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क्या है

यमराज क्या है?(23)

यमराज का अर्थयमराज क्या है?यमराज का महत्व
सरल उत्तर

यमराज सूर्य देव के पुत्र और दक्षिण दिशा के दिक्पाल हैं। वे केवल प्राण नहीं हरते बल्कि जीवों के कर्मों का न्याय भी करते हैं, इसीलिए उन्हें धर्मराज कहते हैं।

स्रोत प्रश्न: यमराज कौन हैं और उन्हें धर्मराज क्यों कहते हैं? →
दिव्यास्त्र

संवर्त अस्त्र के अधिपति देवता कौन हैं?

संवर्त अस्त्र के अधिपति देवता यमराज हैं जिन्हें 'काल' भी कहते हैं। यह संहार और अंतिम न्याय का अस्त्र है जिससे कोई बच नहीं सकता।

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दिव्यास्त्र

संवर्त अस्त्र क्या है?

संवर्त अस्त्र यमराज का दिव्यास्त्र है जो प्रलय जैसा विनाश करता है। इसका महाकाव्यों में केवल एक बार प्रयोग हुआ जब भरत ने तीन करोड़ गंधर्वों का संहार किया था।

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दिव्यास्त्र

यमराज कौन हैं और उन्हें धर्मराज क्यों कहते हैं?

यमराज सूर्य देव के पुत्र और दक्षिण दिशा के दिक्पाल हैं। वे केवल प्राण नहीं हरते बल्कि जीवों के कर्मों का न्याय भी करते हैं, इसीलिए उन्हें धर्मराज कहते हैं।

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दिव्यास्त्र

यमदण्ड क्या है?

यमदण्ड के अनेक अर्थ हैं — यमराज का निजी अस्त्र, अर्जुन को मिला दिव्यास्त्र, मृत्यु के बाद पापी आत्मा का दण्ड, और जैन कथाओं में एक पात्र का नाम।

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दिव्यास्त्र

मृत्यु के समय तुलसी रखने से क्या होता है?

मृत्यु के समय सिरहाने तुलसी या मुख में तुलसी पत्ता होने पर यमदूत आत्मा को नहीं ले जाते और स्वयं यमराज भी उस आत्मा को प्रणाम करते हैं।

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लोक

यमराज और भरणी नक्षत्र का संबंध क्या है?

भरणी नक्षत्र यमराज के अधीन है और पितृलोक से जुड़ा है।

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लोक

भरणी नक्षत्र के अधिपति कौन हैं?

भरणी नक्षत्र के अधिपति यमराज हैं।

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पद्म पुराण

यम-द्वितीया क्या है?

यम-द्वितीया कार्तिक शुक्ल द्वितीया का एक विशेष नाम है। पद्म पुराण के अनुसार प्राचीन काल में देवी यमुना ने इसी तिथि पर अपने भाई यमराज को घर में आदरपूर्वक भोजन कराया था। प्रसन्न यमराज ने द्वितीया को महोत्सर्ग घोषित किया, और नरक के जीवों को भी तृप्ति दी। इसे भाई-दूज या भ्रातृ-द्वितीया भी कहते हैं।

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तिथि शास्त्र

द्वितीया तिथि का अधिष्ठाता देवता कौन है?

द्वितीया तिथि का मुख्य अधिष्ठाता देवता यमराज हैं, जिनका इस तिथि पर विशेष आधिपत्य रहता है। पद्म पुराण के अनुसार यमुना ने यमराज को इसी तिथि पर भोजन कराया था। श्राद्ध के मूल अधिष्ठाता देवता वसु, रुद्र और आदित्य हैं, जो क्रमशः पिता, पितामह और प्रपितामह पीढ़ियों के प्रतिनिधि हैं। साथ ही विश्वेदेव पुरूरवा-आर्द्रव या क्रतु-दक्ष भी आहूत होते हैं।

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लोक

सौरिपुर क्या है?

सौरिपुर यममार्ग का दूसरा नगर है, जहाँ यमराज का छोटा भाई सौरि शासन करता है और आत्मा द्वितीय मास का पिंड ग्रहण करती है।

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लोक

यमदूत कौन हैं?

यमदूत यमराज के दंडाधिकारी हैं, जो मृत्यु के बाद पापी आत्मा को यमलोक तक ले जाते हैं।

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लोक

यमराज कौन हैं?

