विस्तृत उत्तर
समुद्र मंथन की कथा इंद्र के अहंकार से शुरू होती है। दुर्वासा ऋषि की माला का अपमान होने पर देवता श्रीहीन हो गए और असुरों ने स्वर्ग जीत लिया। देवता विष्णु की शरण में गए। विष्णु ने असुरों से संधि कर क्षीरसागर मंथन का उपाय बताया। मंदराचल पर्वत मथानी, वासुकी नाग रस्सी और कूर्मावतार आधार बने। मंथन से पहले हलाहल विष निकला, जिसे शिव ने पीकर सृष्टि बचाई। फिर चौदह रत्न, लक्ष्मी जी और धन्वंतरि अमृत कलश सहित प्रकट हुए। असुरों ने अमृत छीना, लेकिन विष्णु ने मोहिनी बनकर अमृत देवताओं को पिला दिया।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक
