विस्तृत उत्तर
स्वर्लोक की अरुणोदा नदी का निर्माण एक अत्यंत अद्भुत और अलौकिक प्रक्रिया से होता है। सुमेरु के निकट मंदराचल पर्वत के ढलानों पर 'देवचूत' नामक विशाल आम्र वृक्ष स्थित हैं। इन वृक्षों से पर्वत के शिखरों के समान बड़े आकार के आम के फल टूटकर गिरते हैं। जब ये विशालकाय फल फूटते हैं तो उनके अत्यंत मीठे रस से 'अरुणोदा' नामक एक पूरी नदी का निर्माण होता है। इस प्रकार अरुणोदा नदी किसी पर्वत के जल स्रोत या वर्षा से नहीं बनती बल्कि विशाल दिव्य आम्र फलों के रस से बनती है। यह नदी स्वर्लोक की अनूठी विशेषताओं में से एक है जो यह दर्शाती है कि स्वर्ग में सभी प्राकृतिक संसाधन पृथ्वी से सर्वथा भिन्न प्रकार से उत्पन्न होते हैं। यह नदी स्वर्ग के निवासियों के लिए एक दिव्य जल स्रोत है।
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