विस्तृत उत्तर
हिमवान (हिमालय) पर्वतों के राजा (पर्वतराज/गिरिराज/शैलराज) हैं। बालकाण्ड में उन्हें 'सैलराज', 'गिरिराज' और 'हिमाचल' आदि नामों से सम्बोधित किया गया है। उनकी पत्नी का नाम मैना (मैनावती) है।
बालकाण्ड में — 'सैलराज बड़ आदर कीन्हा। पद पखारि बर आसनु दीन्हा। नारि सहित मुनि पद सिरु नावा। चरन सलिल सबु भवनु सिंचावा॥'
इसका अर्थ — पर्वतराजने (नारदजीका) बड़ा आदर किया और चरण धोकर उत्तम आसन दिया। फिर अपनी स्त्रीसहित मुनिके चरणोंमें सिर नवाया और उनके चरणोदकको सारे घरमें छिड़काया।
पार्वतीजी हिमवान और मैना की पुत्री हैं। शिव पुराण के अनुसार मैना मेरु पर्वत की पुत्री थीं। हिमवान और मैना के घर ही सतीजी ने पार्वती रूप में जन्म लिया।





