📖
विस्तृत उत्तर
कूर्मावतार समुद्र मंथन का आधार है। देवताओं और असुरों ने मंदराचल पर्वत को मथानी बनाया, लेकिन पर्वत समुद्र में डूबने लगा। बिना आधार के मंथन संभव नहीं था। तब भगवान विष्णु ने कूर्मावतार लिया और अपनी विशाल पीठ पर मंदराचल को धारण किया। पर्वत उनकी पीठ पर स्थिर होकर घूमने लगा, जिससे क्षीरसागर का मंथन पूरा हुआ। यदि कूर्मावतार न होता, तो न हलाहल विष निकलता, न लक्ष्मी जी प्रकट होतीं और न अमृत कलश मिलता। इसलिए समुद्र मंथन कूर्मावतार के बिना अधूरा है।
🔗
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक
इसे अपने प्रियजनों के साथ साझा करें
क्या यह उत्तर सहायक था?

