📖
विस्तृत उत्तर
कूर्मावतार भगवान विष्णु का कच्छप या कछुआ रूप है। समुद्र मंथन के समय जब मंदराचल पर्वत क्षीरसागर में डूबने लगा, तब भगवान विष्णु ने विशाल कछुए का रूप धारण किया। वे समुद्र की गहराई में गए और अपनी कठोर, विशाल पीठ पर मंदराचल पर्वत को धारण किया। इससे पर्वत स्थिर हो गया और देव-असुर मंथन जारी रख सके। कूर्मावतार विष्णु के दशावतारों में से एक माना जाता है। यह अवतार आधार, धैर्य और छिपे हुए ईश्वरीय समर्थन का प्रतीक है।
🔗
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक
इसे अपने प्रियजनों के साथ साझा करें
क्या यह उत्तर सहायक था?





