विस्तृत उत्तर
'हरि' शब्द के दो अर्थ हैं:
- 1हरि = भगवान विष्णु (सुन्दर, मनमोहक रूप)
- 2हरि = वानर/बन्दर
नारदजी ने भगवान से कहा — 'मुझे हरि रूप दे दीजिये' — उनका मतलब था कि भगवान विष्णु जैसा सुन्दर रूप मिले। पर भगवान ने 'हरि' का दूसरा अर्थ (वानर) प्रयोग करके उन्हें बन्दर का मुख दे दिया।
भगवान ने बाद में समझाया — 'कुपथ माग रुज ब्याकुल रोगी। बैद न देइ सुनहु मुनि जोगी। एहि बिधि हित तुम्हार मैं ठयऊ। कहि अस अंतरहित प्रभु भयऊ॥'
अर्थ — हे योगी मुनि! सुनिये, रोगसे व्याकुल रोगी कुपथ्य माँगे तो वैद्य उसे नहीं देता। इसी प्रकार मैंने भी तुम्हारा हित करनेकी ठान ली है। ऐसा कहकर भगवान अन्तर्धान हो गये।
इस प्रकार भगवान ने 'हरि' शब्द की श्लेष (दोहरे अर्थ) का प्रयोग करके नारदजी का अभिमान तोड़ा।





