर पार्वतीजी को रामकथा सुनाई। यह मूल कथा-धारा है।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

गोस्वामी तुलसीदासजी के गुरु कौन थे?

बाबा नरहरिदास (नरहर्यानन्द) — कुछ परम्पराओं में नरसिंहदास। मानस में गुरु महिमा — 'बंदउँ गुरु पद कंज कृपा सिंधु नररूप हरि' — गुरु कृपा के समुद्र और नररूप हरि हैं।

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रामचरितमानस के सात काण्डों के नाम क्या हैं?

(1) बालकाण्ड, (2) अयोध्याकाण्ड, (3) अरण्यकाण्ड, (4) किष्किन्धाकाण्ड, (5) सुन्दरकाण्ड, (6) लंकाकाण्ड, (7) उत्तरकाण्ड। 'सप्त प्रबंध सुभग सोपाना' — मानस सरोवर की सात सुन्दर सीढ़ियाँ।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

बालकाण्ड का अन्तिम सन्देश क्या है?

रामचरित की अपार महिमा — जो इस कथा को कहे-गाये वे सदा सुख पावें। 'चरित सिंधु गिरिजा रमन बेद न पावहिं पारु' — शिवजी का चरित्र समुद्र-सा अपार, वेद भी पार न पायें। सन्देश — विनम्रता, भक्ति और रामचरित महिमा।

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परशुरामजी कौन हैं — किसके अवतार?

भगवान विष्णु के अवतार — जमदग्नि ऋषि और रेणुका के पुत्र। भार्गव (भृगुवंशी), रेणुकासुत। 21 बार पृथ्वी क्षत्रियविहीन की। शिवजी के परम भक्त, शिवजी से फरसा (परशु) मिला। अन्त में रामजी को परब्रह्म पहचानकर प्रणाम किया।

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अहल्या कौन थीं — किसकी पत्नी?

अहल्या गौतम ऋषि की पत्नी थीं। गौतम ऋषि के शाप से शिला (पत्थर) बनी थीं। 'गौतम नारि श्राप बस उपल देह धरि धीर। चरन कमल रज चाहति कृपा करहु रघुबीर॥' — रामजी के चरण-स्पर्श की प्रतीक्षा में।

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श्रीरामजी के तीन भाइयों के नाम क्या हैं?

भरत (कैकेयी से), लक्ष्मण और शत्रुघ्न (सुमित्रा से)। चारों शील, रूप, गुण के धाम पर सुख-सागर राम सबसे अधिक। श्याम-गौर दो जोड़ियाँ — राम-लक्ष्मण (श्याम-गौर) और भरत-शत्रुघ्न।

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राजा प्रतापभानु कौन थे और कहाँ राज्य करते थे?

प्रतापभानु एक प्रतापी चक्रवर्ती राजा थे जिन्होंने सातों द्वीप जीत लिये। मन्त्री धर्मरुचि शुक्राचार्य समान बुद्धिमान् था। प्रजा सुखी थी। ब्राह्मणों के शाप से वे अगले जन्म में रावण बने।

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मनु और शतरूपा कौन थे?

मनु और शतरूपा ब्रह्माजी की सृष्टि के प्रथम मानव दम्पति (राजा-रानी) थे। बुढ़ापे में विषय-वैराग्य न होने पर दुखी होकर पुत्र को राज्य देकर वनवास गये। नैमिषारण्य तीर्थ में भगवान की तपस्या की।

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'हरि' शब्द का दोहरा अर्थ क्या है जो भगवान ने नारदजी से कहा?

'हरि' के दो अर्थ — (1) भगवान विष्णु (सुन्दर), (2) वानर/बन्दर। नारदजी ने विष्णु-रूप माँगा, भगवान ने वानर-रूप दिया। भगवान ने कहा — जैसे वैद्य रोगी को कुपथ्य नहीं देता, वैसे ही मैंने तुम्हारा हित किया।

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जय-विजय कौन थे और उन्हें किसने शाप दिया?

जय-विजय भगवान विष्णु के वैकुण्ठ द्वारपाल थे। सनकादि ऋषियों (ब्रह्माजी के मानसपुत्र) ने शाप दिया — असुर योनि में जन्म लोगे। तीन जन्म — हिरण्याक्ष-हिरण्यकशिपु, रावण-कुम्भकर्ण, शिशुपाल-दन्तवक्र। रामावतार में रावण-कुम्भकर्ण जय-विजय ही थे।

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हिमवान कौन हैं और उनकी पत्नी का क्या नाम है?

हिमवान (हिमालय) पर्वतों के राजा हैं — मानस में 'सैलराज', 'गिरिराज', 'हिमाचल' कहा गया। उनकी पत्नी का नाम मैना (मैनावती) है। इन्हीं के घर सतीजी ने पार्वती रूप में पुनर्जन्म लिया।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

'रामचरितमानस एहि नामा। सुनत श्रवन पाइअ बिश्रामा' — इसका अर्थ क्या है?

अर्थ — इसका नाम 'रामचरितमानस' है, जिसके कानों से सुनते ही शान्ति (विश्राम) मिलती है। विषय-तापसे जलता मनरूपी हाथी इस मानसरूपी सरोवर में आकर सुखी हो जाता है।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

'नौमी भौम बार मधुमासा। अवधपुरीं यह चरित प्रकासा' — इसका अर्थ क्या है?

अर्थ — चैत्र मास (मधुमास) की नवमी तिथि, मंगलवार (भौम बार) को अयोध्यापुरी (अवधपुरी) में यह चरित्र (रामचरितमानस) प्रकाशित हुआ। यही रामनवमी का दिन है जब भगवान राम का जन्म हुआ था।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

'जपहिं नामु जन आरत भारी। मिटहिं कुसंकट होहिं सुखारी' — चार प्रकार के भक्त कौन हैं?

चार प्रकार के भक्त हैं — (1) अर्थार्थी (धन चाहने वाले), (2) आर्त (संकट निवृत्ति चाहने वाले), (3) जिज्ञासु (भगवान को जानने वाले), (4) ज्ञानी (तत्त्व से जानकर प्रेम से भजने वाले)। चारों को नाम का आधार है, पर ज्ञानी भक्त प्रभु को विशेष प्रिय हैं।

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'बालमीक नारद घटजोनी' — यहाँ घटजोनी कौन हैं?

'घटजोनी' मुनि अगस्त्यजी हैं। उनका जन्म कलश (घड़े) से हुआ था इसलिये उन्हें 'घटजोनी' या 'कुम्भज' कहते हैं। इस चौपाई में वाल्मीकिजी, नारदजी और अगस्त्यजी तीनों का उल्लेख है।

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