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कूर्मावतार क्या है?

संक्षिप्त उत्तर

कूर्मावतार विष्णु का कछुआ रूप है, जिसमें उन्होंने मंदराचल पर्वत को अपनी पीठ पर संभाला।

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विस्तृत उत्तर

कूर्मावतार भगवान विष्णु का कच्छप या कछुआ रूप है। समुद्र मंथन के समय जब मंदराचल पर्वत क्षीरसागर में डूबने लगा, तब भगवान विष्णु ने विशाल कछुए का रूप धारण किया। वे समुद्र की गहराई में गए और अपनी कठोर, विशाल पीठ पर मंदराचल पर्वत को धारण किया। इससे पर्वत स्थिर हो गया और देव-असुर मंथन जारी रख सके। कूर्मावतार विष्णु के दशावतारों में से एक माना जाता है। यह अवतार आधार, धैर्य और छिपे हुए ईश्वरीय समर्थन का प्रतीक है।

उत्तर को थोड़ा और स्पष्ट करें

कूर्मावतार क्या है को संदर्भ सहित समझें

कूर्मावतार क्या है का सबसे सीधा सार यह है: कूर्मावतार विष्णु का कछुआ रूप है, जिसमें उन्होंने मंदराचल पर्वत को अपनी पीठ पर संभाला।

लोक जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है.

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