विस्तृत उत्तर
मनु और शतरूपा प्रथम मानव दम्पति थे — ब्रह्माजी की सृष्टि में प्रथम राजा और रानी।
बालकाण्ड में शिवजी ने पार्वतीजी को बताया कि मनु-शतरूपा ने भगवान की तपस्या करके 'तुम सम पुत्र' (आपके समान पुत्र) का वरदान माँगा — और इसी वरदान के फलस्वरूप भगवान ने रामावतार लिया।
मनु ने घर में रहते हुए बुढ़ापा आ जाने पर भी विषयोंसे वैराग्य नहीं हुआ — तब दुखी होकर उन्होंने पुत्रको जबरदस्ती राज्य देकर स्वयं स्त्रीसहित वनको गमन किया।
वे नैमिषारण्य तीर्थ गये जो अत्यन्त पवित्र और साधकोंको सिद्धि देनेवाला प्रसिद्ध तीर्थ है। वहाँ मुनियों और सिद्धोंके समूह बसते थे।





