विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में नरक में भेजने की प्रक्रिया का चरणबद्ध वर्णन है।
पहला चरण — यमलोक में पेशी और निर्णय। जीव यमलोक पहुँचता है। चित्रगुप्त का लेखा प्रस्तुत होता है। यमराज निर्णय करते हैं कि जीव को किस नरक में, कितने समय के लिए भेजना है।
दूसरा चरण — यमदूत द्वारा नरक तक ले जाना। यमराज की आज्ञा होते ही यमदूत जीव को पकड़कर संबंधित नरक की ओर ले जाते हैं।
तीसरा चरण — दक्षिण द्वार से प्रवेश। पापी जीव यमलोक के दक्षिण द्वार से प्रवेश करता है जो नरक का द्वार है। यहाँ 'घोर अंधकार, भयानक सर्प, सिंह और भेड़िये जैसे जीव' होते हैं।
चौथा चरण — नरक में प्रविष्टि। संबंधित नरक में पहुँचने पर जीव को वहाँ के यमदूत अपने अधिकार में ले लेते हैं और उसके पाप के अनुसार यातना प्रारंभ होती है।
गरुड़ पुराण में कहा गया है — 'सदा पापकर्मों में लगे हुए प्राणी एक नरक से दूसरे नरक को, एक दुःख के बाद दूसरे दुःख को प्राप्त होते हैं।' यह संकेत करता है कि एक ही नरक नहीं — अनेक नरकों में क्रमशः दंड भोगना पड़ सकता है।