यमराज मृत्यु के देवता, धर्मराज, पितरों के अधिपति और ब्रह्मांडीय न्याय के सर्वोच्च अधिकारी हैं।

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लोक

यमलोक का मुख्य उद्देश्य क्या है?

यमलोक का उद्देश्य हर जीव के कर्मों का निष्पक्ष मूल्यांकन करके उसके अनुसार न्याय और दंड या फल देना है।

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मरणोपरांत आत्मा यात्रा

मरणोपरांत आत्मा की यात्रा में कर्मों की भूमिका क्या है?

कर्म आत्मा की गति तय करते हैं; यमराज चित्रगुप्त के कर्म-लेख के आधार पर स्वर्ग, उच्च लोक या नरक का निर्णय करते हैं।

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मरणोपरांत आत्मा यात्रा

चित्रगुप्त कौन हैं?

चित्रगुप्त यमराज के अभिलेखकर्ता हैं, जो जीवों के कर्मों का लेखा रखते हैं।

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मंत्र और उपासना

महामृत्युंजय मंत्र और मार्कण्डेय ऋषि की कथा क्या है?

मार्कण्डेय ऋषि ने महामृत्युंजय मंत्र का निरंतर जप किया → यमराज को परास्त किया → शिव ने शिवलिंग से प्रकट होकर 'चिरंजीवी' होने का वरदान दिया।

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महामृत्युंजय मंत्र परिचय

मार्कण्डेय और महामृत्युंजय मंत्र की कथा क्या है?

महर्षि मृकंडु ने अल्पायु किंतु गुणवान पुत्र मार्कण्डेय को चुना। १६ वर्ष की अल्पायु जानकर मार्कण्डेय ने शिवलिंग के समक्ष इस मंत्र का जप किया — जप ऊर्जा और शिव कृपा ने यमराज को पराजित किया और मार्कण्डेय चिरंजीवी हुए।

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जीवन एवं मृत्यु

नरक में भेजने की प्रक्रिया क्या है?

नरक में भेजने की प्रक्रिया है — यमराज का निर्णय → यमदूत द्वारा पकड़कर ले जाना → दक्षिण द्वार से प्रवेश → नरक के यमदूतों को सौंपना → पाप के अनुसार यातना शुरू। एक से अधिक नरकों में क्रमशः दंड हो सकता है।

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जीवन एवं मृत्यु

धर्मराज कौन हैं?

धर्मराज यमराज का दूसरा नाम है — धर्म और सत्य के राजा। वे भगवान सूर्य के पुत्र हैं, वाहन भैंसा और हाथ में दंड-पाश हैं। वे समस्त प्राणियों के कर्मों का न्याय करते हैं और स्वर्ग-नरक का निर्णय देते हैं।

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जीवन एवं मृत्यु

चित्रगुप्त का कार्य क्या है?

चित्रगुप्त का कार्य प्रत्येक जीव के गुप्त-प्रकट सभी कर्मों का लेखा रखना और यमराज के समक्ष प्रस्तुत करना है। वे निष्पक्ष न्याय के प्रतीक हैं — किसी के लिए कोई पक्षपात नहीं।

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देवी-देवता परिचय

यम देव का वाहन क्या है?

यम देव का वाहन भैंसा (महिष) है। इसीलिए उन्हें 'महिषवाहन' कहते हैं। भैंसा शक्ति, गंभीरता और न्याय के निष्पक्ष स्वभाव का प्रतीक है।

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आत्मा और मोक्ष

यमलोक क्या है और वहाँ क्या होता है

यमलोक = धर्मराज यम का न्यायालय। मृत्यु बाद यमदूत आत्मा को ले जाते हैं → चित्रगुप्त कर्म लेखा प्रस्तुत → यम कर्मानुसार न्याय (स्वर्ग/नरक/पुनर्जन्म)। भगवत्भक्त यमलोक नहीं जाते (भागवत 6.3 — अजामिल कथा)।

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त्योहार पूजा

दीपावली पर यमदीपदान क्या होता है और कैसे करें?

यमदीपदान: यमराज हेतु दीपक (अकाल मृत्यु रक्षा)। सरसों तेल, 4 बत्ती, दक्षिण दिशा, घर बाहर। 'त्रयोदश्यां दीपदानात्...' मंत्र। रात भर जले।

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